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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में टैरिफ सबसे बड़ा रोड़ा, कृषि क्षेत्र बना विवाद का केंद्र

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में टैरिफ सबसे बड़ा रोड़ा, कृषि क्षेत्र बना विवाद का केंद्र
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अमेरिकी प्रतिनिधि ग्रीर बोले- ‘सेब आयात पर बार-बार उठ रहा सवाल’

  • भारत में 50% टैरिफ से अमेरिकी सेब की हिस्सेदारी 53% से घटकर 8.5%
  • ‘संतुलित समझौते की जरूरत’, अमेरिकी सांसदों ने चेताया- टैरिफ से बढ़ रही कंपनियों की लागत
  • ग्रीर का बयान- ‘बातचीत जारी, अंतिम समझौता तभी जब सब मुद्दे सुलझें’

वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत में मौजूद टैरिफ बाधाओं को लेकर चल रही व्यापार वार्ताओं को एक अहम मुद्दा बताया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।

वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने दफ्तर के बजट पर एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक “पारस्परिक व्यापार ढांचा” तैयार किया जा सके। इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है।

उन्होंने कहा, “हम पिछले एक साल से भारतीयों के साथ काम कर रहे हैं। मैंने इस हफ्ते उनके राजदूत से भी मुलाकात की ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।”

उन्‍होंने कहा क‍ि एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका का दौरा करने वाला है।

उन्होंने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है। “हमने सेब के बारे में कई बार बात की है। मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है,” उन्होंने कहा, जिससे साफ है कि यह मामला उच्च स्तर पर भी उठाया गया है।

अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है। इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है। 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है। इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

ग्रीर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि एक ऐसा संतुलित समझौता हो जिसमें अमेरिकी निर्यातकों को भी उन बाजारों में बराबर मौका मिले जहां भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।

उन्होंने कहा, “अगर भारत सेब आयात करता है, तो हम चाहते हैं कि वह अमेरिका से भी सेब खरीदे,” लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है।

ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापक रणनीति के तहत टैरिफ का इस्तेमाल करके व्यापार समझौतों को अपने पक्ष में करने और व्यापार संबंधों को नए तरीके से बनाने की कोशिश कर रहा है।

ग्रीर ने सांसदों को बताया कि अमेरिका कई देशों के साथ समझौते कर चुका है और अब अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने पर काम कर रहा है।

सांसदों ने कहा कि टैरिफ की वजह से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ी है, और साथ ही दूसरे देशों की तरफ से जवाबी कदमों ने निर्यात बढ़ाने को और मुश्किल बना दिया है।

अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए भारत एक बड़ा अवसर भी है और एक बड़ी चुनौती भी।

सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ कम नहीं किए गए, तो अमेरिकी निर्यातक उन देशों से और पीछे रह जाएंगे जिन्हें भारत के साथ बेहतर व्यापारिक समझौते मिले हुए हैं।

ग्रीर ने जोर देकर कहा कि बातचीत अभी चल रही है और अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, “इन बातचीत में तब तक कुछ तय नहीं होता, जब तक सब कुछ फाइनल न हो जाए।”


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