ट्रंप का दावा: ईरान पूरी तरह तबाह, अब बातचीत की बारी!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत कमजोर हो चुका है और अब बातचीत चल रही है

अमेरिका की सैन्य ताकत से कांपा ईरान, ट्रंप बोले- समझौते को तैयार हैं
- ईरान की मिसाइल फैक्ट्रियाँ ध्वस्त, ट्रंप ने बताया सैन्य सफलता का राज
- बातचीत के लिए खुले दरवाज़े, लेकिन ईरान की हालत गंभीर: ट्रंप
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत कमजोर हो चुका है और अब बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने सैन्य मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। यह बातें उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत और मियामी में दिए गए एक भाषण में कहीं।
एयर फ़ोर्स वन से उतरने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “ईरान कमजोर हो रहा है। अब हम दोनों के बीच बातचीत चल रही है। वे समझौता करना चाहते हैं। हमारा सैन्य बल दुनिया में सबसे ताकतवर है।”
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान बातचीत के लिए तैयार हुआ है, हालांकि बातचीत कैसे और कब तक चलेगी, इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
मियामी में 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट' में एक अलग संबोधन में, ट्रंप ने स्थिति का अपना आकलन प्रस्तुत किया और ईरान को अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण काफी कमजोर बताया। उन्होंने कहा, "हम ईरान के हथियारों के जखीरे को खत्म कर रहे हैं, उनकी मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रियों को ऐसे स्तर पर नष्ट कर रहे हैं जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था और उनके रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं।"
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, वायुसेना पूरी तरह बेअसर हो गई है और उसकी हवाई रक्षा व संचार व्यवस्था भी टूट चुकी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं और देश का शीर्ष नेतृत्व भी अब पहले जैसा नहीं रहा।
ट्रंप ने इस पूरे अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा, “हमने चार हफ्ते पहले जो लक्ष्य तय किए थे, उन्हें तय समय से दो हफ्ते पहले पूरा कर लिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि दबाव के कारण ईरान बातचीत करने के लिए मजबूर हुआ है और वह समझौता करने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों से जोड़ा, जिसमें ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नया रूप देना शामिल है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर, मैं दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद-प्रायोजक देश को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दूंगा।"
कुल मिलाकर, ट्रंप का कहना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से ईरान कमजोर हुआ है और इसी वजह से अब बातचीत का रास्ता खुला है।


