भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग पर सुनवाई से किया इनकार

यह याचिका भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह पुलिस द्वारा किया गया फर्जी एनकाउंटर था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।;

Update: 2026-06-30 06:53 GMT

नई दिल्ली: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता उचित समझे तो वह इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष अपनी याचिका दाखिल कर सकता है।

फर्जी एनकाउंटर का लगाया गया है आरोप

यह याचिका भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह पुलिस द्वारा किया गया फर्जी एनकाउंटर था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दाखिल की गई थी।

सीबीआई जांच और एफआईआर की थी मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। इसके अलावा एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकेगी और न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होगी।

मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का दिया गया तर्क

याचिका में कहा गया कि संविधान के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यदि पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो जांच ऐसी संस्था से होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।

रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की भी मांग

याचिका में यह भी आग्रह किया गया था कि यदि सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए तो उसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति करे। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

अब हाईकोर्ट में उठेगा मामला

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद अब इस मामले में कानूनी लड़ाई संबंधित हाईकोर्ट में जारी रह सकती है। यदि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करता है, तो वहां एनकाउंटर की वैधता, जांच की आवश्यकता और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई हो सकती है। फिलहाल शीर्ष अदालत के आदेश के बाद मामले का अगला चरण हाईकोर्ट में तय होगा।

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