भ्रष्ट निगम की खुल गई पोल जब क्षेत्राधिकारी को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते किया गिरफ्तार
क्षेत्राधिकारी 30 हजार रुपए की रिश्वत मांगी, बात 15 हजार रुपये में तय हो गई। दो कर्मियों के रिश्वत कांड में पकडे जाने के बाद निगम आयुक्त ने आनन फानन ने दोनों को निलंबित कर दिया। लेकिन इस घटना ने नगर निगम के कामकाज पर सवाल खडे किए हैं
By : गजेन्द्र इंगले
Update: 2023-07-05 03:13 GMT
ग्वालियर: नगर निगम ग्वालियर में पत्ते पत्ते पर भ्रष्ट गिद्ध बेठा है, इसकी हकीकत एकबार फिर उस समय सामने आ गई जब निगम का एक ऑउट सोर्स कर्मी को अपने क्षेत्र अधिकारी के लिए रिश्वत लेते लोकायुक्त ने गिरफ्तार कर लिया। अपने जोनल ऑफिसर यानी क्षेत्राधिकारी के इशारे पर 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने गोला का मंदिर पहुंचे आउट सोर्स कर्मचारी विवेक सिंह तोमर को लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इससे पहले जेड ओ पांच हजार रुपए की रिश्वत पहले ही फरियादी से झटक चुका था।
हुआ यूं कि रिटायर्ड फौजी राकेश सिकरवार के दीनदयाल नगर के सेक्टर जी में दो प्लॉट है। यहां वह मकान बनवाना चाह रहे थे। भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था। यह फाइल विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरती हुए नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय 8 पर पहुंच गई। जहां क्षेत्राधिकारी उत्पल सिंह भदोरिया ने इस पूरे काम के लिए फरियादी राकेश सिकरवार से 30 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। लेकिन उन्होंने इतनी बड़ी रकम देने से इंकार कर दिया। इसके बाद बात 15 हजार रुपये में तय हो गई। जेड ओ उत्पल सिंह भदौरिया पहले फरियादी राकेश सिकरवार से पांच हजार रुपए की रिश्वत ले चुका था। बाकी पैसे दस हजार रुपये मंगलवार को देना तय हुआ था।
फरियादी जब रिश्वत की रकम लेकर क्षेत्राधिकारी के कार्यालय पहुंचा तब उसने अपने आउटसोर्स कर्मचारी विवेक सिंह तोमर को पैसे लेने के लिए गोला का मंदिर चौराहे पर भेजा। इससे पहले फरियादी राकेश सिकरवार रिश्वत कांड की शिकायत लोकायुक्त पुलिस में कर चुका था और इन लोगों की फोन की रिकॉर्डिंग भी लोकायुक्त पुलिस के पास पहुंच चुकी थी। उसके बाद ट्रेप करने की योजना बनाई गई और जैसे ही मंगलवार दोपहर को राकेश सिकरवार ने रिश्वत के दस हजार रुपए विवेक सिंह तोमर को दिए वैसे ही उसे सादा कपड़ों में तैनात लोकायुक्त पुलिस की टीम ने पकड़ लिया। हाथ धुलवाने पर उसके हाथ रंगीन हो गए।
दो कर्मियों के रिश्वत कांड में पकडे जाने के बाद निगम आयुक्त ने आनन फानन ने दोनों को निलंबित कर दिया। लेकिन इस घटना ने नगर निगम के कामकाज पर सवाल खडे किए हैं।