लखीसराय : बिहार में NEET-UG पुनर्परीक्षा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क के नए पहलू सामने आ रहे हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में ऐसे तकनीकी और प्रक्रियागत सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित साल्वर गैंग ने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने के लिए पहले से सुनियोजित रणनीति तैयार की थी। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही और परीक्षा केंद्र स्तर पर किस प्रकार समन्वय किया गया।
'220' को बनाया गया था पहचान का गुप्त कोड
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरोह ने प्रत्येक फर्जी परीक्षार्थी की पहचान के लिए '220' को एक विशेष सीक्रेट कोड के रूप में निर्धारित किया था। दावा है कि 21 जून को परीक्षा केंद्र पहुंचने के बाद साल्वर ने बायोमीट्रिक डेस्क पर यही कोड बताया, जिसके बाद उसे पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कोड का उद्देश्य नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच पहचान सुनिश्चित करना और पूरी प्रक्रिया को बिना किसी संदेह के संचालित करना था। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जांच अभी जारी है।
बायोमीट्रिक सिस्टम के इस्तेमाल के तरीके की जांच
EOU की जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा केंद्र पर कुल छह बायोमीट्रिक टैब और पंच मशीनें उपलब्ध थीं। इनमें से चार मशीनों का सामान्य अभ्यर्थियों के लिए नियमित उपयोग किया जा रहा था, जबकि दो मशीनें कथित तौर पर निष्क्रिय रखी गई थीं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन्हीं निष्क्रिय मशीनों का उपयोग कथित फर्जी बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए किया गया। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इन मशीनों को किसके निर्देश पर अलग रखा गया और उनके उपयोग में किन लोगों की भूमिका रही।
पहले असली अभ्यर्थी की उपस्थिति, फिर साल्वर की एंट्री
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित तौर पर पहले वास्तविक अभ्यर्थी की उपस्थिति दर्ज कराई गई और बाद में उसे परीक्षा केंद्र से वापस भेज दिया गया। इसके बाद साल्वर की बायोमीट्रिक औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके प्रवेश पत्र पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का होलोग्राम लगाया गया, जिसके बाद उसे परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। इन दावों की पुष्टि के लिए EOU डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और बायोमीट्रिक डेटा का मिलान कर रही है।
अपडेटेड आधार कार्ड ने बढ़ाई जांच की चुनौती
जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए कथित साल्वरों के पास से मिले आधार कार्ड भी जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बने हैं। सूत्रों के अनुसार, इन आधार कार्डों को हाल के दिनों में अपडेट कराया गया था और उनमें लगी तस्वीरें साल्वरों के चेहरे से काफी हद तक मेल खाती थीं। इसी वजह से सामान्य दस्तावेज सत्यापन के दौरान किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि प्रवेश पत्र पर भी वही तस्वीरें प्रयुक्त की गई थीं, जिससे पहचान प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई।
डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की हो रही जांच
EOU अब बायोमीट्रिक लॉग, मशीनों के उपयोग का रिकॉर्ड, आधार अपडेट से जुड़े दस्तावेज, परीक्षा केंद्र के डिजिटल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तार से जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जीवाड़े की योजना कब बनाई गई, इसमें कितने लोग शामिल थे और क्या यह किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार
आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की जांच तेज कर दी है और अब तक मिले सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएगा। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इस मामले में शामिल सभी संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।