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जर्मनी की मझोली कंपनियों में अमेरिकी निवेशकों की क्यों बढ़ी दिलचस्पी?

जर्मनी की पारंपरिक औद्योगिक कंपनियों और पारिवारिक कारोबारों में अमेरिकी निवेश लगातार बढ़ रहा है, मगर क्यों?

जर्मनी की मझोली कंपनियों में अमेरिकी निवेशकों की क्यों बढ़ी दिलचस्पी?
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जर्मन अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली छोटे और मध्यम दर्जे की कंपनियों व उद्योगों में अमेरिकी निवेश बढ़ रहा है. आखिर इस क्षेत्र में अमेरिकी निवेशकों की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?

जर्मनी की जानी-मानी और लंबे समय से कारोबार कर रही कंपनियों बिर्केनश्टॉक, वीसमैन, लिंडे और ईबीएम-पाप्स्ट में क्या समानता है? ये सभी अब अमेरिकी हाथों में चली गई हैं. जर्मनी के पारंपरिक पारिवारिक व्यवसायों और छोटे से मध्यम आकार के उद्यमों में अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है.

वित्तीय आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी ‘पिचबुक' के एक विश्लेषण के मुताबिक, पिछले साल अमेरिकी निवेशक जर्मनी की औद्योगिक और विनिर्माण कंपनियों के 76 अधिग्रहण और निवेश सौदों में शामिल थे. वर्ष 2025 में इन सौदों का कुल मूल्य करीब 29.5 अरब डॉलर (26.3 अरब यूरो) था. यह रकम 2022 के कुल आंकड़े से लगभग दोगुनी थी. 19 अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा 23.9 अरब डॉलर पहुंच गया था.

उत्तराधिकारी की कमी से जूझ रही हैं पुरानी कंपनियां

जर्मनी में निवेश करने की योजना बना रही कंपनियों को सलाह देने वाली फर्म ‘वेरासिटी कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स' के समर-अहमद अलब्रेष्ट-महमूद ने कहा, "बाजार के मौजूदा रुझानों से स्पष्ट है कि जर्मन कंपनियों को लेकर अमेरिकी निवेशकों की दिलचस्पी अब भी बनी हुई है.”

उन्होंने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि जर्मनी की कंपनियां, खासकर औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र की, अब भी निवेशकों के लिए आकर्षक हैं. इसकी वजह यह है कि "इनमें से कई कंपनियां अपने काम में माहिर हैं, ग्राहकों से इनके मजबूत रिश्ते हैं और इनके पास बेहतरीन तकनीकी समझ है. ज्यादातर मामलों में, ये ऐसे कारोबार हैं जिन्होंने दशकों की मेहनत से अपने खास क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है.” जर्मनी की मझोली कंपनियों को यहां के अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है.

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अलब्रेष्ट-महमूद ने कहा कि जर्मनी के कई कारोबारी अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जब वे अपना कारोबार बेचने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि "अक्सर ऐसे परिवार में कारोबार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कोई उत्तराधिकारी नहीं होता.”

उन्होंने कहा, "इस वजह से बाजार में ऐसी कंपनियां आ रही हैं, जो शायद कुछ साल पहले बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं थीं.”

इस साल हुए कुछ प्रमुख अधिग्रहणों में ‘ईबीएम-पाप्स्ट' शामिल है. मुल्फिंगेन स्थित यह कंपनी इलेक्ट्रिक मोटर और पंखे बनाती है, जिसे अगस्त में अमेरिकी कंपनी ‘मैडिसन एयर' ने 5.4 अरब डॉलर में खरीद लिया.

जून में, ऑग्सबुर्ग स्थित पुरानी कंपनी एवरलेंस, जिसे पहले ‘मैन एनर्जी सॉल्यूशन' के नाम से जाना जाता था, उसे बेन कैपिटल को बेच दिया गया. इस अमेरिकी निवेश कंपनी ने इसमें 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की.

अधिग्रहण कम, लेकिन ज्यादा निवेश

जर्मनी के मिटेलश्टांड यानी मझोले आकार की और पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनियों की जानकारी देने वाले नेटवर्क ‘डी डॉयचे विर्टशाफ्ट (डीडीडब्ल्यू)' के मुताबिक, किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के पास सबसे ज्यादा जर्मन कंपनियों का स्वामित्व है. ‘विदेशी स्वामित्व वाली जर्मन कंपनियां' डेटाबेस में दर्ज कुल 7,861 कंपनियों में से 1,750 पर फिलहाल अमेरिकी निवेशकों का मालिकाना हक है.

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दुनिया की प्रमुख ऑडिट और परामर्श कंपनियों में से एक ‘प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी)' ने भी जर्मन कंपनियों को खरीदने में अमेरिकी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी की ओर ध्यान दिलाया है. ‘डेस्टिनेशन जर्मनी' नाम की अपनी रिपोर्ट में पीडब्ल्यूसी ने कहा कि अधिग्रहण और कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने के सौदों की संख्या तो नहीं बढ़ी है, लेकिन इन सौदों में लगाई जाने वाली रकम में काफी इजाफा हुआ है.

रिपोर्ट में खास तौर पर अमेरिकी निवेश कंपनी ‘कार्लाइल' और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (क्यूआईए) की साझेदारी में ‘बीएएसएफ कोटिंग्स' का अधिग्रहण करीब 7.7 अरब यूरो में होने के सौदे का जिक्र किया गया. यह सौदा 26 अक्टूबर 2025 को तय हुआ था और इस साल 30 जून को पूरा हुआ.

सुधारों का इंतजार

जर्मनी में ‘अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स' के हालिया सर्वे के मुताबिक, वहां काम कर रही करीब 62 फीसदी अमेरिकी कंपनियों को उम्मीद है कि अगले तीन से चार वर्षों में कारोबारी हालात बेहतर होंगे. वहीं, लगभग 52 फीसदी कंपनियां जर्मनी में अपना कारोबार बढ़ाने की योजना बना रही हैं. 2024 में ऐसी कंपनियों की संख्या 49 फीसदी थी.

पहली नजर में, अमेरिकी कंपनियों की ओर से जर्मनी में अधिग्रहण और हिस्सेदारी खरीदने के सौदों में बढ़ोतरी, पिछले साल अमेरिका से जर्मनी में निवेश घटने के आंकड़ों से मेल नहीं खाती.

जर्मनी के केंद्रीय बैंक ‘बुंडेसबांक' के मुताबिक, 2025 में अमेरिका से जर्मनी में पिछले साल के मुकाबले काफी कम निवेश पूंजी आई. वहीं, जर्मनी में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोतरी हुई है. यह 2024 में 57.4 अरब यूरो था, जो 2025 में बढ़कर 86.1 अरब यूरो हो गया. हालांकि, अमेरिका से आया निवेश केवल 11.8 अरब यूरो रहा, जो 2024 के मुकाबले लगभग 44 फीसदी कम है. इसके विपरीत, यूनाइटेड किंगडम से आने वाला निवेश बढ़कर लगभग 26 अरब यूरो हो गया.

इस पूरे मामले पर अलब्रेष्ट-महमूद कहते हैं, "मेरे हिसाब से यह रुझान जारी है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर साल सौदों की संख्या जरूर बढ़ेगी. जर्मनी की अच्छी औद्योगिक कंपनियों, खासकर मिटेलश्टांड की मजबूत कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी अब भी काफी ज्यादा है.”

वह आगे कहते हैं, "कंपनियों की अपेक्षाकृत कम कीमतें भी इसकी एक वजह है. अमेरिका की तुलना में जर्मनी में अब भी ऐसी कंपनियां हैं, जिनकी कीमत कम आंकी जाती है, खासकर छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में. इससे विदेशी खरीदारों के लिए इन कंपनियों को खरीदना काफी आकर्षक हो जाता है.”


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