चिन्मयानंद दुष्कर्म मामला: सुनवाई से हटी जस्टिस भानुमति

दुष्कर्म पीड़िता के पिता की याचिका न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी।

Update: 2020-03-02 16:13 GMT

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में कानून की छात्रा से दुष्कर्म मामले के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद के खिलाफ मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने संबंधी याचिका की सुनवाई सोमवार को नहीं हो सकी, क्योंकि एक न्यायाधीश ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।

दुष्कर्म पीड़िता के पिता की याचिका न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। जैसे ही इस मामले की सुनवाई का नंबर आया, खंडपीठ का नेतृत्व कर रही न्यायमूर्ति भानुमति ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।

उन्होंने, हालांकि इसके पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया है।

गौरतलब है कि पीड़िता के पिता ने याचिका में कहा है कि चिन्मयानंद रसूखदार आदमी है और उनके परिजनों को जान का खतरा है। उन्होंने चिन्मयानंद के खिलाफ मुकदमा की सुनवाई दिल्ली में कराने का अनुरोध किया है।

चिन्मयानंद को पिछले वर्ष 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसका न्यास शाहजहांपुर लॉ कॉलेज का संचालन करता है। उसी कॉलेज में पीड़िता पढ़ती थी। चिन्मयानंद ने कथित तौर पर उसका दुष्कर्म किया था।

लॉ की 23 वर्षीय छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर डाली थी, उसके बाद पिछले वर्ष अगस्त में कुछ दिन तक उसका कोई पता नहीं लगा था जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले में दखल दिया था।

शीर्ष अदालत के निर्देश पर गठित उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल ने चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन फरवरी को उसे जमानत दे दी थी।

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