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रूसी तेल पर 100% टैरिफ के बीच अमेरिका की बड़ी घोषणा: रुबियो बोले- 'सहयोगी देशों की ऊर्जा सुरक्षा में मदद को तैयार'

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े हालिया कानून के बीच अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी।

रूसी तेल पर 100% टैरिफ के बीच अमेरिका की बड़ी घोषणा: रुबियो बोले- सहयोगी देशों की ऊर्जा सुरक्षा में मदद को तैयार
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न्यूयॉर्क। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े हालिया कानून के बीच अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि बुधवार को रुबियो के साथ हुई मुलाकात में उन्होंने प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया।

जयशंकर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट पर बताया कि उन्होंने ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट (एसआरआईए) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को एक बार फिर सामने रखा।

बैठक के बारे में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि रुबियो और जयशंकर ने उन प्रतिबंधों पर चर्चा की, जो रूस और ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर लगाए जा सकते हैं।

विदेश विभाग ने कहा, "विदेश मंत्री रुबियो ने जोर दिया कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदार देशों को ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने की अच्छी स्थिति में है।" हालांकि, उन्‍होंने यह विस्तार से नहीं बताया कि यह मदद किस तरह दी जाएगी या इसके लिए क्या व्यवस्था होगी।

अगर यह टैरिफ लागू किया जाता है, तो इसका असर अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। साथ ही यह भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौते की बातचीत में भी रुकावट बन सकता है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने कहा क‍ि इस कानून में राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। इससे वह जरूरत के हिसाब से अलग-अलग मामलों में छूट दे सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति इस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह फैसला उन्हें ही करना है और इसकी घोषणा भी वही करेंगे।

रुबियो ने कहा, "अब राष्ट्रपति के पास एक ऐसा साधन है, जिसका इस्तेमाल वह सिर्फ रूस-यूक्रेन संघर्ष पर असर डालने के लिए ही नहीं, बल्कि ईरान से जुड़े मामलों में भी कर सकते हैं।"

भारत के लिए ईरान के मुकाबले रूस के साथ व्यापारिक संबंध कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। रूस भारत को तेल और रक्षा उपकरण सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है।

भारत ने 2019 में ईरान से तेल की खरीद काफी कम कर दी थी। ईरान को भारत का निर्यात भी मुख्य रूप से चावल, खाने-पीने के सामान और दवाओं तक सीमित रहा है। मानवीय आधार पर इन सामानों को प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है।

र‍िपोर्ट के मुताबिक, इस साल की पहली छमाही में ईरान को भारत का निर्यात सिर्फ करीब 40 करोड़ डॉलर का था। अब इसके रुकने की आशंका है, क्योंकि यह व्यापार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रास्ते किया जा रहा था और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की वजह से यह रास्ता बंद हो गया है।

इसी अवधि में छूट के तहत भारत का ईरान से तेल और गैस आयात करीब 70 करोड़ डॉलर का था। इसके मुकाबले भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी तेल की भूमिका कहीं ज्यादा बड़ी है। रूस के कुल तेल निर्यात का करीब 37 प्रतिशत भारत खरीदता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अलग से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। उस समय चीन पर ऐसा टैरिफ नहीं लगाया गया था, जबकि लेख के मुताबिक चीन ने ज्यादा रूसी तेल खरीदा था। हालांकि, ट्रंप ने इस टैरिफ को बाद में फरवरी में हटा दिया था।



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