Top
Begin typing your search above and press return to search.

क्यों हो रहा है स्वीडन में किशोरों को जेल भेजने पर विचार?

स्वीडन में बढ़ते गिरोह अपराधों के बीच सरकार 13 साल के बच्चों को भी गंभीर आपराधिक मामलों में जेल भेजने के एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है. यूरोप के कुछ अन्य देश भी ऐसा सोच रहे हैं

क्यों हो रहा है स्वीडन में किशोरों को जेल भेजने पर विचार?
X

स्वीडन में बढ़ते गिरोह अपराधों के बीच सरकार 13 साल के बच्चों को भी गंभीर आपराधिक मामलों में जेल भेजने के एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है. यूरोप के कुछ अन्य देश भी ऐसा सोच रहे हैं.

आमतौर पर 13 से 14 साल के बच्चों को स्कूल में होना चाहिए लेकिन स्वीडन में आपराधिक गुट दिनदहाड़े लोगों पर हमले करने और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसे अपराधों को अंजाम देने के लिए किशोरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. स्वीडिश कानून के तहत 15 साल से कम उम्र के किशोरों को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. संगठित आपराधिक गिरोह इस बात का फायदा उठाते हैं.

अब बढ़ती गैंग हिंसा और संगठित अपराध से निपटने के लिए स्वीडन अपनी कानूनी व्यवस्था को सख्त करने पर विचार कर रहा है. संसद पहले ही ऐसे एक प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है. इसके तहत अगर 15 से 17 वर्ष के किशोरों को गंभीर अपराधों में दोषी पाया जाता है तो उन्हें विशेष किशोर कारागारों में जेल की सजा दी जा सकती है.

इसके अलावा स्वीडिश सरकार गंभीर अपराधों के मामले में अपराध की न्यूनतम आयु को अस्थायी तौर पर 13 वर्ष तक घटाने की योजना बना रही है. यह प्रावधान हत्या, गैर-इरादतन हत्या, बम विस्फोट और कई अन्य गंभीर अपराधों पर लागू किया जा सकता है. इस प्रावधान पर संसद जून के मध्य में मतदान करेगी और पांच वर्षों बाद इसके परिणाम की समीक्षा की जाएगी.

डेनमार्क की कोशिश हुई नाकाम

अपराध के लिए न्यूनतम उम्र को घटाने की बहस सिर्फ स्वीडन तक ही सीमित नहीं है. 2010 में डेनमार्क ने अपनी रूढ़िवादी सरकार के नेतृत्व में अपराध की न्यूनतम उम्र को 15 से घटाकर 14 साल कर दिया था. इसके दो साल बाद ही इस सुधार को वापस ले लिया गया. इस सुधार के परिणाम पर हुए शोध में सामने आया था कि अपराध की न्यूनतम उम्र घटाने से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है. इसके उलट प्रभावित युवाओं में दोबारा अपराध करने की संभावना बढ़ गई और स्कूल में उनका प्रदर्शन भी खराब हुआ.

डेनमार्क के इस कदम को अब कई विशेषज्ञ एक असफलता के तौर पर देखते हैं. उनका मानना है कि बच्चों को कम उम्र में अपराधी घोषित कर देना असल में युवा हिंसा की समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि कम उम्र में अपराधियों के संपर्क में आने से किशोर और ज्यादा आपराधिक माहौल में खिंच सकते हैं.

नीदरलैंड्स में 12 साल की उम्र से सजा का प्रावधान लेकिन जेल का नहीं

अन्य यूरोपीय संघ देशों से तुलना में नीदरलैंड्स और आयरलैंड ऐसे देश हैं जहां अपराधी ठहराए जाने की न्यूनतम उम्र काफी कम है. नीदरलैंड्स में तो 12 वर्ष की आयु से ही किशोरों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है. आयरलैंड में भी आपराधिक जिम्मेदारी की न्यूनतम उम्र 12 वर्ष ही है. हालांकि कुछ गंभीर अपराधों में जैसे हत्या, गैर-इरादतन हत्या, बलात्कार और गंभीर यौन अपराधों के लिए 10 या 11 वर्ष की आयु के बच्चों को भी आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

इन देशों में कम आपराधिक उम्र का यह मतलब नहीं है कि बच्चों को भी वयस्कों की तरह कठोर जेल की सजा दी जाती है. नीदरलैंड्स में 12 से 15 वर्ष के किशोरों के लिए हिरासत में लिए जाने की अधिकतम अवधि एक वर्ष है और गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए 16 और 17 वर्ष के किशोरों के लिए अधिकतम सजा आमतौर पर दो वर्ष होती है. हालांकि, इन देशों में बच्चों को हिरासत में लेने का मकसद केवल बच्चों को सजा देना ही नहीं है, बल्कि उनकी शिक्षा और सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है.

जर्मनी और स्पेन में यदि 12 साल का किशोर कोई गंभीर अपराध करता है, तो उसे कानूनी रूप से अपराधी नहीं माना जाता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार कुछ नहीं कर सकती है. इन देशों में भी युवाओं के लिए सामाजिक सेवाएं, पारिवारिक अदालतें और सुरक्षा संबंधी संस्थाएं हस्तक्षेप कर सकती हैं. कुछ मामलों में बच्चे को निगरानी केंद्रों में रखा जा सकता है, लेकिन इसे कानूनी रूप से आपराधिक सजा नहीं माना जाता है.

उन्हें अक्सर अपराधी के तौर पर नहीं बल्कि ऐसे नाबालिग के रूप में देखा जाता है, जिन्हें मदद की जरूरत है. स्पेन के कानून में यह बात विशेष रूप से स्पष्ट है. 14 साल से कम उम्र के किशोर आपराधिक कानून में नहीं, बल्कि देखभाल और बाल संरक्षण व्यवस्था की श्रेणी में आते हैं.

इटली में बढ़ी जेल जाने वालों किशोरों की संख्या

इससे निपटने के लिए इटली में एक खास तरीका है. जिसके तहत सजा या जेल से ज्यादा बच्चे के आसपास के माहौल पर अधिक ध्यान दिया जाता है. इटली का तथाकथित काईवानो डीकरी उन माता-पिता पर सख्ती बढ़ाता है, जो बच्चों की देखरेख और उनकी स्कूल में उपस्थिति की जिम्मेदारी पूरी नहीं करते हैं. यदि कोई बच्चा लंबे समय तक स्कूल नहीं जाता है, तो उसके माता-पिता को भी कानूनी या आपराधिक सजा का सामना करना पड़ सकता है.

इटली का मॉडल पूरी तरह से स्वीडन से अलग नहीं है. इस कानून ने भी किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक सख्त बनाया है. आलोचकों का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद से किशोर हिरासत में रखे जाने वाले युवाओं की संख्या काफी बढ़ गई है.

कैसी हो नाबालिग अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई

कई यूरोपीय संघ देशों में 14 वर्ष की उम्र अभी भी एक महत्वपूर्ण मानक मानी जाती है. ऑस्ट्रिया भी इस नियम का पालन करता है. वहां भी 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं माना जाता लेकिन अगर वह कोई गलत काम करते हैं, तो उसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं जैसे पुलिस और माता-पिता के साथ बैठक, चेतावनी मिलना, युवा सेवा विभाग में भागीदारी और शैक्षणिक सुधार जैसे कार्यक्रम. यूरोप में अपराध के लिए जिम्मेदार होने की कम उम्र का मतलब यह नहीं है कि बच्चों को वयस्कों जैसी सजा दी जाती है, बल्कि आम तौर पर उनके लिए विशेष किशोर अदालतें होती हैं. यह उनके सुधार, शिक्षा और विशेष सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं.

विज्ञान किसकी तरफ?

कम उम्र में बच्चों को सजा देने से यूरोप का बचना, बाल एवं किशोर मनोविज्ञान के शोधों से मेल खाता है. बच्चे और कम उम्र के किशोर सजा मिलने के डर के बजाय तुरंत मिलने वाले लाभ, दोस्तों के दबाव और भावनात्मक स्वीकार्यता से अधिक प्रभावित होते हैं. इसके अलावा अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना, भविष्य के परिणामों के बारे में सोचना और आगे की योजना बनाना जैसी क्षमताएं भी उनमें धीरे-धीरे ही विकसित होती हैं.

इस कारण 13 साल के बच्चों पर सजा का डर अक्सर कुछ खास प्रभावी नहीं होता है. भविष्य में जेल जाने का डर उनके लिए तुरंत मिलने वाले फायदे, जैसे पैसा, पहचान, किसी समूह का हिस्सा बनने की भावना के सामने कमजोर पड़ सकता है.

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि केवल आपराधिक जिम्मेदारी की उम्र घटाकर और सजा को कठोर बनाकर ही किशोर अपराध की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता है.

आपराधिक गुट सरकार की सोच से भी आगे

एक चिंता यह भी है कि आपराधिक गिरोह बहुत जल्दी अपने तरीके बदल लेते हैं. अगर स्वीडन गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदारी की उम्र 13 साल कर देता है, तो गैंग इससे भी छोटे बच्चों को अपराधों के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं. ऐसे में समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ सकती है. अब सिर्फ यह नहीं है कि बच्चों को किस उम्र से सजा दी जा सकती है. इससे भी बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सरकार उन अपराधियों पर कार्रवाई कर पा रही है, जो बच्चों को अपराध करने के लिए उकसाते हैं और उनका इस्तेमाल करते हैं.

कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीडन सरकार की यह योजना शायद अपराध कम करने में ज्यादा सफल नहीं होगी. इस कारण न्याय विशेषज्ञों, वकीलों के संगठनों और कई सामाजिक संस्थाओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. ऐसे में यदि संसद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो 13 साल के बच्चों को भी गंभीर अपराधों के मामलों में जेल भेजा जा सकता है.


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it