Bihar: सम्राट चौधरी सरकार ने SC में दी ये दलीलें और फंस गए अनंत सिंह, जानें मोकामा विधायक का पहला रिएक्‍शन

दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके खिलाफ मृतक के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने 19 मार्च को जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।;

Update: 2026-10-30 06:06 GMT

नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मोकामा से विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत उन्हें जमानत मिली थी। साथ ही अदालत ने अनंत सिंह को एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को इस मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का भी आदेश दिया है। यह फैसला दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में उनके पोते नीरज कुमार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान आया। नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत के ताजा आदेश से इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की अनंत सिंह की जमानत?

दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके खिलाफ मृतक के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने 19 मार्च को जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए जमानत आदेश पर सवाल उठाए गए। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और अनंत सिंह को एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद उन्हें मिली जमानत समाप्त हो गई है। अब उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने पर अनंत बोले

दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने पर मोकामा विधायक अनंत सिंह ने कहा कि मैं सरेंडर करूंगा। कोर्ट(का फैसला) मेरे लिए मान्य है। कोर्ट मुझे फिर से बेल देगा, मुझे न्यायालय पर भरोसा है। उन्‍होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन था कि अगर नीतीश कुमार पहले की तरह अपने पद पर बने रहते, तो ऐसा कुछ भी नहीं होता। जो कुछ भी हुआ है, वह उनके बीमार पड़ने के बाद ही हुआ है। पार्टी ने उन्हें हटा दिया है; अब पार्टी ही तय करे कि वह कैसे काम करना चाहती है। पार्टी के लिए कहीं भी जीतना मुश्किल हो जाएगा।

बिहार सरकार ने कोर्ट में बताई आपराधिक मामलों की जानकारी

सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का विवरण रखा। सरकार के हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में 62 से अधिक मामले दर्ज हैं। याचिकाकर्ता ने भी अपनी अपील में इसी आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए जमानत रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और किसी मामले में दोषसिद्ध होना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। इन मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच और आगे की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।

बेटी की शादी के बाद सरेंडर करने का मिला समय

सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के वकील ने अदालत को बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को बेटी की शादी है। इस पारिवारिक कार्यक्रम का उल्लेख किए जाने के बाद अदालत ने उन्हें एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। इससे जांच एजेंसियों पर निर्धारित अवधि में जांच पूरी करने की जिम्मेदारी होगी।

जेडीयू से निष्कासन के बाद बढ़ीं अनंत सिंह की मुश्किलें

अनंत सिंह की कानूनी परेशानियों के बीच बिहार की राजनीति में भी उनके खिलाफ घटनाक्रम तेज हुआ है। विधान परिषद चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने की अपील की थी। उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में भी वोट मांगे थे। इसके बाद 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अगले दिन राज्य सरकार ने नीलम देवी को राज्यस्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटा दिया। इस पद से उन्हें उपमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त था। सरकार ने उस सरकारी आवास को खाली करने के लिए भी एक महीने का समय दिया, जहां अनंत सिंह कई वर्षों से रह रहे थे। इन घटनाक्रमों ने बिहार की राजनीति में अनंत सिंह की स्थिति को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

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