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अमेरिका के साथ बातचीत 'ज्यादा मांगों' के बिना सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ सकती है : ईरान

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है और दोनों देशों के हितों की रक्षा कर सकती है

अमेरिका के साथ बातचीत ज्यादा मांगों के बिना सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ सकती है : ईरान
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तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है और दोनों देशों के हितों की रक्षा कर सकती है, लेकिन यह बातचीत वास्तविकता पर आधारित होनी चाहिए और इसमें जरूरत से ज्यादा मांगें न रखी जाएं।

ईरान की रक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी ने यह बात कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा को दिए गए एक साक्षात्कार में कही। यह साक्षात्कार शुक्रवार को प्रकाशित हुआ। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की, जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर अप्रत्यक्ष बातचीत फिर से शुरू हुई है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इस बातचीत का पहला दौर 6 फरवरी को ओमान में हुआ था।

शमखानी ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों से बचना सभी पक्षों के लिए समझदारी भरा रास्ता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कूटनीतिक कोशिशों का मकसद तनाव कम करना और राजनीतिक समाधान को मजबूत करना है।

उन्होंने साफ कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम देश की “लाल रेखा” है और इस पर कोई बातचीत नहीं होगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी ने ईरान के खिलाफ कोई आक्रामक कदम उठाया तो उसे “कड़ा, निर्णायक और उचित” जवाब दिया जाएगा।

शमखानी ने यह भी कहा कि अमेरिका के समर्थन के बिना इजरायल, ईरान पर हमला नहीं कर सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की सैन्य तैयारी का स्तर बहुत ऊंचा है, इसलिए अगर कोई देश गलत आकलन करेगा तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती भी बढ़ी है, हालांकि हाल के दिनों में कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।

इससे पहले बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा था कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर “जरूरत से ज्यादा मांगों के आगे नहीं झुकेगा”। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है।


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