भू-विस्थापितों पर थोपी जा रही नई पुनर्वास नीति, लाभ से कई वंचित
कोरबा ! एसईसीएल की गेवरा, दीपका, कुसमुंडा व कोरबा परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने भू अधिग्रहण के बाद मुआवजा और नौकरी का लाभ देने के लिए नई पुनर्वास नीति लागू करने पर आक्रोश;
500 पात्र बेरोजगार नौकरी की कतार में, मांग रहे रोजगार भत्ता
कोरबा ! एसईसीएल की गेवरा, दीपका, कुसमुंडा व कोरबा परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने भू अधिग्रहण के बाद मुआवजा और नौकरी का लाभ देने के लिए नई पुनर्वास नीति लागू करने पर आक्रोश जताया है। नई नीति थोपने का आरोप लगाते हुए भू विस्थापितों ने जमीन लेते समय लागू पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने की मांग रखी है। पृथक-पृथक भू-अर्जन नीति से अधिग्रहित लगभग 25 गांवों के करीब 500 बेरोजगार अभी भी नौकरी के लिए कतार में हैं। रोजगार देने में 30 से 40 साल का विलंब के एवज में उक्त अवधि का रोजगार भत्ता सहित पुनर्वास के बदले 3 लाख की जगह 5 लाख रूपये राशि देने की मांग उठी है।
भू-विस्थापितों ने बताया कि गेवरा परियोजना के लिए वर्ष 2001 से 2007 के बीच अधिग्रहित ग्राम भठोरा, पोड़ी, अमगांव, बाम्हनपाठ, रलिया में मुआवजा व रोजगार की प्रक्रिया जारी है। इन गांवों में कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 के कारण 150 परिवार रोजगार से वंचित हो रहे हैं जबकि वे मूल खातेदार हैं। तत्कालीन समय में मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति या छ.ग. पुनर्वास नीति के तहत इन्हें रोजगार दिया जाना था। चूंकि कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 की कंडिका 3 के अनुसार यह नीति 13 मार्च 2012 को मंजूर होने के बाद के भू अधिग्रहण पर लागू होगी इसलिए इन गांवों में कोल इंडिया नीति 2012 लागू नहीं होगी। इसी तरह ग्राम भिलाईबाजार व नरईबोध का भू अधिग्रहण 2007 में किया गया व बिना पुनर्वास बैठक एवं बिना ग्राम सभा की सहमति लिये बगैर पुनर्वास नीति 2012 लागू किया जा रहा है। प्रभावितों ने इन गांवों में गलत तरीके से पुनर्वास नीति लागू करने का आरोप लगाया है। प्रभावित 41 गांवों के भू विस्थापितों ने कोल इंडिया नीति 2012 के तहत लेप्स रोजगार को कट आफ पाइंट के नीचे के स्थायी निवासी को हस्तांतरित करने की मांग की है। प्रभावित मकानों वाले परिवारों को पुनर्वास देने के अलावा मांग की गई है कि मतदाता सूची में नाम न होने के आधार पर किसी भू स्वामी को पुनर्वास से वंचित न किया जाये। आबंटित भू खंड का पट्टा शासन के नियमानुसार प्रदान करे व ग्रामवार शिविर लगाकर संबंधित दस्तावेज बनायें ताकि तहसील कार्यालय में में प्रभावितों से रूपये की मांग न की जा सके। भू अर्जन के तीन साल पहले हुए बंटवारे को एसईसीएल द्वारा जबरन संयुक्त नहीं करने की भी मांग की है।
अधिग्रहण के 17 साल बाद
भी मुआवजा नहीं
दीपका परियोजना हेतु ग्राम सुआभोड़ी, रेकी, हरदीबाजार, मलगांव का भू अधिग्रहण सन 2001 से किया गया, किन्तु आज तक की स्थिति में 17 साल बाद भी मुआवजा का भुगतान नहीं किया और न ही रोजगार दिया गया है। 2001 में अधिग्रहित अमगांव के मोहल्ला जोकाहीडबरी के शेष 124 प्रभावित परिवारों को मकान का मुआवजा नहीं मिला है। इसी प्रकार कुसमुंडा परियोजना के लिए ग्राम रिस्दी, पाली, पड़निया, सोनपुरी, जटराज की जमीन का अधिग्रहण 2009 से किया गया, किन्तु आज तक मुआवजा व रोजगार से वंचित हैं। इन गांवों में नये भू-अधिग्रहण कानून के तहत वर्तमान बाजार भाव का 4 गुना मुआवजा व प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी मांगी गई है।
रद्द किया जाए भू-अधिग्रहण
एसईसीएल कोरबा परियोजना के द्वारा पाली तहसील के ग्राम बुड़बुड़ में खदान हेतु वर्ष 2004 से भू-अधिग्रहण किया गया व अंतिम अवार्ड 2007 में पारित हुआ। 9 साल के बाद भी कंपनी द्वारा भूमि पर भौतिक कब्जा नहीं लिया गया और न ही प्रभावित परिवारों को नौकरी दी जा सकी है। नये भू अधिग्रहण काननू 2013 के प्रावधानों के अनुसार अंतिम अवार्ड पारित करने के पांच साल तक भौतिक कब्जा नहीं करने की स्थिति में उक्त भू अधिग्रहण की प्रक्रिया को रद्द माना जाकर नये प्रावधान अनुसार पुनर्वासित किया जाना है।
भेदभाव न करे कंपनी
मांग की गई है कि पुनर्वास आबंटन हेतु लिंग भेद न कर निवासरत विवाहित अथवा अविवाहित महिला को भी पुनर्वास दिया जाए। जीविकोपार्जन के कारण से कहीं अन्य रह रहे किन्तु प्रभावित गांंव का मूल निवासी होने पर भी पुनर्वास का लाभ मिले। प्रभावित समस्त परिवारों को भू-विस्थापित का प्रमाण पत्र दिया जाए। माइनिंग कालेज की स्थापना कर प्रभावित बच्चों को प्रवेश में प्राथमिकता, बेरोजगारों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर परियोजना में प्राथमिकता से रोजगार, एसईसीएल व कोल इंडिया में होने वाली खुली भर्ती में परियोजना प्रभावित को प्राथमिकता की मांग की गई है।
1600 फर्जी नौकरी की जांच हो
ऊर्जाधानी भूविस्थापित कल्याण समिति ने बताया कि गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, कोरबा परियोजना प्रभावित किसानों व आदिवासियों के खातों पर एसईसीएल के अधिकारियों की मिली भगत से लगभग 1600 व्यक्ति फर्जी नौकरी कर रहे हैं इनकी जांच कर सेवा से बर्खास्त करते हुए दोषी अधिकारियों को भी बर्खास्त किया जाए। इसी तरह कोयला उत्खनन व परिवहन कार्य में एरिया अधिकारियों द्वारा मिली भगत से ए ग्रेड कोयला को डी ग्रेड की दर से कम कीमत में सप्लाई कर करोड़ों का राजस्व घाटा पहुंचाया जा रहा है। सीआईएसएफ व निजी सुरक्षा कंपनी के माध्यम से अवैध कोयला बेचने की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही के अलावा एसईसीएल एरिया अधिकारियों के संपत्ति की जांच होनी चाहिए।