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नेपाल में भ्रष्ट नेताओं और उनके अमीर बच्चों को मुद्दा बनाने वाली पार्टी बहुमत की ओर

नेपाल में तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी बहुमत की ओर बढ़ रही है. राजनेताओं के अमीर बच्चों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली इस पार्टी की कमान 35 साल के बालेंद्र शाह संभाल रहे हैं.

नेपाल में भ्रष्ट नेताओं और उनके अमीर बच्चों को मुद्दा बनाने वाली पार्टी बहुमत की ओर
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नेपाल में तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी बहुमत की ओर बढ़ रही है. राजनेताओं के अमीर बच्चों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली इस पार्टी की कमान 35 साल के बालेंद्र शाह संभाल रहे हैं.

  • नेपाल में परिवारवाद और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली पार्टी बहुमत की ओर
  • यूएन ने पूछा, बताओ ईरान में बच्चियों को किसने मारा
  • ईरानी नौसेना के जहाज के मामले में श्रीलंका ने कहा, हम किसी के सामने नहीं झुकेंगे
  • मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दक्षिण कोरिया से शिफ्ट कर खाड़ी पहुंचाएगा अमेरिका
  • भारतीय वायुसेना का सुखोई-30एमकेआई फाइटर क्रैश, दोनों पायलटों की मौत
  • ईरान युद्ध: सातवें दिन भी अमेरिका और इस्राएल के ताबड़तोड़ हमले
  • भारत 30 दिनों तक खरीद सकेगा रूस से कच्चा तेल, अमेरिका ने दी छूट
  • ट्रंप पर यौन अपराध का आरोप लगाने वाली एप्स्टीन फाइलें जारी
  • भारत का अपनी रिफाइनरियों को आदेश, सिर्फ घरेलू सप्लाई दो
  • कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का एलान

यूएन ने पूछा, बताओ ईरान में बच्चियों को किसने मारा

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त ने शुक्रवार, 6 मार्च को ईरान के एक स्कूल पर किए गए घातक हवाई हमले की पारदर्शी जांच की मांग की. ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हवाई हमलों के पहले ही दिन, मिनाब शहर में एक स्कूल पर हमला किया गया. इस हमले में 150 से ज्यादा छात्राओं की मौत हो गई.

ईरान का आरोप है कि यह हमला इस्राएल और अमेरिका ने किया. अभी तक अमेरिका और इस्राएल ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है. शनिवार को हुए इस हमले के बाद सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सिर्फ इतना कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय इसकी जांच कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख फोल्कर टुर्क ने अमेरिका से इसी जांच को रफ्तार तेज करने की अपील की है.

टुर्क, कई बार कड़े शब्दों में इस हमले की निंदा कर चुके हैं. शुक्रवार को भी उन्होंने जिनेवा में इस हमले की जांच का जिक्र करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि ये जल्द हो और हमें इसके लिए जवाबदेही भी तय करनी है और पीड़ितों की क्षतिपूर्ति भी करनी है."

टुर्क के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून साफ साफ कहते हैं कि स्कूल जैसे "एक नागरिक संस्थान पर कभी भी हमला नहीं किया जाना चाहिए." उन्होंने आरोप लगाया कि ये जानते हुए भी मिनाब के स्कूल पर हमला किया गया, वह भी सुबह के वक्त, जब ज्यादातर छात्राएं स्कूल में थीं.

भ्रामक सूचनाओं से मानवीय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा खतरे में

दुनियाभर में मानवीय कार्यकर्ताओं पर बढ़ते खतरों को लेकर अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज महासंघ (IFRC) ने चेतावनी दी है. गुरुवार को जारी वर्ल्ड डिजास्टर्स रिपोर्ट में संगठन ने कहा कि ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल में ऑनलाइन फैलने वाली भ्रामक और फेक सूचनाएं मानवीय सिद्धांतों, तटस्थता और निष्पक्षता को गलत तरीके से पेश कर रही हैं, जिससे लोगों का भरोसा गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है.

दुनियाभर में हमले झेल रहे हैं फैक्ट-चेकर

रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन से लेकर दक्षिण सूडान, लेबनान और बांग्लादेश तक कई उदाहरणों में फेक न्यूज और अफवाहों ने मानवीय काम को बाधित किया है. स्पेन में बाढ़ के दौरान ऑनलाइन झूठे दावों ने रेड क्रॉस के वॉलंटियर्स पर निशाना साधा, वहीं दक्षिण सूडान में जहरीला भोजन बांटने की अफवाहों ने लोगों को जीवनरक्षक सहायता लेने से रोक दिया. लेबनान में कोविड-19 और वैक्सीन से जुड़ी गलत सूचनाओं ने स्वयंसेवकों को खतरे में डाला, जबकि बांग्लादेश में राजनीतिक अशांति के बीच पक्षपात और निष्क्रियता के आरोपों ने रेड क्रॉस कर्मियों की सुरक्षा और साख को नुकसान पहुंचाया.

IFRC ने तकनीकी कंपनियों से भरोसेमंद स्रोतों की सूचनाओं को प्राथमिकता देने की अपील की है और सरकारों से सबूत आधारित नियमन में निवेश बढ़ाने को कहा है.

कतर की चेतावनी, 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है तेल

कतर ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के कारण कुछ ही हफ्तों में खाड़ी देशों से होने वाला ऊर्जा निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है. ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) के साथ बातचीत में कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा कि अगर ऊर्जा निर्यात बंद हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं.

ईरान युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम करीब 64 डॉलर प्रति बैरल था. 6 मार्च 2026 को यह करीब 84 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया.

काबी ने एफटी से कहा, "जिस किसी ने भी मजबूरन बंदी नहीं की है, हमें लगता है कि अगर ये सब इसी तरह चलता रहा तो वो भी आने वाले दिनों में ये करेंगे. खाड़ी क्षेत्र के हर निर्यातक को मजबूरन बंदी का एलान करना पड़ेगा."

काबी के मुताबिक एक बार निर्यात पूरी तरह बंद होने के बाद अगर युद्ध थम भी गया, तब भी डिलीवरी के चक्र को बहाल करने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है. ईरान युद्ध के चलते कतर ने 2 मार्च 2026 को अपना प्राकृतिक गैस उत्पादन पूरी तरह बंद करने का एलान किया.

इंडोनेशिया ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया

इंडोनेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. देश की संचार और डिजिटल मंत्री मोतिया हाफिद ने कहा कि शुक्रवार, 6 मार्च को जारी नए गाइडलाइंस के तहत नाबालिगों की सोशल मीडिया तक पहुंच निलंबित की जाएगी. सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों जैसे कि साइबरबुलिंग, पोर्नोग्राफी, धोखाधड़ी और लत से बचाने के लिए उठाया गया है.

नई नीति के अनुसार, 28 मार्च से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के उन खातों को धीरे-धीरे निष्क्रिय किया जाएगा जो "हाई-रिस्क प्लेटफॉर्म्स" पर मौजूद हैं. मंत्री ने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स में टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और रोब्लॉक्स शामिल हैं. हालांकि, सरकार ने यह साफ नहीं किया कि कंपनियों को नए नियमों का पालन करने के लिए क्या-क्या बदलाव करने होंगे. मोतिया ने यह भी माना कि शुरुआत में बच्चों और अभिभावकों को असुविधा हो सकती है.

बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर इंडोनेशिया कई देशों की उस सूची में शामिल हो गया है जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कठोर नियंत्रण लागू कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने पिछले दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के यूजर्स पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाया था, जबकि स्पेन ने भी पिछले महीने इसी तरह की घोषणा की. इंडोनेशिया का पड़ोसी मलेशिया 2026 से ऐसा प्रतिबंध लागू करने वाला. मोतिया के अनुसार, इंडोनेशिया इस तरह के कदम उठाने वाला पहला गैर-पश्चिमी देश होगा.

नेपाल में परिवारवाद और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली पार्टी बहुमत की ओर

रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह की तीन साल पुरानी पार्टी नेपाल में दो तिहाई से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है. 35 साल के शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी को अब तक हुई मतगणना में पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है.

देश में अक्सर जोड़ तोड़ और भ्रष्टाचार के लिए बदनाम पुरानी पार्टियां बुरी तरह पीछे चल रही हैं. साथ ही कई बार प्रधानमंत्री रह चुके राजनेता भी हार की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. भारतीय सीमा से लगी झापा 5 सीट पर खुद बालेंद्र, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से आगे चल रहे हैं.

इन रुझानों के बाद राजधानी काठमांडू के पूर्व मेयर शाह का प्रधानमंत्री बनना तय लग रहा है. गुरुवार को काठमांडू में 33 साल के दीपक अधिकारी ने कहा, "मैंने बालेन की वजह से राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी को वोट दिया है. मुझे लगता है कि वह प्रधानमंत्री बनेंगे और देश को समृद्ध बनाएंगे."

नेपाल की संसद में कुल 275 सीटें हैं. इनमें से 165 सीटों के लिए उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं. बाकी की 110 सीटें हर पार्टी को मिले वोट शेयर के अनुपात में बांटी जाती हैं. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक पूरी तरह स्पष्ट नतीजे शनिवार तक आ सकेंगे.

तीन करोड़ की आबादी वाले नेपाल में सितंबर 2025 में युवाओं ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. जेन-जी का आंदोलन कहे गए उस प्रदर्शन के दौरान राजनेताओं का भ्रष्टाचार, देश में छायी बेरोजगारी और परिवारवाद मुख्य मुद्दा थे. युवा आंदोलनकारियों का कहना था कि एक तरफ आम लोगों को रोजगार की तलाश में देश छोड़ना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ नेताओं के बच्चे, बाप के दम पर अकूत संपत्ति बना रहे हैं.

सोशल मीडिया पर ये मुद्दे वायरल होने लगे. कई लोग इन पर तंज कसने लगे, मीम्स और गाने बनने लगे. इसके बाद सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया, और इसी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए. कई प्रदर्शनकारियों की मौत और नेताओं से जुड़ी संपत्तियों को आग के हवाले करने के बाद ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.

यूपीएससी सीएसई 2025 का रिजल्ट जारी, अनुज अग्निहोत्री बने ऑल इंडिया टॉपर

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 का फाइनल रिजल्ट शुक्रवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है. यूपीएससी सीएसई की परीक्षा में कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है.

इस साल अनुज अग्निहोत्री ऑल इंडिया टॉपर बने हैं. उन्होंने परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है.

परीक्षा में चयनित कुल 958 उम्मीदवारों की नियुक्ति देश की प्रतिष्ठित सेवाओं जैसे- भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में की जाएगी. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए कुल 979 पदों पर भर्ती घोषित की गई थी.

अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष ने कराया एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सैनिकों के बीच अब भी दर्जनों जगहों पर एक दूसरे पर फायरिंग की जा रही है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ जारी इस ताजा संघर्ष को खुली जंग करार दिया है. शुक्रवार, 6 मार्च को भी दोनों देशों के बीच सीमा पर भीषण गोलीबारी जारी रही.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जारी इस संघर्ष के कारण 1,00,000 से ज्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. अफगानिस्तान में जान बचाने के लिए अपना घर बार छोड़ने वालों की संख्या करीब 1,15,000 आंकी गई है. वहीं पाकिस्तान में 3,000 लोग विस्थापित हुए है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है. डूरंड लाइन कही जाने वाली इस सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है. अफगानिस्तान इसे सही सीमा नहीं मानता है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर हिंसक झड़प

इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगानिस्तान की सत्ता पर बैठा तालिबान, पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. वह पाकिस्तान में हमले के करने वाले गुटों को बढ़ावा दे रहा है. वहीं काबुल का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अफगानिस्तान में तालिबान के कुछ बड़े नेताओं को खत्म करने की साजिश कर रही है. पिछले हफ्ते काबुल समेत अफगानिस्तान के कई बड़े शहरों पर पाकिस्तान के हवाई हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ चुका है.

राहुल गांधी ने भारत की विदेश नीति पर उठाया सवाल, कहा- "प्रधानमंत्री मजबूर हैं"

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की है. राहुल गांधी के आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए भाषण का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया है, "भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है. यह हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और सत्य व अहिंसा पर आधारित हमारी आध्यात्मिक विचारधारा में निहित होनी चाहिए. आज हम जो देख रहे हैं, वह नीति नहीं है. यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है."

राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया है, उस पर लिखा है, "11 फरवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराते खतरे की चेतावनी दी. अमेरिका ही तय करेगा कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं. चाहे रूस से खरीदना हो या ईरान से, अमेरिका ही फैसला करेगा. लेकिन हमारे प्रधानमंत्री फैसला नहीं करेंगे."

एक दिन पहले 5 मार्च को भी राहुल गांधी ने कहा था, "विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है. आगे भयंकर संकट मंडरा रहा है. भारत की तेल सप्लाई खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है. संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है. फिर भी प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है. इसके विपरीत भारत के पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो मजबूर हैं और रणनीतिक स्वायत्तता को त्याग चुके हैं."

क्या ईरान युद्ध तेल की कीमतों को ले जाएगा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार?

सैन्य हेलीकॉप्टरों के खतरनाक आमने सामने से ऑस्ट्रेलिया नाराज

ऑस्ट्रेलिया ने चीन के एक सैन्य हेलीकॉप्टर पर "असुरक्षित और गैर पेशवराना" उड़ान का आरोप लगाया है. ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बुधवार को पीले सागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ान भरते समय, उनके हेलीकॉप्टर को चाइनीज हेलीकॉप्टर ने इंटरसेप्ट किया.

गुरुवार को जारी किए गए बयान के मुताबिक, चीन का हेलीकॉप्टर, पहले ऑस्ट्रेलियाई एयरक्राफ्ट के बराबर की ऊंचाई पर आया और फिर "असुरक्षित फासले तक करीब आने लगा." इस दौरान चीनी हेलीकॉप्टर ने अपनी रफ्तार भी बढ़ाई.

कैनबरा के मुताबिक, संभावित हादसे को टालने के लिए ऑस्ट्रेलियाई पायलटों को खतरनाक रूप से तत्वरित कार्रवाई करनी पड़ी, "इस असुरक्षित और गैर पेशेवराना कलाबाजी से हमारे एयरक्राफ्ट और उसके कर्मचारियों के सामने जोखिम पैदा हुआ."

ऑस्ट्रेलिया, पीले सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रूटीन गश्त लगाता है. यह गश्त यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करवाने के लिए लगाए जाते हैं.

चीन के खिलाफ फिलीपींस की मदद करेंगे ऑस्ट्रेलिया और जापान

ऑस्ट्रेलिया समेत चीन के कुछ पड़ोसी देश भी बीजिंग पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दादागिरी का आरोप लगाते रहते हैं. हेलीकॉप्टरों से जुड़ी इस ताजा शिकायत पर ऑस्ट्रेलिया स्थिति चीनी दूतावास ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

खाड़ी में फंसे भारतीय, लौटना चाहते हैं वतन

ईरान, इस्राएल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच खाड़ी देशों में फंसे करीब 12,000 भारतीय नागरिकों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस पर खबर दी है. रिपोर्ट के मुताहिक अधिकांश अनुरोध संयुक्त अरब अमीरात से आए हैं, जहां ईरान की तरफ से लगातार हमलों के चलते हवाई क्षेत्र बंद है और नियमित उड़ानें अब भी रुकी हुई हैं.

फंसे हुए भारतीयों में बड़ी संख्या पर्यटकों और ट्रांजिट यात्रियों की है. साथ ही ऐसे छात्र भी हैं, जिनके शिक्षण संस्थान या तो बंद हो गए हैं या ऑनलाइन कक्षाओं में बदल गए हैं.

दुनिया भर में अमेरिकी तख्ता पलट की कोशिशों का दागदार इतिहास

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद तक कुल 22,000 भारतीयों ने क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशनों से संपर्क किया है, जिनमें से लगभग 10,000 लोगों को पिछले तीन दिनों में गैर-नियमित उड़ानों के जरिए भारत वापस लाया गया है.

वहीं, दोहा में फंसे करीब 850 भारतीयों ने जमीनी मार्ग से सऊदी अरब में प्रवेश कर रियाद एयरपोर्ट से भारत वापसी की है.

इटली ने फिर दी ईयू के हरित भविष्य को चुनौती

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने यूरोपीय संघ के उत्सर्जन ट्रेडिंग सिस्टम (ETS) को अस्थायी रूप से निलंबित करने की अपील की है. गुरुवार को मेलोनी ने ईरान युद्ध के असर का हवाला देते हुए कहा, "इटली विशेष रूप से ETS सिस्टम को निलंबित करने का प्रस्ताव चाहता है, वो भी ऐसे समय में जब ऊर्जा की कीमतें ऊपर जाने का जोखिम है."

इसके बाद उन्होंने कहा, रोम दो हफ्ते के भीतर होने वाले यूरोपीय संघ के नेताओं के सम्मेलन में "इसके जबरन निलंबन की मांग करेगा." इटली के उद्योग मंत्री अडोल्फो उर्सो ने भी ETS सिस्टम में बड़े बदलावों की मांग की है. मेलोनी इन बदलावों को बड़े सुधार कहती हैं.

यूरोपीय संघ, 2035 से नई पेट्रोल और डीजल कारों पर बैन लगाने जा रहा है. इन कोशिशों को यूरोपीय संघ का ग्रीन एजेंडा भी कहा जा रहा है. इटली की धुर दक्षिणपंथी पार्टी की नेता मेलोनी, कई मौकों पर ब्रसेल्स के इन प्रयासों को "हरित मूर्खता" कह चुकी हैं.

ट्रंप ने ईरानी कुर्दों से हमला करने को कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरानी कुर्द बलों को ईरान के भीतर कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया है. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरानी कुर्द मिलिशिया ईरान की सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई में उतरना चाहते हैं, तो वे इसका समर्थन करेंगे. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में युद्ध सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और संघर्ष कई देशों तक फैल चुका है.

दुनिया भर में अमेरिकी तख्ता पलट की कोशिशों का दागदार इतिहास

खमेनेई की मौत ईरान की जनता के लिए बड़ा मौकाः ट्रंप

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई की मौत के बाद देश के अगले सर्वोच्च नेता के चयन में अमेरिका को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. उनके इस बयान ने अमेरिकी विदेश और रक्षा प्रतिष्ठान को असहज स्थिति में डाल दिया है. इससे पहले बुधवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने कहा था कि अमेरिकी सैन्य अभियान के उद्देश्य सीमित हैं और नेतृत्व परिवर्तन उनकी रणनीति का हिस्सा नहीं है.

मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दक्षिण कोरिया से शिफ्ट कर खाड़ी पहुंचाएगा अमेरिका

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन ने कहा है कि अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेना, मिसाइलों को शिफ्ट करने की संभावित योजना पर बात कर रही हैं. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं. वहां अमेरिका का पैट्रियॉट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात है. अमेरिका अब इस डिफेंस सिस्टम को दक्षिण कोरिया से निकालकर ईरान युद्ध में इस्तेमाल करना चाहता है.

असल में यह खबर दक्षिण कोरिया के मीडिया में सुर्खियों में है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पैट्रियॉट सिस्टम मध्य पूर्व भेजे जाने के लिए तैयार कर दिया गया है. उसे ट्रांसपोर्ट करने के लिए अमेरिकी सेना के बड़े मालवाहक जहाज ओसान पहुंचे चुके हैं.

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ये शिफ्टिंग हो चुकी है. इन रिपोर्टों के बाद संसद में सवालों का जबाव देते हुए विदेश मंत्री चो ने यह जानकारी दी.

वहीं, दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी फौज ने कहा है, "ऑपरेशन की सुरक्षा के कारण, हम ऐसी आवाजाही, रिलोकेशन या किसी खास सैन्य क्षमता की कहीं और संभावित तैनाती पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. "

मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध के बीच ऐसी रिपोर्टें हैं कि तेहरान ने कतर में अमेरिका के सबसे अहम मिसाइल डिफेंस और रडार सिस्टम को भेद दिया है. ईरान के जवाबी हमलों से मध्य पूर्व के कई देशों में तैनात मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारी दबाव में हैं.

कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का एलान

कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार, 6 मार्च को घोषणा की कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. यह भारत में इस तरह की पहल करने वाला पहला राज्य बन गया है. राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण में कहा कि यह कदम बच्चों में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया लत को रोकने और इसके नकारात्मक प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रतिबंध कब से लागू होगा.

क्या बच्चों का मोबाइल और सोशल मीडिया बैन होना चाहिए?

सोशल मीडिया बैन करने के आइडिया से भारतीय टीनएजर्स नाखुश

राज्य सरकार के मुताबिक, यह प्रतिबंध बच्चों को डिजिटल लत, साइबरबुलिंग और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने का प्रयास है. वैश्विक स्तर पर भी ऐसी चिंताएं बढ़ रही हैं. दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया यह प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बना. अब अन्य देशों में भी नाबालिगों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा पर गंभीर विचार चल रहा है. कर्नाटक की यह घोषणा इसी व्यापक वैश्विक बहस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

ट्रंप पर यौन अपराध का आरोप लगाने वाली एप्स्टीन फाइलें जारी

अमेरिका के न्याय विभाग ने बच्चों के यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़ी कुछ और फाइलें जारी की है. यह फाइलें, असल में अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) के रिकॉर्ड हैं. गुरुवार को जारी की गई इन फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ यौन हमले का आरोप लगाने वाली एक महिला का इंटरव्यू भी है.

एफबीआई के दस्तावेजों में महिला की पहचान छिपाई गई है. एफबीआई के एजेंटों ने 2019 में इस महिला का इंटरव्यू चार बार लिया. दस्तावेजों के मुताबिक, महिला ने एफबीआई से कहा कि जब वह 13 से 15 साल के बीच थी, तब जेफ्री एप्स्टीन ने उसे डॉनल्ड ट्रंप से मिलवाया. महिला का आरोप है कि उस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने अपने पैंट की चेन खोलते हुए उसे जबरन ओरल सेक्स के लिए मजबूर किया.

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार को रिलीज की गई एप्स्टीन फाइल्स पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट कुछ समय पहले, इस मामले को "पूरी तरह निराधार आरोप वो भी बिना किसी विश्वसनीय सबूत वाला" करार दे चुकी हैं.

ट्रंप कह चुके हैं कि एप्स्टीन से उनकी दोस्ती 2000 के दशक के मध्य तक थी. एप्स्टीन की कई पार्टियों में नजर आने वाले ट्रंप यह भी दावा करते हैं कि उन्हें एप्स्टीन के यौन अपराधों की बिल्कुल भनक नहीं थी. हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर संदेह करने की कई ठोस वजहें हैं.


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