डिजिटल पेमेंट पर RBI की सख्ती: 15 हजार से ऊपर ऑटो पेमेंट के लिए अतिरिक्त सत्यापन अनिवार्य

नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई ग्राहक ई-मैंडेट के जरिए 15,000 रुपये से अधिक का ऑटो पेमेंट सेट करता है, तो उस लेनदेन के लिए अतिरिक्त सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह सत्यापन सामान्य प्रक्रिया के अलावा होगा, यानी सिर्फ एक बार की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी।;

Update: 2026-04-22 02:59 GMT

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए ई-मैंडेट से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। नई गाइडलाइन के तहत अब 15 हजार रुपये से अधिक के हर ऑटोमेटिक पेमेंट (ऑटो पेमेंट) पर अतिरिक्त सत्यापन (Additional Authentication) अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और इसका उद्देश्य ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी की आशंकाओं को कम करना है।

किन पर लागू होंगे नए नियम?

RBI के ये निर्देश सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स और उनसे जुड़े भागीदारों पर लागू होंगे। इसमें बैंक, फिनटेक कंपनियां और अन्य संस्थाएं शामिल हैं, जो कार्ड, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए ऑटो पेमेंट सेवाएं प्रदान करती हैं। यह नियम केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय (सीमापार) लेनदेन पर भी लागू होंगे। यानी अब चाहे भुगतान भारत में हो या विदेश से जुड़ा हो, तय सीमा से ऊपर के ऑटो डेबिट पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच जरूरी होगी।

क्या है नया बदलाव?

नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई ग्राहक ई-मैंडेट के जरिए 15,000 रुपये से अधिक का ऑटो पेमेंट सेट करता है, तो उस लेनदेन के लिए अतिरिक्त सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह सत्यापन सामान्य प्रक्रिया के अलावा होगा, यानी सिर्फ एक बार की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी।

RBI ने स्पष्ट किया है कि किसी भी ई-मैंडेट को सक्रिय करने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद जब तक अतिरिक्त सत्यापन सफल नहीं होता, तब तक मंडेट एक्टिव नहीं माना जाएगा।

पहले ट्रांजैक्शन पर खास ध्यान

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि किसी भी ई-मैंडेट के तहत पहला ट्रांजैक्शन अनिवार्य रूप से इस अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया से गुजरेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक की सहमति पूरी तरह से सत्यापित है और कोई अनधिकृत गतिविधि नहीं हो रही।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क

RBI ने ग्राहकों के हित में एक और महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है कि ई-मैंडेट सुविधा का उपयोग करने के लिए उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी सुरक्षा बढ़ने के बावजूद ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

किस तरह के भुगतान होंगे प्रभावित?

ई-मैंडेट के तहत कई तरह के नियमित भुगतान आते हैं, जैसे- लोन की ईएमआई, बिजली, पानी और मोबाइल बिल, ओटीटी या अन्य सब्सक्रिप्शन

बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश, क्रेडिट कार्ड बिल।   नई गाइडलाइन के मुताबिक, यदि इन भुगतानों की राशि 15,000 रुपये से अधिक है, तो हर बार अतिरिक्त सत्यापन जरूरी होगा। खासतौर पर बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड बिल जैसे भुगतान, जो अक्सर बड़ी राशि के होते हैं, अब अधिक सुरक्षित प्रक्रिया से गुजरेंगे।

एक लाख से ऊपर के भुगतान पर भी लागू नियम

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी ई-मैंडेट के तहत भुगतान राशि एक लाख रुपये से अधिक है, तब भी यह अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया लागू होगी। इसका उद्देश्य बड़े लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाना है।

क्या होता है ई-मैंडेट?

ई-मैंडेट एक डिजिटल निर्देश होता है, जिसके जरिए ग्राहक अपने बैंक खाते, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI से नियमित भुगतान के लिए ऑटो डेबिट की अनुमति देता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और इसे RBI तथा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस सुविधा से ग्राहकों को बार-बार भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि तय समय पर राशि अपने आप कट जाती है।

सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन

RBI के इस फैसले को डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इससे कुछ मामलों में ग्राहकों को अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, लेकिन इससे उनके पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। नई गाइडलाइन का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक भरोसेमंद बनाना है, ताकि ग्राहक बिना किसी चिंता के ऑटो पेमेंट सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

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