ललित सुरजन की कलम से - नया साल और नौजवान
आज हम अपनी बात जो युवा पीढ़ी है, उस तक सीमित रखना चाहते हैं;
आज हम अपनी बात जो युवा पीढ़ी है, उस तक सीमित रखना चाहते हैं। आज प्रारंभ होने वाला नववर्ष उनके लिए क्या खुशियां लेकर आया है और कौन सी संभावनाएं, इस पर विचार करना शायद अवसर के अनुकूल होगा।
एक किशोर, तरुण या नवयुवा- मोटे तौर पर मान लीजिए सोलह से पच्चीस का आयु वर्ग। उसकी आशा, आकांक्षाएं क्या हैं ? सामान्य सोच कहती है कि आज लड़की हो या लड़के, वे एक ऐसे जीवन की कल्पना करते हैं जो निरापद और सुखद हो, जिसमें अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर हो, ठीक-ठाक तरीके से जीवनयापन के साधन जुट जाएं, सच्चा प्यार करने वाला जीवन साथी हो और फुर्सत के लम्हों में मनचाहा मनोरंजन हो सके। अपने देश की परिस्थितियों पर एक उड़ती निगाह डालें तो शायद यह सब कुछ उपलब्ध है।
(देशबन्धु सम्पादकीय 1 जनवरी 2015)
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