राजद में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, तेजस्वी यादव बन सकते हैं कार्यकारी अध्यक्ष

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव पहले से ही राजद के लगभग सभी अहम राजनीतिक और संगठनात्मक फैसले ले रहे हैं। हालांकि, अभी तक उनके पास कोई औपचारिक राष्ट्रीय पद नहीं है, जिससे कई बार निर्णयों की सार्वजनिक घोषणा और संगठनात्मक क्रियान्वयन में औपचारिक अड़चनें आती रही हैं।

Update: 2026-01-17 22:27 GMT

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी ने 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर मुहर लग सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह कदम पार्टी में पीढ़ीगत नेतृत्व परिवर्तन को औपचारिक रूप देने की दिशा में अहम माना जाएगा। बैठक में केवल नेतृत्व का सवाल ही नहीं, बल्कि संगठन को और मजबूत करने, चुनावी रणनीति, आंतरिक अनुशासन और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर भी निर्णय लिए जा सकते हैं। खास तौर पर विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से भितरघात करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सहमति बनने के संकेत हैं।

तेजस्वी यादव को मिल सकती है औपचारिक कमान

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव पहले से ही राजद के लगभग सभी अहम राजनीतिक और संगठनात्मक फैसले ले रहे हैं। हालांकि, अभी तक उनके पास कोई औपचारिक राष्ट्रीय पद नहीं है, जिससे कई बार निर्णयों की सार्वजनिक घोषणा और संगठनात्मक क्रियान्वयन में औपचारिक अड़चनें आती रही हैं। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिलने के बाद तेजस्वी यादव को न केवल संवैधानिक अधिकार मिल जाएंगे, बल्कि संगठन के भीतर उनकी भूमिका भी स्पष्ट और निर्विवाद हो जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अब राजद में नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं बचा है और अधिकांश नेता तेजस्वी के नेतृत्व को स्वीकार कर चुके हैं।

लालू प्रसाद का स्वास्थ्य और संगठन की जरूरत


राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से चिंता का विषय रहा है। चिकित्सकों ने उन्हें तनाव से दूर रहने और अधिक सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से परहेज करने की सलाह दी है। ऐसे में पार्टी की दिन-प्रतिदिन की संगठनात्मक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए एक सक्रिय और औपचारिक नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है। लालू प्रसाद लंबे समय से पार्टी के सर्वमान्य नेता रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में संगठन की निरंतरता और प्रभावी संचालन के लिए कार्यकारी अध्यक्ष का पद जरूरी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि लालू स्वयं चाहते हैं कि पार्टी की कमान सलीके से, व्यवस्थित ढंग से और बिना किसी विवाद के तेजस्वी यादव को सौंप दी जाए।

राजनीतिक हालात ने बढ़ाई सक्रियता की जरूरत


बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में राजद के सामने कई चुनौतियां हैं। बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष दोनों स्तरों पर पार्टी को अधिक सक्रिय, संगठित और आक्रामक भूमिका निभानी पड़ रही है। भाजपा और अन्य दलों के साथ मुकाबले के लिए राजद को न सिर्फ जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना है, बल्कि अपनी नीतियों और रणनीतियों में भी समयानुकूल बदलाव करना होगा। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव की अगुवाई में राजद युवा मतदाताओं और सामाजिक न्याय के पारंपरिक आधार को एक साथ साधने की कोशिश कर रहा है। कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिलने से तेजस्वी को इस दिशा में और निर्णायक कदम उठाने की स्वतंत्रता मिलेगी।

संगठनात्मक फेरबदल के संकेत


25 जनवरी की बैठक में केवल तेजस्वी यादव की भूमिका तय करने तक ही सीमित फैसले नहीं होंगे। सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। संगठन के ढांचे में फेरबदल कर कुछ नए प्रकोष्ठों को सक्रिय किया जा सकता है, ताकि पार्टी की पहुंच समाज के विभिन्न वर्गों तक और मजबूत हो सके। इसके अलावा, चुनावी अनुभवों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। विधानसभा चुनाव के दौरान जिन नेताओं या कार्यकर्ताओं पर भितरघात के आरोप लगे थे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी चर्चा हो सकती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासन के बिना संगठन को मजबूत नहीं किया जा सकता।

तेजस्वी की टीम पहले से सक्रिय

तेजस्वी यादव और उनकी टीम ने पिछले कुछ समय में संगठन को सक्रिय करने के लिए कई पहल की हैं। युवाओं और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया है, साथ ही सामाजिक न्याय और रोजगार जैसे विषयों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखा गया है। पार्टी के भीतर डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर संवाद बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है।

कार्यकारी अध्यक्ष का औपचारिक दायित्व मिलने के बाद इन पहलों को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे तेजस्वी को न केवल निर्णय लेने में आसानी होगी, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन लागू करने में भी मजबूती मिलेगी।

उत्तराधिकार की राजनीति पर विराम?


राजद में लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि लालू प्रसाद के बाद पार्टी की कमान कौन संभालेगा। हालांकि व्यवहारिक रूप से यह जिम्मेदारी काफी हद तक तेजस्वी यादव के पास पहले ही आ चुकी है, लेकिन औपचारिक घोषणा न होने से अटकलें बनी रहती थीं। 25 जनवरी की बैठक में यदि तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह उत्तराधिकार से जुड़ी बहस पर भी काफी हद तक विराम लगा सकता है।

आगे की राह


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक राजद के भविष्य के लिहाज से निर्णायक साबित हो सकती है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व को औपचारिक मान्यता मिलने से पार्टी एक स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ेगी। वहीं लालू प्रसाद यादव के लिए यह कदम संगठन को सुरक्षित हाथों में सौंपने जैसा होगा। अब सभी की निगाहें 25 जनवरी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि राजद अपने संगठन और राजनीति को किस दिशा में ले जाना चाहता है।

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