बिहार विधानसभा चुनाव : मतदान केंद्रों की संख्या में 62.96 प्रतिशत का इजाफा
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में कर्मियों और मतदाताओं को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए एहतियात के तौर पर पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले मतदान केंद्रों की संख्या में 62.96 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
पटना । बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में कर्मियों और मतदाताओं को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए एहतियात के तौर पर पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले मतदान केंद्रों की संख्या में 62.96 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर मतदान करने के उद्देश्य से बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव में एक मतदान केंद्र पर 1000 से कम मतदाताओं को ही वोटिंग करने की अनुमति होगी जबकि वर्ष 2015 के चुनाव में यह संख्या 1500 थी। इस तरह पूरे राज्य में एक मतदान केंद्र पर औसत मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव के 1026 के मुकाबले 684 होगी।
सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मतदाताओं की संख्या को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से बिहार में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए कुल एक लाख छह हजार 526 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में 65367 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इस तरह इस बार मतदान केंद्रों की संख्या में 41159 यानी 62.96 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्र में चुनाव इस बार तीन चरण में 28 अक्टूबर, तीन नवम्बर और और सात नवम्बर को होंगे। पहले चरण में 12 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराने के लिए 31 हजार मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। दूसरे चरण में 12 जिलों की 94 सीटों पर मतदान के लिए 42 हजार केन्द्र बनाये गये हैं तथा तीसरे चरण में 14 जिलों की 78 विधानसभा सीटों के लिए 33 हजार 800 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं।
इस बार के विधानसभा चुनाव में कुल सात करोड़ 29 लाख 27 हजार 396 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें सात करोड़ 27 लाख 66 हजार 986 आम मतदाता हैं जबकि एक लाख 60 हजार 410 सर्विस वोटर हैं।
चुनाव में मतदाताओं और मतदान कर्मियों की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सात लाख सैनिटाइजर, 46 लाख मास्क, छह लाख पीपीई, सात लाख 60 हजार फेस शील्ड और 23 लाख जोड़े ग्लव्स की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं, मतदान से एक दिन पूर्व केंद्रों को सैनिटाइज किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र के प्रवेश द्वार मतदाता की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। यदि वोटर का तापमान तय मानक से अधिक हुआ तो उसकी दुबारा स्क्रीनिंग की जाएगी और इस बार भी तापमान अधिक रहा तो उसे टोकन देकर मतदान के अंतिम घंटे में आकर वोटिंग करने का आग्रह किया जाएगा।