Bihar News : आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन ने नहीं किया ज्वाइन, अंतिम तिथि खत्म होने के बाद स्थिति अनिश्चित
डॉ. नुसरत परवीन उस समय सुर्खियों में आ गई थीं, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।;
पटना: बिहार में आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा एक मामला फिर चर्चा में आ गया है। चयनित आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन ने निर्धारित अंतिम तिथि 31 दिसंबर तक अपने पद पर ज्वाइन नहीं दिया है। जबकि इसी चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त 63 अन्य आयुष चिकित्सक पहले ही अपने-अपने कार्यस्थलों पर योगदान कर चुके हैं। अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद अब डॉ. नुसरत परवीन के ज्वाइन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पहले से बढ़ाई जा चुकी थी समय-सीमा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चयनित आयुष चिकित्सकों को योगदान देने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की गई थी, जिसे पहले ही एक बार बढ़ाया जा चुका था। इसके बावजूद डॉ. नुसरत परवीन ने समय रहते ड्यूटी जॉइन नहीं की। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी अतिरिक्त विस्तार का निर्णय नहीं लिया गया है, ऐसे में उनका योगदान अब स्वतः स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वीडियो वायरल होने के बाद आई थीं चर्चा में
गौरतलब है कि डॉ. नुसरत परवीन उस समय सुर्खियों में आ गई थीं, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के व्यवहार को लेकर व्यापक आलोचनाएं और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इस घटना के बाद से ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या डॉ. नुसरत परवीन आयुष चिकित्सक के रूप में पदभार संभालेंगी या नहीं। अब अंतिम तिथि तक ज्वाइन नहीं करने न देने से ये चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
सिविल सर्जन ने की पुष्टि
इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि डॉ. नुसरत परवीन ने बुधवार को भी ड्यूटी पर ज्वाइन नहीं किया। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य विभाग की ओर से योगदान की समय-सीमा पहले ही बढ़ाई जा चुकी थी। फिलहाल किसी नए विस्तार का कोई आदेश नहीं है। निर्धारित तिथि समाप्त हो जाने के बाद अब उनका ज्वाइन स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
विभागीय स्तर पर ही संभव है निर्णय
सिविल सर्जन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि डॉ. नुसरत परवीन स्वास्थ्य विभाग को लिखित रूप से यह बताती हैं कि वह तय समय पर ज्वाइन क्यों नहीं कर पाईं, तो उनके मामले पर विचार तभी संभव होगा, जब विभागीय स्तर से कोई विशेष निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। किसी भी प्रकार का समय विस्तार या विशेष अनुमति केवल स्वास्थ्य विभाग के उच्च स्तर से ही दी जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के संकेत
स्वास्थ्य विभाग के रुख से यह संकेत मिल रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में तय नियमों और समय-सीमा को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि बिना ठोस कारण के ज्वाइन नहीं किया गया, तो इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और अनुशासन पर असर पड़ता है। इसी वजह से विभाग अब हर मामले में नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहता है।
अन्य चिकित्सकों ने समय पर संभाली जिम्मेदारी
इस पूरे प्रकरण के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि इसी बैच के 63 अन्य आयुष चिकित्सकों ने समय रहते अपने-अपने कार्यस्थलों पर योगदान कर लिया है और स्वास्थ्य सेवाएं देना शुरू कर दिया है। इससे डॉ. नुसरत परवीन का मामला अलग और विशिष्ट बन गया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल डॉ. नुसरत परवीन का भविष्य पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग के निर्णय पर निर्भर है। यदि वह लिखित रूप से विभाग को कारण बताती हैं और विभाग विशेष परिस्थितियों को मान्य मानता है, तभी उनके मामले में कोई राहत संभव है। अन्यथा, तय समय-सीमा के भीतर योगदान न करने के कारण उनकी नियुक्ति पर संकट खड़ा हो सकता है। यह मामला न केवल आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए अहम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी नियुक्तियों में समय और नियमों का पालन कितना निर्णायक होता जा रहा है।