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यूएन महासचिव की अपील नस्लवाद मिटाने के लिए दुनिया आए एकजुट

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर में बढ़ते नस्लवाद को लेकर चिंता जताई है और इसे खत्म करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की है

यूएन महासचिव की अपील नस्लवाद मिटाने के लिए दुनिया आए एकजुट
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गुटेरेस बोले नस्लवाद हर समाज और देश में मौजूद

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नफरत फैलने से बढ़ा खतरा
  • डरबन घोषणा को 25 साल पूरे नस्लवाद खत्म करने पर जोर

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर में बढ़ते नस्लवाद को लेकर चिंता जताई है और इसे खत्म करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नस्लवाद एक पुरानी बुराई है, जो आज भी हर समाज, हर देश और हर क्षेत्र में मौजूद है।

21 मार्च को हर साल मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस’ के मौके पर अपने संदेश में गुटेरेस ने कहा कि नस्लवाद की जड़ें उपनिवेशवाद, गुलामी और दमन के इतिहास में हैं। यही कारण है कि आज भी दुनिया में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक असमानता, भेदभावपूर्ण नीतियां और कई संघर्ष देखने को मिलते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी नफरत तेजी से फैल रही है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर नफरत भरी भाषा, झूठी बातें और गलत धारणाएं फैलती हैं, जो कई बार वास्तविक हिंसा और दुर्व्यवहार का रूप ले लेती हैं।

गुटेरेस ने कहा कि इसका सबसे बड़ा समाधान एकता और ठोस कार्रवाई है। उन्होंने सभी सरकारों, संस्थाओं, कंपनियों और समाज के लोगों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि हर व्यक्ति को सम्मान, न्याय, समानता और मानवाधिकार मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों को नस्लीय भेदभाव खत्म करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पूरी तरह लागू करना चाहिए और ‘डरबन घोषणा और कार्य योजना’ के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जो नस्लवाद और इससे जुड़े भेदभाव को खत्म करने के लिए ठोस कदम सुझाती है। ‘डरबन घोषणा और कार्य योजना’ को अब 25 साल पूरे हो रहे हैं। इसमें नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, जेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति नफ़रत) और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए ठोस कदम शामिल हैं।

गुटेरेस ने अंत में कहा कि हमें हर दिन नस्लवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा। हमें दुनिया के हर व्यक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करनी है और इस बुराई को जड़ से खत्म करना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1966 में इस दिवस की शुरुआत की थी, ताकि नस्लीय भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और पूरी दुनिया में इसके खिलाफ कार्रवाई को प्रोत्साहित किया जा सके।


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