मध्य पूर्व में जंग तेज़: ट्रंप का सख़्त अल्टीमेटम
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि संघर्ष लंबा चल सकता है

"एपिक फ़्यूरी" ऑपरेशन: 24 घंटे में 1,000 ठिकाने तबाह
- ईरान को चेतावनी: ट्रंप बोले– सत्ता बदलो या मौत झेलो
- ब्रिटेन-फ्रांस-जर्मनी का संयुक्त बयान: ईरान पर कड़ी आलोचना
- ट्रंप का स्वीकार: संघर्ष लंबा चलेगा, और जानें जा सकती हैं
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि संघर्ष लंबा चल सकता है और इसमें और अमेरिकी नागरिकों की जानें जा सकती हैं।
एक वीडियो संदेश में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का सैन्य अभियान "पूरी ताक़त के साथ जारी है" और तब तक रुकेगा नहीं जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। उन्होंने स्वीकार किया कि "दुर्भाग्य से संभव है कि और अमेरिकी लोगों की जानें जाएं," लेकिन इसे युद्ध की वास्तविकता बताया।
ट्रंप ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सैन्य पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हमले नहीं रुके तो उन्हें "आने वाली मौत के लिए तैयार रहना होगा।" उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए ईरानी जनता से अपील की कि वे "साहस दिखाएं, वीर बनें और अपना देश वापस लें।"
इस बीच ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान की आलोचना की है। तीनों देशों ने कहा कि वे मध्य पूर्व में अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि ऑपरेशन "एपिक फ़्यूरी" के पहले 24 घंटों में ईरान के 1,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों में स्टील्थ बमवर्षक विमान, ड्रोन, लड़ाकू जेट और एंटी-मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। निशाना बनाए गए ठिकानों में कमांड और कंट्रोल सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने और आईआरजीसी का संयुक्त मुख्यालय शामिल था।


