बिहार में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि बढ़कर 31 मार्च की गई
बिहार के किसानों की मांग और उनके हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि का विस्तार कर दिया है
पटना। बिहार के किसानों की मांग और उनके हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि का विस्तार कर दिया है। बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री लेशी सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “धान अधिप्राप्ति की अवधि बढ़ाए जाने से अधिक से अधिक किसानों को अपना धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र किसान को इसका लाभ मिले।”
बता दें कि 16 फरवरी को बिहार की मंत्री लेशी सिंह भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर "खरीफ विपणन मौसम 2025-26" के तहत बिहार में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था।
लेशी सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने अनुरोध को स्वीकार करते हुए बिहार में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि 28 फरवरी से विस्तारित कर 31 मार्च तक करने की स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्री सिंह ने इस निर्णय के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया तथा अधिकारियों को अधिप्राप्ति प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।
बता दें कि खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के अन्तर्गत लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध अब तक 6879 समितियों के माध्यम से 4.28 लाख किसानों से 29.22 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई है, जो कि कुल लक्ष्य का 79.30 प्रतिशत है।
बिहार सरकार द्वारा अब तक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 6400 करोड़ रुपये का भुगतान उनके खाते में किया जा चुका है। बिहार में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान की अधिप्राप्ति पैक्स और व्यापार मंडलों के माध्यम से पिछले साल एक नवंबर से शुरू की गई थी।
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आवश्यक है, जिसमें रैयत के लिए 250 क्विंटल और गैर-रैयत के लिए 100 क्विंटल की सीमा है।