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ईरान में पिछले चार दिनों से क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन? जानिए क्या है इनकी मांग

ईरान इस समय गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इसका सीधा असर सड़कों पर दिख रहा है. ईरान के कई शहरों में पिछले चार दिन से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की भारी गिरावट ने आम लोगों का गुस्सा भड़का दिया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि जो प्रदर्शन पहले सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित थे, अब वे सीधे शासन बदलने की मांग में बदलते जा रहे हैं

ईरान में पिछले चार दिनों से क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन? जानिए क्या है इनकी मांग
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ईरान में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?

ईरान : ईरान इस समय गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इसका सीधा असर सड़कों पर दिख रहा है. ईरान के कई शहरों में पिछले चार दिन से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की भारी गिरावट ने आम लोगों का गुस्सा भड़का दिया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि जो प्रदर्शन पहले सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित थे, अब वे सीधे शासन बदलने की मांग में बदलते जा रहे हैं।

यही नहीं, ये प्रदर्शन अब ईरान के कई शहरों में हो रहे हैं. ईरान के विभिन्न शहरों में रात में हो रहे प्रदर्शनों की तस्वीरें सामने आई हैं. कई जगह सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हिंसा का सहारा लिया है. प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई है और 13 अन्य लोग घायल हुए हैं. तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा गोली चलाते हुए भी देखा जा सकता है. इस बीच राजधानी तेहरान के बेहेश्ती विश्वविद्यालय में लड़कियों के छात्रावास के सामने एक छात्रा की गिरफ्तारी की तस्वीरें भी सामने आईं।

इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई, जब ईरान की मुद्रा रियाल टूटकर इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.2 लाख रियाल हो गई. इसके बाद खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ गए और व्यापार करना बेहद मुश्किल हो गया. इसी के विरोध में तेहरान के ग्रैंड बाजार और मोबाइल फोन बाजार के दुकानदारों ने हड़ताल कर दी और अपनी दुकानें बंद कर दीं।

पहले ऐसे प्रदर्शन सिर्फ महंगाई या रोजगार जैसे मुद्दों तक सीमित रहते थे, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही. कुछ ही दिनों में आंदोलन तेहरान से निकलकर इस्फहान, शिराज, यज्द और केरमानशाह जैसे बड़े शहरों तक फैल गया. जब विश्वविद्यालयों के छात्र भी दुकानदारों के साथ जुड़ गए, तो आंदोलन पूरी तरह राजनीतिक हो गया. अब लोग सीधे सरकार बदलने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, सरकार की प्रतिक्रिया ने भी लोगों की नाराजगी कम नहीं की. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने यूनियनों से बातचीत की बात कही. उन्होंने यह भी माना कि हालात बहुत मुश्किल हैं और सवाल उठाया कि जब बजट के लिए 62% टैक्स बढ़ाने की जरूरत हो और महंगाई 50% के आसपास हो, तो पैसा कहां से आएगा।

लेकिन दूसरी तरफ सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है. पुलिस ने कई जगह आंसू गैस और बल का इस्तेमाल किया है. सरकार ने 18 प्रांतों में दफ्तर और विश्वविद्यालय बंद करने का आदेश भी दिया, जिसे प्रदर्शन रोकने की कोशिश माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ये कोशिशें बहुत देर से की गई हैं. लोगों का भरोसा टूट चुका है. कुछ प्रदर्शनकारियों में पुराने शाह के दौर की याद और उनके बेटे रज़ा पहलवी के समर्थन के नारे भी दिख रहे हैं।


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