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अमेरिका में H-1B वीजा विस्तार के नियमों में बदलाव की तैयारी, भारतीय IT पेशेवरों पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी सहित अन्य कुशल विदेशी कर्मचारियों के वीजा विस्तार के मामलों में पहले दी गई मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, एच-1बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों सहित कुछ श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों के कार्य परमिट का स्वत: नवीनीकरण समाप्त करने वाले नियम को अंतिम रूप दे दिया गया है।

अमेरिका में H-1B वीजा विस्तार के नियमों में बदलाव की तैयारी, भारतीय IT पेशेवरों पर पड़ेगा असर
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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी सहित अन्य कुशल विदेशी कर्मचारियों के वीजा विस्तार के मामलों में पहले दी गई मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, एच-1बी वीजा धारकों के जीवनसाथियों सहित कुछ श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों के कार्य परमिट का स्वत: नवीनीकरण समाप्त करने वाले नियम को अंतिम रूप दे दिया गया है।

अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) की ओर से जारी दोनों उपाय मंगलवार को संघीय रजिस्टर में सार्वजनिक निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए। इन्हें बुधवार को प्रकाशित किया जाना निर्धारित है। भारतीय नागरिक एच-1बी वीजा धारकों और एच-4 श्रेणी के उन जीवनसाथियों में बड़ी संख्या में शामिल हैं, जिनके पास काम करने की अनुमति है। ऐसे में इन बदलावों का उन पर खास असर पड़ने की आशंका है।

पहला उपाय एक प्रस्तावित नियम है। इसके तहत गृह सुरक्षा विभाग ने संघीय नियमावली की धारा 8 सीएफआर 214.1(सी)(5) को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रावधान के तहत, यदि पहले मंजूर किए गए मामले के तथ्य नहीं बदले हैं, तो अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा आम तौर पर रोजगार या देश में रहने की अवधि बढ़ाने के अनुरोध पर विचार करते समय पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देती है।

यह प्रावधान एच-1बी और एल-1 वीजा जैसे श्रेणियों के कर्मचारियों के विस्तार संबंधी आवेदनों पर लागू होता है। इसे दिसंबर 2024 में जोड़े गए नियम के तहत औपचारिक रूप दिया गया था, जो जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के अंतिम सप्ताहों में प्रकाशित हुआ था। गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव से नियमों को संबंधित कानून के अनुरूप बनाया जा सकेगा। कानून के अनुसार, आव्रजन संबंधी लाभों के लिए पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता, आवेदक या लाभार्थी की होती है।

विभाग ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति के कारण पिछली मंजूरी से अलग निर्णय लेने का औचित्य साबित करने की जिम्मेदारी प्रभावी रूप से आवेदक से हटकर यूएससीआईएस अधिकारी पर आ जाती है। विभाग के अनुसार, इससे पहले दी गई गलत मंजूरियां जारी रहने और धोखाधड़ी या आधारहीन आवेदनों का पता लगने की संभावना कम होने का जोखिम पैदा हो सकता है।

गृह सुरक्षा विभाग ने अपने प्रस्ताव के समर्थन में यूएससीआईएस के स्थल निरीक्षण से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया है। विभाग के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से 2025 के दौरान एच-1बी विस्तार से जुड़े जिन मामलों में स्थल निरीक्षण किया गया, उनमें नियमों के अनुपालन में कमी और/या धोखाधड़ी की संयुक्त दर 22.39 प्रतिशत रही। इस अवधि में पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति लागू थी। वहीं, वित्त वर्ष 2018 से 2020 के दौरान, जब ऐसी नीति लागू नहीं थी, यह दर 16.77 प्रतिशत थी।

एल-1ए वीजा विस्तार के मामलों में वित्त वर्ष 2022 से 2025 के दौरान यह दर 24.46 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2018 से 2020 के बीच यह 18.37 प्रतिशत थी। प्रस्ताव में दिए गए यूएससीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022 से 2025 के दौरान हर साल औसतन 2,08,429 विस्तार याचिकाएं ऐसी थीं, जिन पर सामान्य तौर पर पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने का प्रावधान लागू होता था। यह हर साल दाखिल होने वाली कुल 6,88,830 याचिकाओं का लगभग 30 प्रतिशत है। प्रस्तावित नियम प्रकाशित होने के बाद आम जनता को इस पर अपनी राय और सुझाव देने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा।

दूसरा उपाय एक अंतिम नियम है, जो 30 अक्टूबर 2025 को गृह सुरक्षा विभाग की ओर से जारी अंतरिम नियम की पुष्टि करता है और उसे अंतिम रूप देता है। इस नियम के तहत कुछ श्रेणियों में समय पर नवीनीकरण आवेदन दाखिल करने वाले लोगों के रोजगार प्राधिकरण दस्तावेजों (ईएडी) की वैधता स्वतः बढ़ाने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी।



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