Bihar News: यूट्यूब पर वीडियो देखकर झोलाछाप डॉक्टर ने किया ऑपरेशन, गर्भवती महिला की मौत

घटना के बाद आक्रोशित स्वजन और ग्रामीणों ने अवैध क्लिनिक के बाहर शव रखकर जमकर हंगामा किया। मामले ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Update: 2026-01-10 06:38 GMT
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक झोलाछाप चिकित्सक द्वारा कथित तौर पर यू-ट्यूब देखकर गर्भवती महिला का ऑपरेशन करने से उसकी मौत हो गई। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि नवजात बच्ची सुरक्षित बताई जा रही है। घटना के बाद आक्रोशित स्वजन और ग्रामीणों ने अवैध क्लिनिक के बाहर शव रखकर जमकर हंगामा किया। मामले ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

झोलाछाप क्लिनिक में ले जाई गई महिला
मृतका की पहचान झारखंड निवासी विक्रम साह की पत्नी स्वाति देवी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, स्वाति देवी कुछ दिन पहले अपने मायके भागलपुर जिले के खड़हरा गांव आई हुई थीं। गुरुवार की रात उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उन्हें नजदीकी सरकारी या पंजीकृत निजी अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही चल रहे एक अवैध क्लिनिक में ले गए। ग्रामीणों के अनुसार, उक्त क्लिनिक लंबे समय से एक झोलाछाप चिकित्सक द्वारा संचालित किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह तथाकथित डॉक्टर बिना किसी वैध डिग्री या पंजीकरण के इलाज करता था, फिर भी क्षेत्र में उसकी पकड़ बनी हुई थी।

सिजेरियन का फैसला और 30 हजार रुपये की वसूली
स्वाति देवी की मां सुषमा देवी ने बताया कि क्लिनिक पहुंचने के बाद झोलाछाप चिकित्सक ने सामान्य प्रसव की बजाय सिजेरियन ऑपरेशन को जरूरी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने परिजनों को डराते हुए कहा कि अगर तुरंत ऑपरेशन नहीं किया गया तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के नाम पर 30 हजार रुपये फीस के तौर पर वसूल लिए। इसके बाद उसी क्लिनिक में ऑपरेशन शुरू किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर मोबाइल फोन पर यू-ट्यूब वीडियो देखकर प्रक्रिया को अंजाम दे रहा था।

अत्यधिक रक्तस्राव, महिला की मौत
ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद स्वाति देवी की हालत बिगड़ने लगी। अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिसे नियंत्रित करने में झोलाछाप डॉक्टर पूरी तरह नाकाम रहा। जब स्थिति गंभीर हो गई, तब उसने बेहतर इलाज के लिए महिला को भागलपुर रेफर करने की सलाह दी। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टर आनन-फानन में अपना क्लिनिक बंद कर मौके से फरार हो गया। परिजन जब तक महिला को लेकर भागलपुर पहुंचते, तब तक रास्ते में ही उसकी मौत हो चुकी थी। हालांकि, ऑपरेशन के दौरान जन्मी नवजात बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है।





 


शव रखकर प्रदर्शन, डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही स्वजन और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। शुक्रवार को महिला का शव झोलाछाप चिकित्सक के क्लिनिक के बाहर रखकर लोगों ने जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिना डिग्री और संसाधनों के ऑपरेशन कर महिला की जान ली गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि दोषी डॉक्टर को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और ऐसे अवैध क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि घटना बेहद गंभीर है, लेकिन फिलहाल स्वजन की ओर से कोई लिखित शिकायत या प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि आवेदन मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और फरार झोलाछाप चिकित्सक की तलाश शुरू की जाएगी। वहीं, अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रसूता की मौत की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि पूरा मामला संज्ञान में लिया गया है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अवैध रूप से चल रहे क्लिनिकों की पहचान कर उन्हें बंद कराने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।

फिर उजागर हुई झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या
यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने लाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और त्वरित इलाज की मजबूरी के कारण लोग ऐसे अवैध चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर हो जाते हैं। स्वाति देवी की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।

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