गौशाला और शांति कुंज

गाड़ी के आने तक मिश्राइन ने उस गाय के साथ अलग-अलग कोणों से दो-चार सेल्फी खींचीं।;

By :  DB Desk
Update: 2026-05-16 21:30 GMT
  •  बसंत राघव

शाम का समय था। बाज़ार की सड़क पर एक लावारिस गाय को जुगाली करते देख मिश्रा जी की पत्नी ने तुरंत अपना आईफोन निकाला। 'अरे सुनिए, बड़ी वाली पिकअप (गाड़ी) और कंपनी के दो लड़कों को भेज दीजिए। यहाँ एक लावारिस मवेशी मिला है, इसे गौशाला भिजवाना है,' उन्होंने एक बड़ी मोटर कंपनी के मैनेजर अपने पति से अधिकारपूर्ण स्वर में कहा।

गाड़ी के आने तक मिश्राइन ने उस गाय के साथ अलग-अलग कोणों से दो-चार सेल्फी खींचीं। पास खड़े लोगों को संबोधित करते हुए बोलीं- 'देखिए भाई, आजकल के लोग कितने निर्दयी हो गए हैं। इन बेज़ुबानों के लिए किसी के पास समय नहीं है। मैं तो इनका दु:ख देख ही नहीं सकती।' इतना कहते-कहते मिश्राइन ने गौ-सेवा ट्रस्ट की चंदा रसीद बुक निकाल ली थी।

वह अभी घर पहुँची भी नहीं थी कि उसने अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी। कुछ ही मिनटों में उसके मोबाइल की स्क्रीन चमकने लगी। विभिन्न समाचार वेबसाइटों के मुखपृष्ठ पर 'मिश्राइन' (मिश्र जी की पत्नी) की, गाय को सहलाते हुए तस्वीर सुर्खियाँ बन रही थी। यहाँ तक कि स्थानीय टीवी चैनलों पर भी उसी की चर्चा हो रही थी। भोजन करते समय यह सब देखकर मिश्रा जी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। वे मुस्कुराते हुए बोले- 'बहुत सुंदर! अब हमारी कॉलोनी में हमारी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी।' पास ही उनके दो विदेशी नस्ल के कुत्ते मटन चबा रहे थे, जिनके भौंकने से घर की सुरक्षा सुनिश्चित रहती थी।

तभी, घर के पीछे वाले कमरे से खाँसने की आवाज़ आई। उस कमरे में उदासी पसरी हुई थी। आवाज़ सुनकर मिश्राइन का माथा ठनक गया। उन्होंने चाय का खाली कप पटकते हुए कहा- 'सुबह से इनका शुरू हो गया। मैंने पहले ही कहा था कि इन्हें शांति कुंज छोड़ आइए, घर की शांति भंग होती है।' मिश्रा जी ने घड़ी देखी और खड़े होकर बोले- 'तुम सही कह रही हो, कल ही उन लोगों से बात करूँगा।'

भीतर उस कमरे में, भाग्य की मारी वह बूढ़ी माँ पथराई आँखों से दीवार ताक रही थी। सूखे कंठ से न वे चाय माँग सकीं, न ही उनका जर्जर शरीर दवा।

उन्हें अब शांति कुंज ही अपना आखिरी ठिकाना लग रहा था; यह सोचकर कि उस पराए आँगन में कम से कम किसी से दो बातें करने को तो मिलेगी।

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