स्कूलों से गैस सिलेण्डर गायब कंडे से बन रहा भोजन
बेमेतरा ! जिले के 696 षासकीय प्राथमिक षालाओ में माध्यम भेाजन बनाने के लिए प्रदान किये गए गैस सिलेंडर सहित चूल्हा स्कूलो से गायब हो गया है;
कही एचएम तो कही पूर्व सरपंच के घर शोभा बढ़ा रहा है गैस सिलेंडर
बेमेतरा ! जिले के 696 शा सकीय प्राथमिक शालाओ में माध्यम भेाजन बनाने के लिए प्रदान किये गए गैस सिलेंडर सहित चूल्हा स्कूलो से गायब हो गया है और उन स्कूलो मे अब बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन लकडी एंव कंडे के माध्यम से भोजन बनाया जा रहा है। और स्कूल का गैस सिलेंडर एवं चूल्हा किसी एचएम के यहां तो किसी तत्कालीन सरपंच के घर मे षोभा बढा रहा है। 2005-06 मे बेमेतरा राजस्व जिला नही बना था उस समय बेमेतरा षिक्षा जिला था उस समय जिले के षासकीय प्राथमिक षाला मे विद्यार्थियो के लिए लकडी एंव कंडे के माध्यम से मध्यान्ह भोजन बनाया जाता था जिससे भोजन बनाया जाता था जिससे भेाजन बनाने वालो को धुंए से होने वाली परेषानी को मद्दे नजर रखते हुए जिले के 696 षासकीय प्राथमिक षालाओ मे मध्यान्ह भेाजन बनाने के लिए षासन द्वारा नि:षुल्क गैस सिलेंंडर सहित चूल्हा प्रदान किया गया था। इससे कुछ दिनो तक गैस सिलेंडर चूल्हे से मध्यान्ह भेाजन बनाने का काम चला बताया जाता है कि गैस सिलेंडर मे होने वाले खर्च के लिये षासन के द्वारा प्राथमिक षाला के प्रति विद्यार्थियो के लिए प्रतिदिन बीस पैसा प्रदान करने का प्रावधान रखा गया था। सिलेंडर का गैस समाप्त होने पर उसमे गैस भरवाने मे किसी तरह की परेषानी न हो पाये इसके बारे मे मिली जानकारी के मुताबिक उस समय अधिकांष स्कूलो मे मध्यान्ह भोजन का सचांलन सरपंचो के माध्यम से होता था जिनको सिलेंडर में गैस डलवाने के लिए स्थान निर्धारित भी किया गया था।
कुछ समय के बाद होने लगा गायब- गैस सिलेंडर स्कूलो मे आने के बाद मध्यान्ह भोजन गैस सिलेंडर से बनाया जाता रहा। गैस समाप्त होने के बाद एक दोबार नया गैस सिलेंडर लिया गया किंतु धीरे-धीरे सिलेंडर मे गैस समाप्त होने के बाद सबंधित लोगो के द्वारा नया सिलेंडर तरफ ध्यान देना बंद कर दिया क्योकि गैस सिलेंडर का उपयोग करने से लाभ कम परेषानी अधिक आने लगी। इसके बारे मे जानकार लोगो का कहना है कि गैस मे खर्च अधिक आ रहा था इसके साथ ही नया गैस सिलेंडर लेने के लिए 20 से 25 किलोमीटर हर एक माह सिलेंडर को लाना और ले जाना पडता था कई बार तो गैस एंजेसी मे आने क बाद नया सिलेंडर नही होने पर फिर सिलेंडर वापस ले जाना पडता था कई बाद तो गैस एंजेसी मे आने के बाद नया सिलेंडर नही होने पर फिर खाली सिलेंडर वापस ले जाने की विवषता थी इससे परेषानी होती रही इसका कारण मजबूरी मे फिर से लकडी और कंडे के माध्यम से मध्यान्ह भेाजन बनाकर विद्यार्थियो को दिये जाते थे चूंकि उस समय अधिकतर स्कूलो मे मध्यान्ह भेाजन का सचांलन जनता के चुने प्रतिनिधि सरंपच ही करते थे जिनको मध्यान्ह भेाजन के साथ ही अन्य कार्यो के तरफ भी समय देना पडता था इस लिये गैस सिलेंडर खाली होने के बाद भी कई माह तक नया सिलेंडर नही आने के कारण लकडी और कंडे के माध्यम से भेाजन बनता था बाद मे जिम्मेदार लोग ही गैस सिलेंडर के माध्यम से मध्यान्ह भेाजन बनाने के लिए उत्सुकता दिखाना बंद कर दिया गया। इससे धीरे धीरे एक एक करके स्कूलो मे रखे गैस सिलेंडर और चूल्हा की उपयोगिता भी समाप्त हो गई।
जिम्मेदार अपने घर लेकर गये और लौटाए नहीं
मध्यान्ह भेाजन लकडी कंडे के माध्यम से बनाने के साथ ही गैस सिलेंडर एंव चूल्हा भी स्कूलो मे रखे कुछ दिनो तक बेकार पडा रहा उसके बाद उसे तत्कालीन सरपंच अथवा सकूल के तत्कालीन सरंपच गये जो आज भी कतिपय तत्कालीन सरपचो एंव एचएम के घरो की षोभा बढ रहे है। वर्तमान मे जिले के 389 मिडिल स्कूल एंव 745 प्राइमरी स्कूलो मे मध्यान्ह भेाजन संचालित हो रही है जिसके लिए षासन द्वारा प्राथमिक षाला के प्रत्येक विद्यार्थियो के लिऐ प्रतिदिन चार रूपये 58 पैसा तथा पूर्व माध्यमिक षाला के प्रत्येक विद्यार्थियो के लिए 6 रूपये 18 पैसा के हिसाब से खर्च के रूप मे राषि दी जाती है।