योगी सरकार ने दी नई खांडसारी नीति को मंजूरी
गन्ना किसानो को लाभ पहुंचाने और रोजगार के अवसर मुहैया कराने के मकसद से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है

लखनऊ। गन्ना किसानो को लाभ पहुंचाने और रोजगार के अवसर मुहैया कराने के मकसद से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है और इसके तहत सरकार ने मंगलवार को नई खांडसारी नीति को मंजूरी दे दी।
एक अप्रैल 2018 से लागू की गई इस नीति के तहत निवेशकों को गुड़ उत्पादन के लिये नयी इकाइयों की स्थापना के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा जबकि पुरानी और बंद पडी इकाइयों के जीर्णोद्धार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां सम्पन्न मंत्रिमंडल की एक बैठक यह भी निर्णय लिया गया कि गोरखपुर में धूरियाापार चीनी मिल की 50 एकड जमीन इंडियल आयल कारपोरेशन लिमिटेड को एथेनाल निर्माण के संयंत्र की स्थापना के लिये दे दी जाये।
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के इस कदम से ना सिर्फ खांडसारी उद्योग को फायदा मिलेगा बल्कि लोगों को निरोगी बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होने कहा कि नयी नीति एक अप्रैल 2018 से अस्तित्व में लायी गयी है । नीति के तहत खांडसारी उद्योग की स्थापना चीनी मिलों के 15 किमी के दायरे की बजाय साढे सात किमी में की जा सकेगी जबकि नयी इकाइयों के लिये देय प्रस्तावों को 200 घंटे के भीतर मंजूरी देना जरूरी होगा।
श्री सिंह ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्ष 1995-96 में प्रदेश में 1082 खांडसारी इकाइयां थी जो अब घटकर महज 165 रह गयी है।
चीनी विकास मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि 40 नयी खांडसारी इकाइयों को सरकार 9000 टन गन्ने की पेराइे के लिये पहले ही लाइसेंस जारी कर चुकी है। गन्ने की यह मात्रा चार चीनी मिलों को दिये जाने वाले गन्ने के बराबर है। पुरानी और बंद पडी खांडसारी इकाइयों से सरकार पेनाल्टी और कर नही लेगी जबकि एक स्थान से दूसरे स्थान पर इकाइयों को ले जाने के लिये अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा।
श्री राणा ने दावा किया कि 2017-18 के दौरान चीनी मिलों ने 120 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया जो देश के कुल उत्पादन का 38 प्रतिशत था। चीनी उत्पादन के मामले में यह राज्य देश में अग्रणी था।


