ललित सुरजन की कलम से - भाजपा का भविष्य
'क्या नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से इसीलिए हटाया गया कि वे नरेन्द्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी न बन सकें
'क्या नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से इसीलिए हटाया गया कि वे नरेन्द्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी न बन सकें? हमारा अनुमान गलत हो सकता है किन्तु अभी यह बिन्दु विचारणीय है कि क्या नरेन्द्र मोदी एक तरफ मोहन भागवत और दूसरी तरफ कारपोरेट घरानों की आशाओं-आकांक्षाओं के बीच कोई तालमेल बैठा पाएंगे?
श्री भागवत चाहे जो सोचें, क्या भारत का कोई भी प्रधानमंत्री इस विशाल देश को एक धर्म आधारित देश बना सकता है? श्री नरेन्द्र मोदी और हिटलर के बीच प्रकारान्तर से तुलना की जाती है, लेकिन क्या आज की दुनिया में और विशेषकर स्वतंत्र भारत की अपनी राजनीतिक परंपरा में किसी भी व्यक्ति का हिटलर बन पाना संभव है?
दूसरी ओर यह प्रश्न भी उठता है कि देश के कारपोरेट घराने अपने साम्राय के निर्बंध विस्तार के लिए जो माहौल चाहते हैं, क्या वह सांप्रदायिक अशांति से उपजे माहौल में संभव हो पाएगा? मेरी दृष्टि में दोनों का ही जवाब नहीं में होना चाहिए।'
(देशबन्धु में 20 मार्च 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/03/blog-post_19.html