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ईरानी तेल व्यापार को लेकर अमेरिका का एक्शन, चीन की रिफाइनरी पर लगाया प्रतिबंध

अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है।

ईरानी तेल व्यापार को लेकर अमेरिका का एक्शन, चीन की रिफाइनरी पर लगाया प्रतिबंध
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चीन की हेंगली रिफाइनरी पर अमेरिकी प्रतिबंध

  • ईरान की “शैडो फ्लीट” के 40 जहाज निशाने पर
  • तेहरान की तेल कमाई रोकने की अमेरिकी रणनीति
  • कार्यकारी आदेश 13902 के तहत सख्त कार्रवाई

वाशिंगटन। अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है।

ट्रेजरी विभाग ने कहा कि उसके 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) ने 'हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड' को निशाना बनाया है। विभाग के अनुसार, यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वालों में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, "आर्थिक सख्ती ईरानी शासन पर वित्तीय शिकंजा कस रही है, मध्य पूर्व में उसकी आक्रामकता को रोक रही है, और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाने में मदद कर रही है।"

इस कार्रवाई में करीब 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों को भी निशाना बनाया गया है, जो ईरान के तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माने जाते हैं। अमेरिका का कहना है कि ये जहाज तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाते हैं, जिससे ईरान सरकार को पैसा मिलता है।

स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका आगे भी उन जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों पर कार्रवाई करता रहेगा, जो ईरान का तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति या जहाज इस काम में शामिल होगा, उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रेजरी अधिकारियों ने बताया कि चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें "टीपॉट्स" के नाम से जाना जाता है, ईरान के कच्चे तेल का अधिकांश हिस्सा खरीदती हैं। इनमें हेंगली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, जिसने ईरान से अरबों डॉलर का तेल खरीदा है।

बयान में कहा गया है कि हेंगली ने 'सेपेहर एनर्जी जहान नामा पार्स कंपनी' के ज़रिए प्रतिबंधित जहाजों और ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ से जुड़े शिपमेंट प्राप्त किए हैं, जिससे "ईरानी सेना के लिए करोड़ों डॉलर का राजस्व" उत्पन्न हुआ है।

इसके अलावा, अमेरिका ने 19 और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर आरोप है कि ये जहाज ईरान का कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाते थे। ये जहाज पनामा, हांगकांग और बारबाडोस जैसे देशों के झंडे के तहत चल रहे थे।

कुछ जहाजों ने ईरान का तेल चीन पहुंचाया, जबकि कुछ ने संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश तक माल पहुंचाया। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, ये जहाज कई बार समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करते थे, ताकि तेल का असली स्रोत छिपाया जा सके।

यह कार्रवाई 'कार्यकारी आदेश 13902' के तहत की गई, जो ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों को निशाना बनाता है। यह तेहरान के तेल निर्यात और वित्तीय नेटवर्क पर आर्थिक दबाव डालने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है। ट्रेजरी विभाग ने बताया कि फरवरी 2025 से, इस अभियान के तहत उसने ईरान से जुड़े 1,000 से ज्यादा व्यक्तियों, संस्थाओं, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिकी कानून के तहत जिन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, उनकी अमेरिका में मौजूद संपत्ति को फ्रीज कर दिया जाता है। अमेरिकी नागरिकों के लिए उनके साथ लेन-देन करना आम तौर पर प्रतिबंधित होता है। इसके अलावा, जो विदेशी कंपनियां ऐसे कारोबार में मदद करती हैं, उन्हें भी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

वित्त विभाग ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने पर सिविल या आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, ऐसे लेन-देन में शामिल बैंक और अन्य संस्थाएं भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं।


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