Top
Begin typing your search above and press return to search.

क्यूबा से खतरे पर ट्रंप का बड़ा कदम, अमेरिका में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि क्यूबा से अमेरिका को एक असामान्य और गंभीर खतरा है। उन्होंने क्यूबा सरकार से पैदा हुए खतरे को लेकर देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है

क्यूबा से खतरे पर ट्रंप का बड़ा कदम, अमेरिका में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित
X

व्हाइट हाउस आदेश: क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर लगेगा अतिरिक्त शुल्क

  • ट्रंप का आरोप– रूस-चीन से लेकर हमास-हिज़्बुल्लाह तक को क्यूबा दे रहा पनाह
  • “क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है”– ट्रंप का तीखा हमला
  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा, ट्रंप बोले– अमेरिका क्यूबा की ज्यादतियों को बर्दाश्त नहीं करेगा

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि क्यूबा से अमेरिका को एक असामान्य और गंभीर खतरा है। उन्होंने क्यूबा सरकार से पैदा हुए खतरे को लेकर देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। इसी वजह से उन्होंने एक नई शुल्क (टैरिफ) व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है। इस व्यवस्था के तहत उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है, जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं।

व्हाइट हाउस में साइन किए गए कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि क्यूबा सरकार की नीतियां और उसके कामकाज अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा हैं। इसलिए मौजूदा कानूनों के तहत आपात कदम उठाना जरूरी हो गया है।

ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति होने के नाते देश की सुरक्षा और विदेश नीति की रक्षा करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा से जुड़ी स्थिति अमेरिका के लिए एक असामान्य और बड़ा खतरा है, जिसका स्रोत काफी हद तक अमेरिका के बाहर है।

आदेश में आरोप लगाया गया है कि क्यूबा कई ऐसे देशों और संगठनों का समर्थन करता है, जो अमेरिका के खिलाफ हैं। इसमें रूस, चीन, ईरान के साथ-साथ हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों का नाम लिया गया है। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा "खुलेआम संयुक्त राज्य अमेरिका के खतरनाक दुश्मनों को पनाह देता है और उन्हें अपने इलाके में "अत्याधुनिक सैन्य और खुफिया क्षमताएं" स्थापित करने के लिए आमंत्रित करता है जो सीधे संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाती हैं।"

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि क्यूबा में रूस का सबसे बड़ा विदेशी खुफिया केंद्र काम कर रहा है और चीन के साथ भी क्यूबा की सैन्य और रक्षा संबंधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में आगे आरोप लगाया गया है कि क्यूबा हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों को पनाह देता है। इससे इन संगठनों को क्षेत्र में अपने आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा नेटवर्क मजबूत करने का मौका मिलता है, जो अमेरिका और पूरे पश्चिमी गोलार्ध की स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकता है।

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि क्यूबा लंबे समय से अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को कमजोर करने के लिए अन्य दुश्मन देशों को सैन्य और सुरक्षा मदद देता रहा है। ट्रंप ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर आतंकवाद को बढ़ावा देने, अवैध प्रवासन और हिंसा के जरिए क्षेत्र को अस्थिर करने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि क्यूबा सरकार अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करती है।

आदेश में कहा गया है, "कम्युनिस्ट सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को सताती और यातना देती है; क्यूबा के लोगों को बोलने और प्रेस की स्वतंत्रता से वंचित करती है; उनके दुख से भ्रष्ट तरीके से मुनाफा कमाती है और मानवाधिकारों का अन्य उल्लंघन करती है।" इसमें राजनीतिक कैदियों के परिवारों के खिलाफ बदले की कार्रवाई, धार्मिक लोगों को परेशान करना, नागरिक समाज पर प्रतिबंध, स्वतंत्र प्रेस पर रोक और ऑनलाइन सहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमाएं भी शामिल हैं।

ट्रंप ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका कम्युनिस्ट क्यूबा सरकार की ज्यादतियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।" उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का वादा किया, साथ ही "क्यूबा के लोगों की एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक समाज की आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध रहने" की बात कही।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार के ऐसे किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए ट्रंप ने आदेश दिया है कि एक नई शुल्क व्यवस्था बनाई जाए। इसके तहत अगर कोई विदेशी देश सीधे या परोक्ष रूप से क्यूबा को तेल बेचता या उपलब्ध कराता है, तो उसके सामान पर अमेरिका में अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जा सकता है।

आदेश के मुताबिक, वाणिज्य मंत्री विदेश मंत्री से सलाह लेकर यह तय करेंगे कि कौन सा देश क्यूबा को तेल की आपूर्ति कर रहा है, चाहे वह किसी तीसरे देश या बिचौलिए के माध्यम से ही क्यों न हो। इसके बाद विदेश मंत्री, वित्त, ट्रेजरी, वाणिज्य, होमलैंड सिक्योरिटी और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ मिलकर यह तय करेंगे कि अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जानी चाहिए या नहीं और किस हद तक लगाई जानी चाहिए।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it