छत्तीसगढ़ : शराब घोटाले मामले में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को मिली जमानत, पूर्व मुख्यमंत्री बोले-सत्य की जीत हुई
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शराब घोटाले के आरोपी चैतन्य बघेल को आज शर्तों के साथ जमानत दे दी है। चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे सत्य की जीत बताया है
शराब घोटाला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शराब घोटाले के आरोपी चैतन्य बघेल को आज शर्तों के साथ जमानत दे दी है। चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे सत्य की जीत बताया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने ईसीआईआर के जरिए इस मामले की जांच शुरू की थी।
शराब घोटाला में पहली प्राथमिकी (एफआईआर) राज्य आर्थिक शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक शाखा छत्तीसगढ़ ने 17 जनवरी 2024 को लिखी थी, शुरुआत में इस घोटाले को 2161 करोड़ का घोटाला माना गया था, जांच एजेंसियों के मुताबिक यह साल 2019 से 2023 तक अंजाम दिया गया था।
बाद में इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय ने भी करना शुरू किया है। ईडी की जांच के बाद यह घोटाला कथित तौर पर 3000 करोड़ तक जा पहुंचा है। चैतन्य को ईडी और आर्थिक अपराध शाखा दोनों के द्वारा दर्ज मामलों में शर्तों के साथ जमानत दी गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमानत का फैसला आने के बाद आज कहा -सत्य की जीत हुई है, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की ओर से एक बड़ी राहत हमें दी गई है। मेरे बेटे की गिरफ्तारी एक फरार आरोपी लक्ष्मी बंसल उर्फ पप्पू बंसल के बयान के आधार पर की गई थी। संकट की इस घड़ी में कांग्रेस हाई कमान से संबल मिला, कार्यकर्ताओं से भी सहयोग मिला, वकीलों के अथक प्रयासों के कारण यह राहत हमें मिली है। हम कांग्रेसियों का यह मानना रहा है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विपक्ष के नेताओं को सीबीआई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय जैसे संस्थानों के जरिए डराने के काम में लगा हुआ है। जो डर जाते हैं वो भाजपा में शामिल हो जाते हैं जो नहीं डरते हैं उन्हें जेल जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस के सिपाही हैं हमारे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया है, जब हम अंग्रेजों से नहीं डरे तो फिर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से क्यों डरें भला।
ईडी ने चैतन्य बघेल को धन शोधन अधिनियम 2022 एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह जांच एजेंसी आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (छत्तीसगढ़) ने 420,467 एवं 471 एवं 120 बी (आईपीसी 1860) एवं धारा 7,12 प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धाराओं का उपयोग चैतन्य के खिलाफ किया था। दोनों ही जांच एजेंसियां फिलहाल आरोपी चैतन्य बघेल की सीधी संलिप्तता के बारे में सुबूत नहीं दे सकी है।
मामले में चैतन्य की ओर से एन. हरिहरन, मयंक जैन, मधुर जैन, अर्पित गोयल एवं दीपक जैन ने पैरवी की, जबकि अभियोजन पक्ष प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जोहेब हुसैन ने जमानत का विरोध किया था। दोनों ही पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शर्तों के साथ आरोपी चैतन्य बघेल को जमानत दी है।
इस मामले में कुछ आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली है। चैतन्य बघेल को जमानत देने में यह भी आधार बना। रायपुर सेंट्रल जेल से कल सुबह साढ़े ग्यारह बजे चैतन्य बघेल के जेल से बाहर आने की संभावना है। आरोपी चैतन्य बघेल को अदालत के आदेश के मुताबिक अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।