आरबीआई के निवेश नियमों में ढील के बाद डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत हुआ रुपया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निवेश नियमों में ढील देने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा।;

Update: 2026-06-05 08:01 GMT

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निवेश नियमों में ढील देने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा।

घरेलू मुद्रा रुपया अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 95.72 के स्तर पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था।

रुपए में यह तेज मजबूती ऐसे समय आई है जब आरबीआई ने लगातार दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखा और साथ ही निवेश प्रवाह तथा बाजार विश्वास को मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। साथ ही तटस्थ (न्यूट्रल) नीति रुख भी बनाए रखा गया है।

केंद्रीय बैंक ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए इक्विटी साधनों में निवेश की सीमा बढ़ा दी है।

इसके अलावा, सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया गया है।

आरबीआई गवर्नर ने दोहराया कि आरबीआई की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है और केंद्रीय बैंक रुपए के लिए किसी विशेष स्तर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता है।

उन्होंने कहा कि विनिमय दर का निर्धारण बाजार की ताकतों के आधार पर होने दिया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बॉन्ड के लिए पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) का विस्तार, एफपीआई के ऋण निवेश नियमों में ढील, अस्थायी एफसीएनआर (बी) जमा सुविधा और रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी घोषणाएं घरेलू मुद्रा को समर्थन देंगी और डॉलर के प्रवाह को बढ़ाने में मदद करेंगी।

उनका मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और भारतीय बाजारों में निवेश आकर्षित होगा।

विशेषज्ञों ने कहा कि हालांकि आरबीआई ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े जोखिमों को स्वीकार किया है और महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है, लेकिन लगभग 682 अरब डॉलर के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर केंद्रीय बैंक के भरोसेमंद संदेश ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है।

इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

आरबीआई ने अपने व्यापक आर्थिक अनुमानों में भी संशोधन किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया।


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