197 शिक्षकों का अभी भी नहीं हो सकी बायोमेट्रिक कमिशनिंग
मार्च के पहले सप्ताह से जांजगीर-चांपा जिले के सरकारी स्कूलों में टेबलेट वितरित कर शिक्षकों का बायोमेट्रिक अटेडेंस कराने की शालाकोष योजना आरंभ की गयी थी
ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए छूटे शिक्षकों को आज तक का वक्त
जांजगीर । मार्च के पहले सप्ताह से जांजगीर-चांपा जिले के सरकारी स्कूलों में टेबलेट वितरित कर शिक्षकों का बायोमेट्रिक अटेडेंस कराने की शालाकोष योजना आरंभ की गयी थी, किंतु नये शिक्षा सत्र शुरू हो जाने के बाद भी अभी तक जिले के 197 शिक्षकों का शालाकोष डिवाइस में कमिशनिंग नहीं हो सका है। जिसके लिए विभाग 20 जून तक का समय दिया है।
बायोमेट्रिक मशीन के रूप में स्कूलों में टेबलेट का वितरण पिछले शिक्षा सत्र के अंत में ही लागू किया गया था, मगर इसकी ऑनलाईन मानिटरिंग कितनी हो पाई यह फिलहाल विभाग बता नहीं पा रहा है। मगर इस वर्ष ऑनलाईन अटेंडेंस को लेकर विभाग गंभीर बना हुआ है। जो शाला कोष डिवाईस से अब तक छुटे करीब 197 शिक्षकों की कमिशनिंग कराने 20 जून तक का समय दिया गया है। इनमें से कुछ ऐसे शिक्षक है जो लंबे समय से अवकाश में बाहर रहे या फिर ऐसे शिक्षक जिनका शालाकोष वेबसाइट में डाटा अपडेट नहीं हो पाया था वहीं इस बीच कई शिक्षक अनुकंपा नियुक्ति में आ गये तो कुछ के मौत हो गये और कुछ स्थानांतरण अथवा प्रमोशन में अन्य स्कूलों में चले गये। शालाकोष अटेडेंस से छूटे अधिकांश शिक्षक ऐसे है जिनके उंगलियों के निशान ही हाथों से गायब हो गये है ऐसे में विभाग इन शिक्षकों का कब तक कमिशनिंग करवा पाती है यह देखने वाली बात होगी। वही जितने शिक्षकों का कमिशनिंग हो चुका है वे शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचकर अध्यापन कार्य करा रहे हैं। इसके माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज किया जा रहा है। जिन शिक्षकों का टेबलेट में कमिशनिंग अभी तक नहीं हो सका है जिला मिशन समन्वयक के आदेश के अनुसार 20 जून तक शत प्रतिशत शिक्षकों का थम हाजरी स्कैन टैबलेट शालाकोष में किया जाना है। अब शिक्षकों सुबह 10 बजे और शाम 4 बजे मशीन से हाजिरी लगानी पड़ रही है, जबकि छात्रों को सुबह 10 बजे हाजरी देनी पड़ रही है। इस व्यवस्था से स्कूलों में पारदर्शिता आयी है और स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर अंकुश लगा है। विदित हो कि स्कूलों से गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। विभाग ने रियल टाइम अटेंडेंस के लिए खास एप विकसित किया है जिसे शालाकोष टेबलेट नाम दिया गया है।
शासन का मानना है कि इसके लगने से शिक्षक देरी से स्कूल नहीं पहुंचेंगे। इधर स्कूलों के टेबलेट में खराबी आने की शिकायतें लगातार मिल रही है जिसका निराकरण विभाग द्वारा अपने स्तर पर किया जा रहा है। टेबलेट के आने से शिक्षा विभाग का काम आनलाइन होने लगा है। इस वर्ष यूडाइस डाटा भी टेबलेट के माध्यम से ही भरा गया है। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर भी विभाग द्वारा ऑनलाइन नजर रखा जा रहा है। शालाओं की ऑनलाइन मानिटरिंग के लिए समन्वयकों को पहले से ही विभाग द्वारा टेबलेट वितरण किया जा चुका है। जिले में अब विभाग ने शिक्षकों को दूसरे कार्यों में संलग्न करने पर भी रोक लगा दी है।
20 तक सभी की कमिशनिंग अनिवार्य-डीईओ
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भास्कर ने बताया कि विद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता लाने के लिए समय पर शिक्षकों की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है। इसलिए शालाकोष डिवाईस में छुटे हुये शिक्षकों की कमिशनिंग जल्द कराने कहा गया है।