ममदानी की जीत में भारत के लिए संदेश

जोहरान ममदानी ने मैनहट्टन के एक बंद पड़े सबवे में संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण शहर न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में पद की शपथ ली

By :  Deshbandhu
Update: 2026-01-16 22:20 GMT
  • डॉ. मलय मिश्रा

अपनी वैचारिक घोषणाओं में ममदानी एक उदार समाजवादी मोर्चे के नजदीक हैं। यह एक बहुसंख्यकवादी राज्य को निरंकुशता की ओर खिसकने से रोकने के खिलाफ़ एक बहुत ही जरूरी रामबाण उपाय है जिसने पिछले एक दशक में लोकतांत्रिक भारत को बदल दिया है। शक्तिशाली और विरोधी वैचारिक गुटों के बीच उभरी दुनिया में अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम से स्थापित अपनी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक साख वाले भारत को एक ममदानी की जरूरत है।

जोहरान ममदानी ने मैनहट्टन के एक बंद पड़े सबवे में संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण शहर न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में पद की शपथ ली। सबवे में शपथ लेना एक तरह से शहर के श्रमिकों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के साथ ममदानी के संबंधों का प्रतीक है। उन्हें डेमोक्रेटिक सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने शपथ दिलाई जो अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और लोकतांत्रिक समाजवाद के पथप्रदर्शक हैं। उनके साथ कांग्रेस सदस्य एलेजेंड्रिया कोर्टेज भी थीं।

भारतीय मीडिया में उनके ऐतिहासिक शपथ ग्रहण के बारे में शायद ही कोई कवरेज था और न ही इस बात का जिक्र था कि ममदानी के चुनाव का अमेरिकी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 34 वर्षीय राजनेता ने 'बिग एप्पल' (न्यूयार्क शहर का उपनाम) का प्रभार संभालने में कई वर्जनाओं को तोड़ दिया जो कि अभिजात वर्ग, अमीरों व अरबपतियों और अमेरिकी यहूदियों का गढ़ है।

हालांकि ममदानी और उनकी जीत का भारत में ज्यादा जिक्र नहीं हो रहा है। अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और दो बार के डेमोक्रेट गवर्नर एंड्रयू कुओमो को 50 प्रतिशत से अधिक वोटों से हराकर शानदार जीत हासिल करने के बावजूद सरकार ने अपने मीडिया संचालकों के माध्यम से ममदानी को गायब करने की कोशिश की। नस्ल, धर्म, जातीयता व आर्थिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर और बड़े पैमाने पर आप्रवासी टैग वाले दस लाख से अधिक न्यूयॉर्क वासियों ने दुनिया भर में हलचल पैदा करने वाले एक अभूतपूर्व चुनाव में उनके लिए मतदान किया था। यह केवल उनका गृह देश भारत है जिसने अपने 34 वर्षीय बेटे को उसकी अभूतपूर्व जीत पर सलाम नहीं किया जो एक असेंबली सदस्य से अमेरिका के सबसे अमीर शहर का नेतृत्व करने के लिए उभरा है।

ममदानी के पास ऐसी कई बातें हैं जो पहली बार हुई हैं। मसलन, एशियाई व अफ्रीकी मूल के पहले अमेरिकी, पहले मुस्लिम और न्यूयॉर्क के सबसे कम उम्र के मेयर। वे 'सलाम बॉम्बे', 'मानसून वेडिंग' और 'नेमसेक' जैसी फिल्मों के साथ विश्व स्तर पर प्रशंसित फिल्म निर्माता मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर महमूद ममदानी के पुत्र हैं। महमूद ममदानी की किताब 'गुड मुस्लिम बैड मुस्लिम' हफ्तों तक न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्टसेलर बनी रही जो 9/11 के हमले के तुरंत बाद प्रकाशित हुई थी। जोहरान ने कभी भी कुलीन विरासत में पैदा होने का आदर्श नहीं माना है। यह देखते हुए कि न्यूयॉर्क अपनी धरती पर 150 से अधिक राष्ट्रीयताओं की मेजबानी करता है, उन्होंने अप्रवासियों के मुद्दे को उठाया है। धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी विचारधारा के ममदानी ने खुद को हर न्यू यॉर्कर की दुर्दशा की परवाह करने वाला दिखाया है। यह देखते हुए कि अमेरिका-इज़रायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (एआईपीएसी) अमेरिका का सबसे बड़ा इज़रायल समर्थक लॉबिंग समूह और न्यूयॉर्क यहूदी फाऊंडेशन ने एंड्रयू कु ओमो के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी, ममदानी ने फिलिस्तीनियों के नरसंहार में नेतन्याहू की भूमिका की आलोचना करने के बाद यहूदी विरोधी भावना के आरोपों से खुद को जल्दी ही दूर कर लिया है। हालांकि चुनाव परिणामों में यहूदी वोटों का विभाजन भी देखा गया, युवा पीढ़ी ममदानी के पक्ष में थी जबकि पुराने, हसीदिक और धनी यहूदी एंड्रयू कुओमो के लिए सामूहिक रूप से मतदान कर रहे थे।

राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा ममदानी की सार्वजनिक तौर पर की गई तीव्र निंदा, संघीय धन में कटौती करने की धमकी और खुलेतौर पर डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी कुओमो का समर्थन करने के बावजूद ममदानी की बढ़ती लोकप्रियता में शायद ही कोई सेंध लगी। ममदानी को मार्क्सवादी और राष्ट्र-विरोधी बताते हुए ट्रम्प ने ममदानी के राजनीतिक कैरियर को शुरू होने से पहले ही खत्म करने की कोशिश की। वैसे न्यूयार्क के मेयर ने एक शिष्टाचार बैठक में व्हाइट हाउस में उपस्थित होकर पांसा पलट दिया और सभी न्यूयॉर्कवासियों के हितों को हासिल करने के अपने प्राथमिक उद्देश्य तथा मुफ्त परिवहन और बच्चों की देखभाल, किफायती आवास तथा सरकार द्वारा संचालित किराने की दुकानें प्रदान करने पर जोर दिया जैसा कि उन्होंने अपने चुनाव अभियान में वादा किया था। आश्चर्यजनक रूप से और शायद जनता के मूड को देखते हुए ट्रम्प ने पाला बदल लिया तथा ममदानी को सभी प्रकार के समर्थन का आश्वासन दिया। इस घटना ने वैचारिक रूप से विभाजित दक्षिणपंथी और वामपंथी राजनेताओं के विरोधाभासी चित्रों को दिखाया। एक, जो मतलबी दिमाग, प्रतिशोधी, अप्रत्याशित है और दूसरा, जो चुनौती देने वाला, प्रतिबद्ध तथा निडर है।

दक्षिण अमेरिका में मौजूदा उथल-पुथल में ट्रम्प ने सभी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की अवहेलना की और एक संप्रभु देश वेनेजुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पर 'कब्जा' कर लिया। अमेरिकी प्रणाली सचमुच ढह गई। मीडिया ने घातक चुप्पी साध ली और सत्ता के इस घोर दुरुपयोग के खिलाफ कांग्रेस एवं सुप्रीम कोर्ट बेआवाज़ हो गया। ऐसी स्थिति में आक्रामकता के इस निर्लज्ज कृत्य को 'युद्ध की घोषणा' बताते हुए निंदा करने के लिए ममदानी खड़े हुए।

अपने मुखर विचारों के लिए परिचित ममदानी ने खुद को जन-समर्थक विचारधारा के पक्ष में स्थापित किया है। ममदानी ने नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्हें 'फासीवादी' कहा है। फिलिस्तीनियों की अपनी धरती पर एक शांतिपूर्ण मातृभूमि के अधिकार का आह्वान करते हुए ममदानी ने इज़रायली पीएम नेतन्याहू को न्यूयॉर्क में कभी भी न आने की चेतावनी दी क्योंकि वे नेतन्याहू को हजारों असहाय फिलिस्तीनी महिलाओं, बच्चों, बूढ़ों और बीमारों के नरसंहार के लिए 'मानवता के खिलाफ अपराध' करने के लिए गिरफ्तार करेंगे। ममदानी के पिता कच्छी गुजराती हैं जबकि मां हिंदू पंजाबी हैं। जोहरान एक सीरियाई मुस्लिम से विवाहित हैं। इस प्रकार वे विश्व बंधुत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं जो उनके स्पष्ट उदारवादी विचारों में प्रतिध्वनित होता है। इसके बावजूद उन्होंने अपने मुस्लिम वंश की पुष्टि करने के लिए ऐतिहासिक पुराने कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली थी। ममदानी ने न्यूयॉर्क के सभी पांच नगरों में बड़ी संख्या में मुसलमानों से मुलाकात की थी और उनके लगभग सर्वसम्मत वोट हासिल किए थे।

अपनी वैचारिक घोषणाओं में ममदानी एक उदार समाजवादी मोर्चे के नजदीक हैं। यह एक बहुसंख्यकवादी राज्य को निरंकुशता की ओर खिसकने से रोकने के खिलाफ़ एक बहुत ही जरूरी रामबाण उपाय है जिसने पिछले एक दशक में लोकतांत्रिक भारत को बदल दिया है। शक्तिशाली और विरोधी वैचारिक गुटों के बीच उभरी दुनिया में अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम से स्थापित अपनी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक साख वाले भारत को एक ममदानी की जरूरत है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक समर्थन पर निर्भर रहे बल्कि सिर्फ आम लोगों के समर्थन पर अपने सभी विरोधियों को हराकर अमेरिकियों की नई पीढ़ी के सबसे युवा नेता के रूप में उभरे ममदानी ने नेहरू के प्रतिष्ठित 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' भाषण को उद्धृत करने का फैसला किया।

राजनीतिक विश्लेषक सुनील खिलनानी ने 'द आइडिया ऑफ इंडिया' में लिखा है- 'आधुनिक भारतीय राजनीति अपनी प्रतिमा के लिए राष्ट्रवादी शीर्षस्थ नेताओं की छवि को लूटना जारी रखती है जबकि अपने व्यावहारिक संघर्षों में यह राष्ट्रवादी दुनिया और अपने विशिष्ट स्वभाव से दूर और दूर जाती है। पुराने तर्कों और लड़ाइयों की आज वर्तमान पीढ़ी के नए अर्थों और इच्छाओं के साथ पुनरावृत्ति की जाती है: अंबेडकर एक बार फिर गांधी के खिलाफ खड़ा हो गया है, पटेल को नेहरू के खिलाफ लड़ाई में लाया गया है। यहां तक कि जब वे विभाजित होते हैं तो भी ये संघर्ष स्वयं एक साझा इतिहास, एक सांझी भारतीय अतीत की उपस्थिति की गवाही देते हैं.., ये संघर्ष 1947 से भारत के इतिहास की पहचान हैं; और भारत क्या है, इसके विविध विचारों को लगातार शामिल करने की अपनी क्षमता में यह इतिहास अपने आप में भारतीय विचार को व्यक्त करता है।'

भारत की ताकत इसकी सदियों पुरानी विविधता 'वसुधैव कुटुम्बकम' (जहां दुनिया को एक परिवार के रूप में देखा जाता है) में निहित है और एक मोनोक्रोमैटिक ब्रश के साथ पेंट करने का कोई भी प्रयास वास्तविक भारतीय कैनवास को जीवंत नहीं कर सकता। जोहरान ममदानी के बहुलवादी, उदार और अमूल्य विचार एक नए भारत के मूल के साथ प्रतिध्वनित होते हैं और उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में खड़ा करते हैं जिसे दुलारा जाना चाहिए।

(लेखक सेवानिवृत्त राजनयिक हैं। सिंडिकेट: द बिलियन प्रेस)

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