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भारत और मिस्र के बीच पहली नौसेना-स्तरीय स्टाफ वार्ता, समुद्री रक्षा संबंधों की मजबूती का अहम कदम

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत और मिस्र की नौसेनाओं के बीच पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता (एनएनएसटी) काहिरा में आयोजित की गई

भारत और मिस्र के बीच पहली नौसेना-स्तरीय स्टाफ वार्ता, समुद्री रक्षा संबंधों की मजबूती का अहम कदम
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काहिरा। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारत और मिस्र की नौसेनाओं के बीच पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता (एनएनएसटी) काहिरा में आयोजित की गई। यह बैठक भारत-मिस्र संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) की 11वीं बैठक के दौरान हुई।

इस बातचीत को भारतीय दूतावास ने समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। दोनों देशों के बीच हुई इस बातचीत में ऑपरेशनल तालमेल, संयुक्त प्रशिक्षण, समुद्री क्षेत्र की जानकारी और नौसेना तकनीक और जहाज निर्माण में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।

समुद्री सहयोग भारत और मिस्र के रक्षा संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। यह बैठक दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

इससे पहले इसी हफ्ते काहिरा में हुई जेडीसी बैठक में भी दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर अच्छी और उपयोगी चर्चा की थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया। इसमें रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। वहीं मिस्र की तरफ से रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

दोनों पक्षों ने पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे के लिए एक रोडमैप तय किया। इसमें 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर सहमति बनी, जिसमें कई चीजें शामिल हैं। जैसे सैन्य स्तर पर अधिक संरचित बातचीत, संयुक्त प्रशिक्षण बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ाना, और रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी बढ़ाना।

भारतीय पक्ष ने अपने तेजी से बढ़ते रक्षा उत्पादन क्षेत्र की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा हो चुका है और भारत लगभग चार अरब डॉलर के रक्षा उत्पाद 100 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है।

दोनों देशों ने मिलकर रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसमें संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों का विकास और उत्पादन करने की संभावनाओं पर काम करने की बात हुई। रक्षा क्षेत्र में उद्योग सहयोग अब भारत और मिस्र के रिश्तों का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है।


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