शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद आईपीओ बाजार में तेजी

नई दिल्ली, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने 2026 के पहले नौ महीनों (जनवरी-सितंबर) के दौरान आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। यह आंकड़ा 1980 से उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी-सितंबर अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है।;

By :  IANS
Update: 2026-10-09 07:51 GMT

नई दिल्ली, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने 2026 के पहले नौ महीनों (जनवरी-सितंबर) के दौरान आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। यह आंकड़ा 1980 से उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी-सितंबर अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है।

एलएसईजी के विश्लेषण के अनुसार, यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है जब व्यापक शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि आईपीओ की संख्या में कमी देखने को मिली। जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान 220 आईपीओ आए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 268 आईपीओ की तुलना में लगभग 17.9 प्रतिशत कम हैं। इसके बावजूद कुल जुटाई गई राशि 11.3 प्रतिशत बढ़ी, जो यह दर्शाती है कि बड़े आकार के इश्यू बाजार में आए।

डेटा के अनुसार, औसत आईपीओ आकार बढ़कर करीब 5.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह लगभग 4.2 करोड़ डॉलर था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ बड़े आईपीओ ने कुल जुटाई गई राशि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कुल आईपीओ फंड जुटाव का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े इश्यू से आया।

सितंबर 2026 अकेले ही आईपीओ बाजार के लिए बेहद मजबूत महीना रहा। रिपोर्ट में कहा गया कि इस महीने 34 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए करीब 39,380 करोड़ रुपए जुटाए गए, जो वर्ष 2026 का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।

हालांकि, जुटाई गई राशि का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से आया, जिसका अर्थ है कि धन का बड़ा हिस्सा मौजूदा शेयरधारकों को गया, न कि सीधे कंपनियों की बैलेंस शीट में।

आईपीओ बाजार की यह मजबूती व्यापक इक्विटी फंड जुटाव के मुकाबले अलग तस्वीर पेश करती है। फॉलो-ऑन ऑफरिंग्स और ब्लॉक डील्स सहित कुल इक्विटी कैपिटल मार्केट फंड जुटाव 1.7 प्रतिशत घटकर 40.8 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है।

रिपोर्ट में कहा गया कि मजबूत घरेलू तरलता ने आईपीओ बाजार को समर्थन दिया। यह तब हुआ जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से अनुमानित 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपए की निकासी की।

हालांकि, लिस्टिंग के बाद मिलने वाले मुनाफे में कुछ नरमी के संकेत भी दिखाई दिए हैं। सितंबर में औसत लिस्टिंग प्रीमियम 15.1 प्रतिशत रहा, जो अगस्त में 24.4 प्रतिशत था। वहीं मीडियन लिस्टिंग लाभ 21.3 प्रतिशत से घटकर 5.9 प्रतिशत रह गया।

वहीं, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग उद्योग के लिए तस्वीर मिश्रित रही। इक्विटी अंडरराइटिंग फीस 9 प्रतिशत घटकर 415.6 मिलियन डॉलर हो गई, जबकि मजबूत एमएंडए गतिविधियों की बदौलत कुल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फीस 2 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.1 अरब डॉलर पर पहुंच गई।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 130 से अधिक कंपनियों के पास सेबी से आईपीओ की मंजूरी मौजूद है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार में अपेक्षाकृत कमजोर रिटर्न के बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी नई लिस्टिंग्स को कितना समर्थन देती है।

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