छत्तीसगढ़ : दुर्ग के सरकारी स्कूल में प्रतिबंधित दवा खाने से 8 छात्र बीमार, एक आईसीयू में भर्ती, जांच तेज

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शासकीय चंद्रशेखर आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र द्वारा अपने साथियों को चॉकलेट बताकर संदिग्ध प्रतिबंधित दवा देने का मामला सामने आया है। दवा के सेवन के बाद आठ छात्र बीमार पड़ गए। सभी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जबकि एक छात्र की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।;

Update: 2026-07-19 10:03 GMT

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शासकीय चंद्रशेखर आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र द्वारा अपने साथियों को चॉकलेट बताकर संदिग्ध प्रतिबंधित दवा देने का मामला सामने आया है। दवा के सेवन के बाद आठ छात्र बीमार पड़ गए। सभी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जबकि एक छात्र की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

स्कूल की प्रभारी प्राचार्य नलिनी वर्मा ने बताया कि कथित प्रतिबंधित दवा स्कूल की 10वीं कक्षा के छात्र तरुण गुप्ता ने अन्य छात्रों को दी थी। इस घटना की जानकारी पहले से किसी शिक्षक या स्कूल प्रशासन को नहीं थी। उनके अनुसार, दवा स्कूल परिसर के बाहर दी गई थी और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद ही स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी मिली।

उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को दोपहर करीब दो बजे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने पर उसके परिजनों को बुलाकर अस्पताल भेजा गया। अगले दिन एक अन्य छात्र नैतिक के परिजनों ने स्कूल पहुंचकर बताया कि उसकी हालत गंभीर है। इसके बाद अन्य प्रभावित छात्रों की जानकारी जुटाई गई। फिलहाल चार छात्र अस्पताल में भर्ती हैं और सभी की हालत में सुधार बताया जा रहा है।

प्राचार्य ने बताया कि पूछताछ के दौरान छात्र तरुण गुप्ता ने यह स्वीकार किया है कि उसने दवा अन्य बच्चों को दी थी। हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि यह दवा उसे कहां से मिली। उन्होंने कहा कि प्रशासन और शासन को पूरी जानकारी दे दी गई है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देशों के अनुसार की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित छात्र और अन्य बच्चों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह नशीली या प्रतिबंधित दवा है।

छात्र के. यादव के पिता ने बताया कि उनका बेटा नौवीं कक्षा में पढ़ता है। शुरुआत में उन्हें लगा कि उसे सामान्य सर्दी-खांसी है। उन्होंने रातभर उसकी देखभाल की और अगले दिन अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में जब पता चला कि उसी स्कूल के कई अन्य छात्र भी बीमार हैं, तब उन्हें संदेह हुआ कि मामला सामान्य बीमारी का नहीं, बल्कि किसी नशीले पदार्थ के सेवन का हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया इस घटना में स्कूल के शिक्षकों की कोई गलती नहीं दिखती, लेकिन जिस छात्र ने दवा दी और जिसने उसे उपलब्ध कराया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

एक अन्य छात्र नैतिक रामटेक की मां सारिका रामटेक ने बताया कि उनके बेटे ने 16 जुलाई को वह दवा खाई थी, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। स्कूल की छुट्टी के बाद उन्हें फोन पर बताया गया कि उनका बेटा चक्कर खाकर गिर रहा है। वह नौकरी से छुट्टी लेकर घर पहुंचीं तो बेटा बेहद कमजोर हालत में था। शुरुआत में वह उसे स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाने की सोच रही थीं, लेकिन तबीयत अधिक बिगड़ने पर गंगोत्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन उसकी गर्दन अकड़ने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। फिलहाल उसकी नाक में पाइप लगाकर उपचार किया जा रहा है और डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

सारिका रामटेक ने भी कहा कि इस घटना के लिए स्कूल के शिक्षक जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा हमेशा स्कूल और शिक्षकों की प्रशंसा करता था। उन्होंने मांग की कि यह पता लगाया जाए कि कथित प्रतिबंधित दवा बच्चों तक कैसे पहुंची और इसके पीछे शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस घटना पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि नशे का जाल अब स्कूलों, कॉलेजों और यहां तक कि अस्पतालों तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, 15 से 20 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं तक इस तरह की दवाओं का पहुंचना पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश में फैलते नशे के नेटवर्क का संकेत है।

डॉ. महंत ने राज्य सरकार, गृह विभाग और मुख्यमंत्री से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को नशे की सप्लाई चेन पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए और स्कूलों-कॉलेजों के आसपास ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि प्रतिबंधित दवा छात्र तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।


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