क्या मेहरंग बलोच की सजा, बलोचिस्तान में अहिंसक आंदोलनों के प्रति भरोसा खत्म कर देगी?
डॉक्टर से एक्टिविस्ट बनीं मेहरंग बलोच को पाकिस्तान की अदालत ने आजीवन कैद की सजा दी है. क्या यह सजा, अहिंसक आंदोलनों पर भरोसा खत्म कर देगी

डॉक्टर से एक्टिविस्ट बनीं मेहरंग बलोच को पाकिस्तान की अदालत ने आजीवन कैद की सजा दी है. क्या यह सजा, अहिंसक आंदोलनों पर भरोसा खत्म कर देगी.
पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने इस हफ्ते दो नागरिक अधिकार एक्टिविस्ट को ताउम्र जेल की सजा सुनाई. कोर्ट ने उन्हें जुलाई 2024 के प्रदर्शन में मारे गए अर्धसैनिक बल के एक सदस्य की हत्या का दोषी ठहराया.
33 साल की मेहरंग बलोच, पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत से हिरासत लिए जाने के बाद लापता होने वाले लोगों के लिए आवाज उठाती रही हैं. वह बलोचिस्तान यूनिटी कमेटी (BYC) के नेता भी हैं. 25 जून 2026 को पाकिस्तान की एंटी टेरेरिज्म कोर्ट ने उन्हें और उनके साथी एक्टिविस्ट शिब्गहतुल्लाह शाहजी को हत्या और आकंतवाद का दोषी करार दिया. दोनो एक्टिविस्टों ने पूरी अदालती सुनवाई का बहिष्कार किया और चार्जशीट में लगाए गए आरोपों से इनकार भी किया.
बलोच वकील इसरार जटाक के मुताबिक दोनों एक्टिविस्ट, एंटी टेरेरिज्म कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. जटाक ने हाल ही में जेल में दोनों से मुलाकात की. अपने वकील के मार्फत बात करते हुए बलोच ने डीडब्ल्यू से कहा, "अदालत कानून को हथियार बनाकर हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर रही है. इस निर्णय के जरिए अदजालत और न्यायिक प्रणाली ने अपना असली रंग दिखा दिया है."
नागरिक व मानवाधिकार संगठनों ने कोर्ट के फैसले का तीखा विरोध किया है. पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने फैसले की समीक्षा करने की अपील की है. आयोग के मुताबिक, यह फैसला दिखा रहा है कि संवेदनशील मामलों में न्यायिक तंत्र पूरी तरह "एकतरफा और पक्षपाती है."
शाहिद रिंद, बलोचिस्तान सरकार के प्रवक्ता हैं. डीडब्ल्यू से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अदालती कार्रवाई निष्पक्षता से चली और इस दौरान साफ और ठोस सबूत पेश किए गए. उन्होंने इसे बिल्कुल भी राजनीति से प्रेरित नहीं बताया.
बलोच पर मुकदमा क्यों चलाया गया?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बलोच ने जुलाई 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाया. आरोप हैं कि वही भीड़ का नेतृत्व भी कर रही थीं. इस भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हमला किया. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शन के दौरान सिपाही शब्बीर अहमद अपने साथियों से अलग हो गए. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पीटकर मार डाला.
बलोच और शाहजी को मार्च 2025 में गिरफ्तार कर बलोचिस्तान की राजधानी क्वेटा की हुड्डा जिला जेल में रखा गया है. बलोच ने जेल से जारी एक बयान में कहा, "इन आरोपों का इस्तेमाल ऐसा माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है, जहां राजनीतिक असहमति को अपराध बताया जा रहा है और मानवाधिकारों की मांग को राज्य के खिलाफ माना जा रहा है."
डॉक्टर से एक्टिविस्ट तक मेहरंग बलोच का सफर
मेहरंग बलोच मूल पेशे से एक डॉक्टर हैं. बाद में वह मानवाधिकार कार्यकर्ता बनीं. असल में 2009 में उनके पिता अब्दुल गफ्फार लंगोवे अचानक लापता हो गए. 2011 में उनका शव मिला. पिता की संदिग्ध गुमशुदगी व हत्या के बाद मेहरंग बलोच मानवाधिकार एक्टिविस्ट के रूप सें सक्रिय हुईं. पिता से जुड़ी वारदात के बाद मेहरंग बलोच, बलोचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के मामलों के खिलाफ एक प्रमुख आवाज बन गईं.
अंदर से कैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है पाकिस्तान
अब वह बलोचिस्तान यूनिटी कमेटी (BYC) की प्रमुख नेता हैं. यह संगठन बलोचिस्तान में मानवाधिकार से जुड़ा एक आंदोलन है. उनके सहयोगियों के अनुसार, उनकी सक्रियता शांतिपूर्ण रही है. इसमें धरना, प्रदर्शन और मार्च शामिल हैं. वह लापता लोगों के परिवारों को संगठित करती आई हैं. उन्होंने लगातार सरकार से न्याय, जवाबदेही और संवाद की मांग की और यह सब अहिंसक तरीकों से किया गया. दशकों से स्वायत्तता या आजादी की मांग को बल प्रयोग से दबाया जाता रहा है.
बलोचिस्तान में सरकार और सेना के खिलाफ गुस्सा
पाकिस्तान के पश्चिम में स्थित बलोचिस्तान देश का सबसे बड़ा और सबसे गरीब प्रांत है. यह पहाड़ी इलाका खनिज संसाधनों से भरपूर है. रुखी जलवायु के कारण बलोचिस्तान की जनसंख्या काफी कम है. बलोच समुदाय के लोगों को बलोचिस्तान का मूल निवासी माना जाता है. लेकिन इस समुदाय के लोग लंबे समय से भेदभाव और शोषण की शिकायत करते रहे हैं. उनका कहना है कि इस्लामाबाद की केंद्रीय सरकार उनके साथ न्याय नहीं करती.
इन तनावों के कारण बलोचिस्तान में समय समय पर अलगाववादी आंदोलन भी हुए. ऐसे आंदोलन अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते हैं. साथ ही अपनी जमीन पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में अधिक हिस्सेदारी की मांग भी यहां मौजूद है.
बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को अलगाववादी बलोचों का एक मजबूत सशस्त्र समूह माना जाता है. यह संगठन अक्सर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलोचिस्तान से होकर गुजरने वाले पाकिस्तान चीन आर्थिक कॉरिडोर को निशाना बनाता रहता है. बलोचिस्तान की स्वायतत्ता या आजादी की मांग को पाकिस्तान, हिंसक दमन से दबाने की कोशिश करता रहा है.
अहिंसक अभियानों पर कैसा असर डालेगा मेहरंग बलोच का केस
विश्लेषकों का मानना है कि आजीवन कैद की सजा से बलोचिस्तान में राजनीतिक बहस खतरे में पड़ सकती है. बलोच यकजहती समिति की कार्यकर्ता सामी दीन बलोच के मुताबिक इस फैसले का सबसे बड़ा असर शांतिपूर्ण राजनीतिक सक्रियता पर पड़ेगा. इससे यह संदेश जाएगा कि अहिंसक और लोकतांत्रिक प्रयास भी कड़ी सजा तक पहुंच सकते हैं.
उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "दशकों से कई लोग राज्य संस्थानों पर भरोसा खो चुके हैं. उन्हें लगता है कि शांतिपूर्ण संघर्ष से कुछ हासिल नहीं होता. फिर भी कई कार्यकर्ता लोकतांत्रिक रास्ते से समाधान की बात करते रहे हैं."
सामी दीन को लगता है कि अगर समस्याओं को नहीं सुना गया और शांतिपूर्ण रास्ते बंद कर दिए गए, तो सशस्त्र संघर्ष को समर्थन बढ़ सकता है.


