ललित सुरजन की कलम से - नया साल: कैलेण्डर, डायरी और कार्ड
'कैलेण्डर और डायरी के अलावा नए साल पर एक और चलन लंबे समय से रहा है- शुभकामना पत्र या ग्रीटिंग्स कार्ड भेजने का
'कैलेण्डर और डायरी के अलावा नए साल पर एक और चलन लंबे समय से रहा है- शुभकामना पत्र या ग्रीटिंग्स कार्ड भेजने का। यूं दीपावली पर कार्ड भेजना कहीं ज्यादा प्रचलित था। अब धीरे-धीरे दीपावली और नववर्ष दोनों पर ही कार्ड भेजने में कमी आ रही है।
पहले जब डाकघर से दिन में तीन बार डाक बंटती थी तब कार्ड अवसर के दो चार दिन आगे-पीछे मिल ही जाते थे। फिलहाल स्थिति यह है कि दीवाली तो नवम्बर में मन गई, कार्ड जनवरी में लोगों को मिल रहे हैं। मैं इसमें डाकघर को दोषी नहीं मानता।
जब विभाग में पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नहीं होंगे, चलती डाकगाड़ी में छंटाई का काम बंद होगा तब यह होना ही है। डाकघर वाले भी जानते हैं कि अब संदेशों के आदान-प्रदान के लिए उनकी भूमिका गौण हो चली है।'
(देशबन्धु में 10 जनवरी 2013 को प्रकाशित)
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