बाजार की पाठशाला: पर्सनल लोन लेने का है प्लान? जानिए सरकारी और निजी बैंकों में कौन दे रहा सबसे सस्ते ब्याज पर कर्ज

अचानक किसी बड़े खर्च, मेडिकल इमरजेंसी, शादी, यात्रा या अन्य वित्तीय जरूरत के लिए पर्सनल लोन अक्सर सबसे आसान विकल्प माना जाता है;

Update: 2026-09-06 20:42 GMT

नई दिल्ली। अचानक किसी बड़े खर्च, मेडिकल इमरजेंसी, शादी, यात्रा या अन्य वित्तीय जरूरत के लिए पर्सनल लोन अक्सर सबसे आसान विकल्प माना जाता है। हालांकि, लोन लेते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि बैंक कितनी रकम दे रहा है। ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन अवधि और प्री-पेमेंट नियम जैसे कई पहलू आपकी कुल लागत को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सितंबर 2026 में विभिन्न बैंकों की पर्सनल लोन ब्याज दरों की तुलना करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

उपलब्ध ब्याज दरों के अनुसार, निजी क्षेत्र के बैंकों में एक्सिस बैंक सबसे कम 8.75 प्रतिशत सालाना की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन की पेशकश कर रहा है। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक दोनों की शुरुआती ब्याज दर 9.99 प्रतिशत है। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक की शुरुआती दर 10.99 प्रतिशत और इंडसइंड बैंक की 12 प्रतिशत से शुरू होती है।

इस आधार पर देखा जाए तो कम शुरुआती ब्याज दर के मामले में एक्सिस बैंक फिलहाल निजी क्षेत्र के बैंकों में सबसे प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में उभरता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सबसे कम 9.05 प्रतिशत सालाना की शुरुआती ब्याज दर ऑफर कर रहा है। इसके बाद केनरा बैंक की दर 9.70 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की 10 प्रतिशत, बैंक ऑफ बड़ौदा की 10.15 प्रतिशत, पंजाब नेशनल बैंक की 10.25 प्रतिशत और बैंक ऑफ इंडिया की 10.85 प्रतिशत है।

इस प्रकार सरकारी बैंकों के बीच यूनियन बैंक और केनरा बैंक सबसे आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश करते दिखाई देते हैं।

हालांकि बैंक द्वारा घोषित शुरुआती ब्याज दर को अंतिम दर नहीं माना जा सकता। वास्तविकता में प्रत्येक ग्राहक को उसके वित्तीय प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश की जाती है।

बैंक लोन मंजूर करने से पहले आवेदक का सिबिल स्कोर, मासिक आय, नौकरी की स्थिरता, पहले से चल रहे ऋण, ईएमआई दायित्व और पुनर्भुगतान इतिहास (रीपेमेंट हिस्ट्री) का मूल्यांकन करते हैं। यदि किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर मजबूत है और आय स्थिर है, तो उसे कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना अधिक होती है। वहीं कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल या अधिक मौजूदा कर्ज होने पर बैंक अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दर लगा सकते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि लोन चुनते समय केवल ब्याज दरों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कई बार बैंक कम ब्याज दर दिखाते हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क अधिक होने के कारण कुल लागत बढ़ जाती है।

इसलिए किसी भी पर्सनल लोन को अंतिम रूप देने से पहले ब्याज दर के साथ-साथ प्रोसेसिंग शुल्क, डॉक्यूमेंटेशन फीस और अन्य लागू शुल्कों की भी तुलना करनी चाहिए।

कई लोग कम मासिक ईएमआई के लिए लंबी अवधि का लोन चुन लेते हैं। इससे मासिक भुगतान का बोझ कम हो जाता है, लेकिन लंबे समय में कुल चुकाया जाने वाला ब्याज काफी बढ़ सकता है।

इस कारण वित्तीय सलाहकार हमेशा सुझाव देते हैं कि उधारकर्ता अपनी आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए ऐसी अवधि चुनें, जिससे ईएमआई भी संतुलित रहे और कुल ब्याज का बोझ भी अधिक न बढ़े।

यदि भविष्य में लोन को समय से पहले चुकाने की योजना है, तो बैंक की प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। कई बैंक समयपूर्व भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं, जिससे आपकी बचत कम हो सकती है। इसलिए लोन लेने से पहले सभी नियमों और शर्तों को समझना बेहद जरूरी है।

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