आटोमेटिक गेट खरीदी में गड़बड़ी,मुख्य सचिव ने दिए जांच के आदेश
रायपुर ! जल संसाधन विभाग द्वारा प्रदेश के एनीकेट व बैराजों मेें बिना औचित्य के आटोमेटिक गेट की खरीदी मेें करोड़ों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है।;
रायपुर ! जल संसाधन विभाग द्वारा प्रदेश के एनीकेट व बैराजों मेें बिना औचित्य के आटोमेटिक गेट की खरीदी मेें करोड़ों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पिछले पांच वर्षो मेें एक ही परिवार की तीन फर्मो से गेट खरीदी कर डेढ़ सौ करोड़ का भुगतान किया गया। मामलें की शिकायत नेता प्रतिपक्ष टीएस सिहदेव ने मुख्यमंत्री से की है। इसके बाद मुख्य सचिव विवेक ढांढ ने इस मामले की जांच का आदेश दिया है पूर्व में यह प्रकरण विधानसभा में उठा था। जानकारी के अनुसार प्रदेश में पिछले कुछ वर्षो से बेरोजो में आटोमेटिक गेट लगाए जा रहे है। इसकी खरीदी के लिए टेण्डर प्रकाशित किया जाता हे। आमंत्रित निविदाओं में विशेष शर्ते रखी जाती है। इसके जरिए अपने चहेते कंपनियों को अधिक दर पर आर्डर दिए जा रहे है। ठेकेदारो द्वारा निविदा के अंतर्गत दी गई दर एकर्जाइ होती है। प्रतिस्पर्धा के आधार पर न्यूनतम दर गए ठेकेदार की निविदा स्वीकृत की जाती है। आटोमेटिक गेट खरीदी में प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण एक ही परिवार की अलग-अलग कंपनियों से गेट खरीदी की जा रही है। जल संसाधन विभाग के एसओआर में वर्णित आटोमेटिक गेट की दरें मप्र के एसओआर को दर से दुगुना है। जब कि सप्लाई कर्ता एकही है। आटोमेटिक गेट का कोई आई एएस मानक नहीं है। और नहीं यह भी सीडब्लूसी से प्रमाणित है। आटोमेटिक गेट स्वचलित होते है। इसके बावजूद इनकों चलाने के लिए हाईएक्ट गियर बक्स व मेंटेन्स आदि पर करोड़ों रूपए खर्च हो रहा है। पिछले पंाच वर्षो में एक ही परिवार की तीन फर्मो जैन इंजिनियरिंग वकर््स, नीति इन्फालियर व नकोडा इंफ्रास्टर्चकम से आटोमेटिक गेट खरीदी जा रहा है। इसकी जरूरत नहीं है। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने यह मामला विधानसभा में उठाया था। उसके बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर उन्होने मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह व मुख्यसचिव विवेक ढांढ को पत्र लिखकर मामलें की जांच करने व दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने मांग की है। नेता प्रतिपक्ष की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने आटोमेटिक गेट खरीदी की जांच करने के आदेश दिए है।