भारतीय पत्थर कला की वैश्विक यात्रा

भारत में पत्थर तराशने की परंपरा दुनिया की सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व से यहां राजमिस्त्रियों और शिल्पियों के गिल्ड मौजूद रहे हैं, और यह हुनर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा जाता रहा;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-09-08 17:07 GMT

Petros Stone ने USA और UK तक पहुंच बनाई

  • भारत का प्राकृतिक पत्थर निर्यात 1.2 अरब डॉलर
  • अमेरिकी टैरिफ झटके के बाद उद्योग की वापसी
  • स्टार एक्सपोर्ट हाउस बना Petros Stone

नई दिल्ली। भारत में पत्थर तराशने की परंपरा दुनिया की सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व से यहां राजमिस्त्रियों और शिल्पियों के गिल्ड मौजूद रहे हैं, और यह हुनर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा जाता रहा। खजुराहो, कोणार्क, कैलाश मंदिर और महाबलीपुरम के शोर मंदिर इसी परंपरा की गवाही देते हैं। मकराना का संगमरमर ताजमहल और दिलवाड़ा जैन मंदिरों में लगा। राजस्थान की जाली नक्काशी आज भी आर्किटेक्ट्स के लिए उल्लेखनीय है।

विरासत से उद्योग तक

यह विरासत अब एक बड़ा उद्योग है। अजमेर का किशनगढ़ एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडियों में से एक है, जबकि उदयपुर, हैदराबाद और होसूर में बड़े प्रोसेसिंग क्लस्टर विकसित हुए हैं। भारत आज दुनिया के प्रमुख ग्रेनाइट निर्यातकों में है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने करीब 1.2 अरब डॉलर का प्राकृतिक पत्थर निर्यात किया, जिसमें पॉलिश्ड ग्रेनाइट की हिस्सेदारी लगभग 62.5% रही। यानी अब केवल कच्चे ब्लॉक नहीं, प्रोसेस्ड और मूल्य-वर्धित पत्थर भी जाते हैं।

झटका और वापसी

रास्ता आसान नहीं रहा। अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगने से पत्थर उद्योग प्रभावित हुआ। उद्योग संगठनों ने निर्यात में 50% तक गिरावट और दो लाख से अधिक नौकरियों पर संकट का अनुमान लगाया। फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के बाद यह दर 18% हुई। सबक साफ़ था: एक ही बाजार पर निर्भरता जोखिमपूर्ण है, और वैश्विक व्यापार में गुणवत्ता, अनुपालन और भरोसा निर्णायक हैं।

Petros® Stone का एक उदाहरण

पुणे की Petros® Stone LLP इसी बदलाव का उदाहरण है। खदानों तक सीधी पहुंच और अपनी प्रोसेसिंग क्षमता के दम पर कंपनी ने बीते चार वर्षों में 1,000 से अधिक कंटेनर 50 से अधिक देशों में भेजे हैं, जिनमें USA, UK, UAE, क़तर और वियतनाम शामिल हैं।

मियामी के एक फ़ाइव-स्टार प्रोजेक्ट के लिए 220 कंटेनरों में भेजा गया 1,08,500 वर्ग मीटर पैटागोनिया क्वार्टज़ाइट कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा अनुबंध रहा। कुवैत, ग्रीस, कनाडा और जर्मनी में सेल्स ऑफिस हैं; ग्रीस के लिए 5-एक्सिस CNC पर तराशी मूर्तियां भी भेजी गई हैं।

“गुणवत्ता कोई नारा नहीं है — वैश्विक मंच पर काम करने के लिए यह एक कानूनी और ढांचागत शर्त है।”

  • ऋषभ जैन, डायरेक्टर – इंटरनेशनल बिज़नेस, Petros® Stone LLP

मई 2026 में कंपनी को भारत सरकार के DGFT से स्टार एक्सपोर्ट हाउस का दर्जा मिला। यह उपलब्धि कंपनी के निर्यात प्रदर्शन और अनुपालन क्षमता को दर्शाती है।

“स्टार एक्सपोर्ट हाउस के रूप में पहचान मिलना हमारे संगठन के लिए एक अहम पड़ाव है। यह हमारे वैश्विक ग्राहकों के भरोसे, गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता और हमारी टीम की मेहनत को दर्शाता है।”

  • ऋषभ जैन, Petros® Stone LLP

आगे का रास्ता

बदलाव छेनी से CNC तक का है, लेकिन मूल कौशल वही है। भारत अब मिलीमीटर की सटीकता वाले काउंटरटॉप, फ़साड और कस्टम स्टोनवर्क बना रहा है। अगला अवसर केवल वॉल्यूम में नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन, प्रीफ़ैब्रिकेशन, डिज़ाइन, सर्टिफ़िकेशन और ब्रांडिंग में है। भारतीय पत्थर की पहचान अब किफायती विकल्प की नहीं, भरोसेमंद और मूल्य-वर्धित शिल्प की बनानी होगी।

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