दो राज्यों में मतदान जारी, जर्मन सरकार पर बढ़ सकता है दबाव
जर्मनी में राजधानी बर्लिन और मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान जारी है.

जर्मनी में राजधानी बर्लिन और मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान जारी है. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व वाली सीडीयू पार्टी का प्रदर्शन बुरा रहा तो तो संघीय सरकार पर दबाव बढ़ेगा.
जर्मनी के दो राज्यों - बर्लिन और मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया की विधानसभाओं के लिए 20 सितंबर को मतदान जारी है. भले ही ये क्षेत्रीय चुनाव हैं, लेकिन इनका असर पूरे देश पर पड़ सकता है. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की लोकप्रियता हाल के हफ्तों में बहुत गिर गई है, और वे अपनी कुर्सी बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.
उनकी इस स्थिति के पीछे कई वजहें हैं, लेकिन हाल में सबसे बड़ा झटका था एक अन्य जर्मन राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में उनकी सेंटर-राइट पार्टी 'क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन (सीडीयू)' की हार. 6 सितंबर को हुए मतदान के बाद यहां धुर-दक्षिणपंथी 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी)' करीब 44 फीसदी वोट लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
फिलहाल बर्लिन में मुकाबला सत्ताधारी सीडीयू और वामपंथी पार्टी 'डी लिंके' के बीच बराबरी पर अटका हुआ है. एएफडी बर्लिन में लगातार तीसरे स्थान पर चल रही है. बर्लिन, जर्मनी की राजधानी भी है और देश के 16 राज्यों में से एक है.
उत्तर-पूर्वी राज्य मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में मुकाबला सत्ताधारी सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी (एसपीडी) और एएफडी के बीच है. एसपीडी 37 फीसदी के साथ टॉप पर जरूर है, लेकिन एएफडी भी सिर्फ 1 फीसदी पीछे है.
बर्लिन विधानसभा चुनाव में पार्टियों की स्थिति
बर्लिन में कुल 17 पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं. सीडीयू और डी लिंके के अलावा चार अन्य बड़ी पार्टियां हैं - लगातार तीसरे स्थान पर रही एएफडी, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी, एसपीडी और वामपंथी लोक-लुभावनवादी पार्टी सारा वागनक्नेष्ट अलायंस (बीएसडब्ल्यू). अब तक चुनाव अभियान में डी लिंके और चांसलर मैर्त्स की सीडीयू के बीच सीधा मुकाबला है. ताजा सर्वे में दोनों को करीब 20-23 फीसदी समर्थन हासिल है.
जर्मन राजधानी बर्लिन, आवास की गंभीर कमी से जूझ रही है. यह ऐसा शहर है जहां 85 फीसदी लोग किराए के घरों में रहते हैं. इसलिए मकान और किराए का खर्च मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता है. 2014 के बाद से विज्ञापित किराए दोगुने हो गए हैं. 2040 तक शहर को 2,11,000 और घरों की जरूरत है.
अब तक लेफ्ट पार्टी ही एकमात्र बड़ी पार्टी रही है, जिसने 2021 में हुए एक जनमत संग्रह पर कार्रवाई का वादा किया है. उस जनमत संग्रह में बर्लिन के 59 फीसदी निवासियों ने किराए संतुलित रखने के लिए सरकार से सबसे बड़े मकान मालिकों के अपार्टमेंट अपने नियंत्रण में लेने के पक्ष में वोट दिया था.
डी लिंके की एलिफ एराल्प पहली बार अपनी पार्टी की मुख्य उम्मीदवार के तौर पर दल का नेतृत्व कर रही हैं. उनका जन्म म्यूनिख में एक तुर्क दंपति के घर हुआ था. उनकी तुलना न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से की जा रही है, जिन्होंने शहर के लोगों के लिए अफोर्डेबिलिटी के एजेंडे यानी चीजें खरीद पाने के सामर्थ्य के आसपास अभियान चलाकर न्यूयॉर्क शहर प्रशासन का सबसे बड़ा पद हासिल किया.
बर्लिन के मौजूदा मुख्यमंत्री काई वेगनर के दौड़ से हटने के बाद श्टेफान एवर्स सीडीयू के मुख्य उम्मीदवार हैं. वे बर्लिन के मौजूदा वित्त मंत्री हैं और एक जाना-पहचाना नाम भी. एएफडी के लिए बर्लिन का आवासीय संकट इमिग्रेशन पर पाबंदी लगाने की उसकी दलील को और मजबूत करता है. इन मुद्दों के चलते शहर में एएफडी का समर्थन बढ़ा है.
मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी ताकतवर
मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया, जर्मनी का सबसे कम आमदनी और सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है. यह इलाका पहले पूर्वी जर्मनी का हिस्सा था. 1990 में एकीकरण के बाद से यहां दो बार सीडीयू की सरकार रही, और 1998 से लगातार एसपीडी की अगुवाई में सरकारें चल रही हैं. मौजूदा मुख्यमंत्री मानुएला श्वेजिष एक चर्चित राजनेता हैं और अपने राज्य में मुख्यमंत्री पद की सबसे पसंदीदा उम्मीदवार हैं. धुर-दक्षिणपंथी एएफडी के लिए राज्य में समर्थन बढ़ा है. बीते हफ्ते तक एएफडी लीड में थी, लेकिन ताजा सर्वे में 37 फीसदी समर्थन हासिल करने वाली एसपीडी अब 1 फीसदी आगे निकल गई है.
लाइफ-एरिक होल्म राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए एएफडी के उम्मीदवार हैं. वे पार्टी के संस्थापकों में से एक हैं. अगर एएफडी मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में सबसे आगे भी निकल आती है, तब भी यह तय नहीं है कि वह राज्य में सरकार चला पाएगी. जर्मनी की संसदीय व्यवस्था में मुख्यमंत्री चुनने के लिए किसी पार्टी को राज्य विधानसभा में बहुमत चाहिए, या फिर गठबंधन सहयोगियों की जरूरत होती है. यानी अगर दूसरी पार्टियां तथाकथित "फायरवॉल" नीति के तहत एएफडी के साथ सहयोग करने से इनकार कर देती हैं, तो एएफडी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी.


