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युवा पीढ़ी के साथ नई उड़ान भर रहा है 3,000 साल पुराना ली ब्रोकेड

दक्षिण चीन के हैनान प्रांत के वुझिशान शहर में एक पुरानी परंपरा नए दौर की पहचान बन रही है। कभी केवल पारंपरिक परिधानों तक सीमित रहने वाला ली ब्रोकेड आज बैग, स्कार्फ, गहनों, नोटबुक कवर, फोन कवर और अन्य आधुनिक उत्पादों के जरिए युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है।

युवा पीढ़ी के साथ नई उड़ान भर रहा है 3,000 साल पुराना ली ब्रोकेड
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बीजिंग। दक्षिण चीन के हैनान प्रांत के वुझिशान शहर में एक पुरानी परंपरा नए दौर की पहचान बन रही है। कभी केवल पारंपरिक परिधानों तक सीमित रहने वाला ली ब्रोकेड आज बैग, स्कार्फ, गहनों, नोटबुक कवर, फोन कवर और अन्य आधुनिक उत्पादों के जरिए युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है।

ली ब्रोकेड, ली जातीय समूह की पारंपरिक कताई, रंगाई, बुनाई और कढ़ाई की कला है। प्राकृतिक रेशों से कपड़े और रोजमर्रा की वस्तुएं तैयार करने की यह परंपरा 3,000 से अधिक वर्ष पुरानी है और इसे चीन के वस्त्र इतिहास का 'जीवित जीवाश्म' कहा जाता है।

दिसंबर 2024 में ली ब्रोकेड की पारंपरिक कताई, रंगाई, बुनाई और कढ़ाई तकनीक को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की यूनेस्को प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया। यह मान्यता इस प्राचीन कला की वैश्विक पहचान को और मजबूत करती है।

आज ली ब्रोकेड से जुड़े 100 से अधिक प्रकार के रचनात्मक सांस्कृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें परंपरा और आधुनिक सौंदर्यबोध का ऐसा मेल दिखाई देता है, जिसने युवा उपभोक्ताओं को तेजी से आकर्षित किया है।

वुझिशान में ली ब्रोकेड की अगली पीढ़ी तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और अभ्यास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शहर में 22 प्रशिक्षण एवं अभ्यास केंद्र और सात अमूर्त सांस्कृतिक विरासत कार्यशालाएं स्थापित की गई हैं।

ली ब्रोकेड अब सिर्फ हैनान या चीन तक सीमित नहीं है। 2021 के बाद से यह चीन और विदेशों में आयोजित फैशन वीक के रनवे पर दिखाई दे रहा है। युवा उत्तराधिकारी अपने डिजाइनों के माध्यम से इस प्राचीन कला को अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत से परिचित करा रहे हैं।

अगस्त 2023 में वुझिशान ने इटली के फैशन और डिजाइन संस्थान इस्टिटूटो मारंगोनी के साथ साझेदारी कर ली ब्रोकेड शिल्पकारों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया। इसके तहत प्रतिभाशाली बुनकरों को आगे की पढ़ाई और प्रशिक्षण के अवसर दिए गए।

ली ब्रोकेड की कहानी यह दिखाती है कि किसी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए उसे केवल संग्रहालयों में सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है। उसे नई पीढ़ी की जरूरतों, पसंद और जीवनशैली से जोड़ना भी जरूरी है।

युवा उत्तराधिकारी पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक डिजाइन, नए उत्पादों और नए बाजारों से जोड़ रहे हैं। इससे एक ओर हजारों साल पुरानी संस्कृति जीवित रह रही है, तो दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुल रहे हैं।

ली ब्रोकेड की यह नई यात्रा साबित करती है कि जब परंपरा को नवाचार का साथ मिलता है, तो विरासत सिर्फ अतीत की पहचान नहीं रहती, वह भविष्य के करियर और विकास की ताकत भी बन सकती है।


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