Top
Begin typing your search above and press return to search.

रूसी युद्ध के खिलाफ यूक्रेनी हौसला पांचवें साल में भी बरकरार

रूसी हमलों ने यूक्रेनियों के लिए पहले से ही सख्त सर्दियों को और भी मुश्किल बना दिया है. फिर भी, चार साल की जंग के बावजूद ज्यादातर यूक्रेनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं

रूसी युद्ध के खिलाफ यूक्रेनी हौसला पांचवें साल में भी बरकरार
X

रूसी हमलों ने यूक्रेनियों के लिए पहले से ही सख्त सर्दियों को और भी मुश्किल बना दिया है. फिर भी, चार साल की जंग के बावजूद ज्यादातर यूक्रेनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

फरवरी की शुरुआत में कीव इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी (केआईआईएस) ने एक सर्वे प्रकाशित किया, जिसमें यूक्रेनियों के जंग के प्रति नजरिये को परखा गया. यह सर्वे जनवरी के आखिरी दिनों में हुआ, जब यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर रूसी हमलों से पूरे देश में बिजली गुल हो गयी थी और हीटिंग व पानी की सप्लाई बाधित हुई थी, खास तौर पर यूक्रेन की राजधानी कीव में. ये हमले ऐसे वक्त में हो रहे थे जब तापमान माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था.

केआईआईएस सर्वे में पाया गया कि 88 फीसदी लोगों का मानना था कि यूक्रेन की ऊर्जा व्यवस्था पर रूस के हमलों का मकसद देश को हथियार डालने पर मजबूर करना है. इसके बावजूद, 65 फीसदी लोगों ने कहा कि वे हालात को जितने वक्त तक जरूरी हो, उतने वक्त तक झेलने को तैयार हैं. इससे पहले सितंबर और दिसंबर 2025 में करीब 62 फीसद लोगों ने यही बात कही थी.

कीव की रहने वाली जूलिया ने डीडब्ल्यू को बताया, "इस जनवरी ने मुझे और ज्यादा दृढ़ या गुस्सैल नहीं बनाया, क्योंकि 2022 से ही मैं बेहद कठोर और गुस्से में हूं," वह बस इसे "एक बेहद मुश्किल जंग का एक नया चरण" बताती हैं, "जिसे हम किसी न किसी तरह जीतेंगे."

जूलिया के पति 2024 से मोर्चे पर तैनात हैं और जूलिया अपनी बेटी के साथ कीव में रहती हैं. वह कहती हैं, "मेरा गुस्सा मुझे मजबूत बने रहने में मदद करता है, लेकिन इसके साथ ये एहसास भी है कि कोई और विकल्प है ही नहीं. मजबूती से टिके रहने के अलावा कोई भी और रास्ता इससे कहीं ज्यादा बुरा होगा."

इंसाफ और जिंदा रहने की जद्दोजहद

केआईआईएस के प्रमुख आंतोन ह्रुशचेस्त्स्की के मुताबिक, लोगों के हौसले को मजबूत करने वाले सबसे अहम कारणों में एक यह समझ है कि रूस की जंग यूक्रेन के खिलाफ अस्तित्व की जंग है. उनके मुताबिक यूक्रेनियों के लिए यह जंग सिर्फ इंसाफ की नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की है. वे कहते हैं, "यूक्रेनी हौसला अभी भी मजबूत है. भले ही लोग थक चुके हों और मुश्किल समझौतों के लिये तैयार हों, लेकिन वे कुछ 'रेड लाइंस' लांघने के लिये तैयार नहीं हैं."

उन्होंने कहा कि आम यूक्रेनियों की रोजमर्रा की जिंदगी को असहनीय बनाने की रूसी कोशिशों ने इस सोच को नहीं बदला है. यूक्रेनियों ने इस मुश्किल हालात को "चोलोदमोर" यानी "ठंड से हत्या" कहना शुरू कर दिया है. यह शब्द "होलोदमोर" से लिया गया है, जिसका मतलब है "भूख से मौत" और जो 1932–33 में सोवियत यूक्रेन में स्टालिन शासन द्वारा उत्पन्न कृत्रिम अकाल के लिये इस्तेमाल होता है.

मनोवैज्ञानिक कातारीना कुर्द्शिन्स्का कहती हैं कि लगातार जंग का तनाव यूक्रेनियों को थका चुका है. उनका मानना है कि यूक्रेनियों का हौसला इस बात से भी आता है कि वे और कोई नुकसान नहीं सहना चाहते, क्योंकि वे पहले ही बहुत कुछ गंवा चुके हैं. वह कहती हैं, "इसका असर शरीर, नसों और मानसिक स्थिति पर पड़ता है."

यूक्रेनी अपना देश फिर से बसाना चाहते हैं

कीव की एक छात्रा नतालिया ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "हम डटे रहना चाहते हैं, क्योंकि अगर हमने हार मानी तो रूसी नेतृत्व के तहत हालात बहुत खराब होंगे." वह राजधानी के इंडिपेंडेंस स्क्वायर पर उनके दिवंगत पिता की याद में बने अस्थायी स्मारक पर एक छोटा झंडा लगाने आई हैं. उनके पिता हाल ही में डोनेत्स्क इलाके में मारे गए थे.

युद्ध की शुरुआत में देश छोड़कर बाहर गयी नतालिया बाद में लौट आईं. कभी‑कभी पिता का दुख, मुश्किल हालात और पूरे देश की स्थिति उन्हें बहुत भारी लगते हैं. उन्होंने कहा, "मुझे इस बात से शक्ति मिलती है कि मैं अपने पिता के लिये जी रही हूं, जो जिंदा रहना चाहते थे और अपने परिवार के साथ भविष्य बनाना चाहते थे." नतालिया कहती हैं, "मैं उनके लिए हार नहीं मान सकती. यूक्रेन मेरा घर है, मैं यहां से जाना नहीं चाहती. मैं अपना देश फिर से बनाना चाहती हैं."

कीव की एक और निवासी ओल्हा भी हालात झेल रही हैं. दो साल के बच्चे की मां ओल्हा ने कहा, "मैं अपने बच्चे का हाथ पकड़कर यहां से चली नहीं जा सकती. यह मेरे पति के साथ गद्दारी होगी, जो जंग में लड़ रहे हैं." ओल्हा के पति रूसी हमले की शुरुआत में ही यूक्रेन की रक्षा के लिये वॉलंटियर बन गये थे और फिलहाल पोक्रोव्स्क क्षेत्र में तैनात हैं. वे बहुत कम घर आते हैं. ओल्हा अपने बेटे की परवरिश करती हैं और पार्ट‑टाइम काम भी करती हैं. उन्होंने कहा कि बीते चार साल में रूस कोई खास सैन्य सफलता हासिल नहीं कर पाया, इसकी वजह से उन्हें लगता है कि सारे यूक्रेनी उम्मीद बनाए हुए हैं कि अंत में सब ठीक होगा.

थके हुए लेकिन दृढ़ सैनिक

चार साल पहले सेरही* एक मेडिक के तौर पर यूक्रेनी सशस्त्र बलों में वॉलंटियर बनकर शामिल हुए थे. उन्होंने बताया कि फाइटरों का हौसला और इच्छाशक्ति कम हो रही है क्योंकि तैनाती का कोई निश्चित समय नहीं है, डिमोबिलाइजेशन मुश्किल है और उन सैनिकों के लिए वित्तीय इंतजाम भी ठीक नहीं जो मोर्चे पर तैनात नहीं हैं.

किरिलो यूक्रेनी थल सेना में टेलीकम्युनिकेशन विशेषज्ञ हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि उनके साथी अब आराम ना मिलने के हालात को स्वीकार कर चुके हैं. वह कहते हैं, "हम इतने ढल चुके हैं कि आपको याद भी नहीं रहता कि पहले जिंदगी कैसी थी. अगर आपके कोई भविष्य के प्लान थे, अब नहीं रहे. यह निराशावाद नहीं है. यह कुछ ऐसा है कि 'जो होगा देखा जाएगा.' यह एक तरह की स्वीकार्यता है, निराशा नहीं."

किरिलो ने बताया कि सेना में अगर माहौल तनावपूर्ण है तो वह सरकारी भ्रष्टाचार के स्कैंडल और रक्षा उद्योग की धनराशि के दुरुपयोग के मामलों की वजह से है. ऐसी बातें उन्हें और उनके साथियों को ठगा हुआ महसूस कराती हैं. वह कहते हैं, "जब मेरी प्रेरणा कमजोर पड़ती है तो मेरे पास सिर्फ अनुशासन रह जाता है और यह एहसास कि अगर हमने डटे रहकर लड़ाई नहीं लड़ी तो यूक्रेन, यह कौम, यह पहचान शायद अस्तित्व में ही न रहे."

यूक्रेनी ड्रोन रेजीमेंट में सेवा दे रहे मोस ने कहा कि उन्हें भी बर्नआउट और उदासी का सामना करना पड़ता है. लेकिन यह समझना कि मुकाबले के अलावा कोई विकल्प है ही नहीं, उन्हें फिर से प्रेरित करता है. ह्रुशेत्स्की का मानना है कि जंग के पांचवें साल में भी लड़ते रहने की यूक्रेनियों की क्षमता इस भरोसे पर भी टिकी है कि यूरोपीय साझेदार मदद जारी रखें. वह कहते हैं, "वर्तमान मुश्किलों को भविष्य में निवेश के तौर पर देखा जा रहा है… हमारे ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि 60 फीसदी से ज्यादा (यूक्रेनी) आशावादी हूं और मानते हैं कि दस साल में यूक्रेन यूरोपीय संघ का खुशहाल सदस्य होगा."

इस रिपोर्ट में जिन तीन सैनिकों का जिक्र किया गया है, उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिये नाम बदले गए हैं.


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it