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निर्दोषों को फंसा सकती है योगी सरकार : अखिलेश

नागरिकता संशोधन अधिनियम को काला कानून करार देते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया

निर्दोषों को फंसा सकती है योगी सरकार : अखिलेश
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लखनऊ। नागरिकता संशोधन अधिनियम को काला कानून करार देते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरूवार को आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और निर्दोषों को फंसाने की साजिश रची जा रही है।

श्री यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने विधान भवन परिसर से लेकर सड़कों तक शांतिपूर्ण धरना दिया और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। शांतिपूर्ण एवं अहिंसात्मक धरना के लिए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुये उन्होने कि भाजपा को लोकतंत्र और संविधान की परवाह नहीं है। भाजपा सरकार ने आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। भाजपा सरकार जानबूझकर सत्ता पर काबिज रहने के लिए काला कानून लाई है। धर्म के आधार पर नागरिकता की बात स्वीकार नहीं की जा सकती है। भाजपा भाईचारा तोड़ने और नागरिकों के बीच खाई पैदा करना चाहती है।

उन्होने कहा कि मोदी सरकार का राजहठ देश के भविष्य के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। नागरिकता संशोधन अधिनियम की वजह से दुनिया भर में देश की साख को नुकसान पहुंचा है। एक तो पुलिस प्रशासन ने तांडव मचाया और अब निर्दोषों को फंसाने की साजिश रची जाने के संकेत है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों का किसी तरह का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।

सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी के धरना के सम्बंध में प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस द्वारा कल से ही पार्टी नेताओं को नोटिसें जारी की गई और उनकी पेशबंदी की गई। कई पार्टी अध्यक्षों के घरों को पुलिस ने घर में ही कैद कर दिया। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी थी। कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं पर बर्बरता से लाठीचार्ज हुआ।

कैसरबाग स्थित पार्टी के जिला कार्यालय के अलावा अम्बेडकर प्रतिमा स्थल और कलेक्ट्रेट पर कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन पर लाठियां चलाई जिससे दर्जनों पदाधिकारी घायल हो गए। सैकड़ों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इससे पहले विधायकों ने विधान भवन के बाहर प्रदर्शन किया और जनता की आवाज बुलन्द की। कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को ज्ञापन देने से रोका गया। शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े। जनप्रतिरोध रोकने के लिए शासन ने तानाशाही का रवैया अपनाया।

उन्होने कहा कि राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम देश और समाज को बांटने की साजिश है। नोटबंदी-जीएसटी लागू होने के बाद से व्यापार धंधा चौपट है। नौजवान बेरोजगार हो गए हैं। कानून व्यवस्था बदहाल है। मंहगाई चरम पर है। महिलाओं, बच्चियों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही है। गन्ना, धान, आलू किसान संकट में है। किसानों पर लगे फर्जी केस खत्म हों, उन्हें फसल का लाभप्रद मूल्य मिले, ओलावृष्टि से सरसों, गेंहू की बर्बाद फसल का मुआवजा दिया जाए।


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