बिहार MLC चुनाव में अनंत सिंह को झटका, JDU के नीरज कुमार जीते; शिक्षक सीट पर BJP का 30 साल पुराना किला ढहा

पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ बगावत के घटनाक्रम के बाद JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। ऐसे में नीरज कुमार की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।;

Update: 2026-10-28 05:20 GMT

पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों में कई सीटों पर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव को हराकर सबको चौंका दिया है। करीब तीन दशक से इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे नवल किशोर यादव को इस बार हार का सामना करना पड़ा। वहीं, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवार और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। इन नतीजों को बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पटना शिक्षक सीट पर RJD की ऐतिहासिक जीत

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प रहा। RJD उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने बीजेपी के नवल किशोर यादव को 1,057 मतों के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की, बल्कि लंबे समय से इस सीट पर कायम नवल किशोर यादव के वर्चस्व को भी समाप्त कर दिया। मतों की गिनती के दौरान डॉ. संजीव कुमार को कुल 4,487 वोट मिले, जबकि नवल किशोर यादव के खाते में 3,430 मत आए। जन सुराज की उम्मीदवार डॉ. दिव्या ज्योति तीसरे स्थान पर रहीं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद RJD समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। जीत के बाद डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि मुकाबला काफी कड़ा था। उन्होंने शिक्षकों के हितों की लड़ाई आगे भी जारी रखने का भरोसा दिलाया। उनका कहना था कि शिक्षकों की समस्याओं को उठाना और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

नवल किशोर यादव की हार से BJP को झटका

पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव की हार बीजेपी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। लगभग 30 वर्षों से इस निर्वाचन क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ रही थी। ऐसे में RJD उम्मीदवार की जीत ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। डॉ. संजीव कुमार ने चुनाव परिणाम के बाद नवल किशोर यादव पर आरोप लगाया कि उन्हें मिले मतों में फर्जी मतदाताओं के वोट भी शामिल थे। इस नतीजे को पटना में बीजेपी के लिए एक और राजनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पहले विधानसभा चुनाव में बांकीपुर सीट पर भी पार्टी को झटका लगा था। हालांकि, दोनों चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और परिस्थितियों में हुए हैं, लेकिन लगातार सामने आए इन परिणामों ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस तेज कर दी है।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार ने दर्ज की जीत

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में JDU उम्मीदवार नीरज कुमार ने जीत हासिल की। चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी के भीतर से भी चुनौती का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने मुकाबले में सफलता प्राप्त की। इस सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को बाहुबली विधायक अनंत सिंह का समर्थन प्राप्त था। पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ बगावत के घटनाक्रम के बाद JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। ऐसे में नीरज कुमार की जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जीत के बाद नीरज कुमार ने कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह धनबल और बाहुबल के खिलाफ कार्यकर्ताओं के नैतिक बल की जीत है। उनके मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ताओं ने दबाव के आगे झुकने के बजाय पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा। नीरज कुमार ने यह भी दावा किया कि पहली वरीयता के मतों की गिनती में एनडीए आगे रहा था और दूसरी वरीयता के मतों में भी बढ़त मिलने की उम्मीद थी।

तिरहुत और सारण में भी बदले चुनावी समीकरण

बिहार विधान परिषद चुनाव के अन्य नतीजों में भी राजनीतिक दलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की। इस परिणाम को पार्टी के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने JDU प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1,815 मतों से हरा दिया। इस जीत के साथ निर्दलीय उम्मीदवार ने राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को चुनौती दी। बीजेपी ने तिरहुत में भाकपा से सीट छीनकर अपनी स्थिति मजबूत की।

चुनाव परिणामों से आगे की राजनीति पर नजर

विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने बिहार में राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पटना शिक्षक सीट पर RJD की जीत और स्नातक सीट पर JDU की सफलता ने अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं। एक ओर RJD ने लंबे समय से कायम बीजेपी के प्रभाव को चुनौती दी, तो दूसरी ओर JDU ने आंतरिक विरोध के बावजूद अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की। इन परिणामों का असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और शिक्षक एवं स्नातक मतदाता वर्ग के बीच दलों की पकड़ पर पड़ सकता है। अब सभी दलों की नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव में मिले समर्थन को भविष्य की राजनीति में किस तरह भुनाया जाता है।

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