छत्तीसगढ़ में 500 लोगों की ‘घर वापसी’, धार्मिक अनुष्ठान के बीच सनातन धर्म अपनाने का संकल्प

यह आयोजन ऐसे समय हुआ, जब तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में सावन के दूसरे सोमवार से सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के पूजन का कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसी धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में घर वापसी का कार्यक्रम भी हुआ।;

Update: 2026-08-12 05:56 GMT

जांजगीर : छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में सोमवार को धार्मिक आयोजन के दौरान करीब 500 धर्मांतरित लोगों की सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ कराई गई। यह कार्यक्रम धार्मिक नगरी शिवरीनारायण क्षेत्र के तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में आयोजित हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई और लोगों को सनातन धर्म की परंपराओं एवं संस्कारों से जुड़ने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में भाजपा नेता और घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सामाजिक कार्यकर्ता अंजू गबेल प्रमुख रूप से मौजूद रहे। दोनों ने घर वापसी करने वाले लोगों के पैर धोकर धार्मिक परंपरा के अनुरूप उनका स्वागत किया। इसके बाद पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से उन्हें सनातन धर्म से जुड़ने का संकल्प दिलाया गया।

 सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का पूजन

यह आयोजन ऐसे समय हुआ, जब तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में सावन के दूसरे सोमवार से सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के पूजन का कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसी धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में घर वापसी का कार्यक्रम भी हुआ। आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के अलावा ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। धार्मिक वातावरण के बीच पूजा-अर्चना और अन्य अनुष्ठान संपन्न कराए गए। आयोजकों ने इसे सनातन परंपराओं और धार्मिक चेतना से जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया।

माता शबरी की भूमि के रूप में प्रसिद्ध है शिवरीनारायण

जांजगीर क्षेत्र का शिवरीनारायण धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसे माता शबरी की भूमि माना जाता है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता शबरी से जुड़ी धार्मिक कथा के कारण यह क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। शिवरीनारायण नाम को भी भगवान श्रीराम की भक्त शबरी और भगवान विष्णु के नाम नारायण से जोड़कर देखा जाता है। सावन के महीने में यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं।

‘सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संदेश’

घर वापसी कार्यक्रम के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, आस्था की पुनर्स्थापना और धर्म चेतना के जागरण का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं और इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। जूदेव ने आयोजन को सनातन परंपराओं और संस्कारों से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। घर वापसी करने वाले लोगों के धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के साथ ही सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के पूजन की प्रक्रिया भी शुरू हुई। आयोजकों ने इस पूरे कार्यक्रम को धार्मिक आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत किया। वहीं, ‘घर वापसी’ शब्द का इस्तेमाल आयोजकों की ओर से उन लोगों के लिए किया गया, जिन्हें उनके अनुसार पहलेधर्मांतरित किया गया था और जिन्होंने अब सनातन धर्म में लौटने का संकल्प लिया।

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