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समझौता ज्ञापन का उल्लंघन जारी रहने तक अमेर‍िका के साथ बातचीत संभव नहीं: अराघची

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। विदेश मंत्रालय के सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यह बात कही।

समझौता ज्ञापन का उल्लंघन जारी रहने तक अमेर‍िका के साथ बातचीत संभव नहीं: अराघची
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तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। विदेश मंत्रालय के सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यह बात कही।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, अराघची ने कहा, "इस समय हमारी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, कुछ मध्यस्थ अब भी बातचीत दोबारा शुरू कराने के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे नजरिए से तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं हो सकती, जब तक अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) के उल्लंघन बंद नहीं करता और पहले किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता।"

उन्होंने कहा, "जब तक अमेरिका एमओयू के उल्लंघन रोक नहीं देता और अपनी गलतियों का सुधार नहीं करता, तब तक हमारी राय में बातचीत दोबारा शुरू होने की कोई संभावना नहीं है।"

विदेश मंत्री ने बताया कि होर्मुज स्‍ट्रेट में एक नए समुद्री मार्ग को तय करने के मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ नए समुद्री मार्गों पर काम कर रहे हैं, जो मौजूदा पुराने मार्गों की जगह लेंगे।

अराघची ने कहा, "इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्‍ट्रेट को खोल दिया जाएगा। इस संबंध में एक समझौता हो सकता है, लेकिन होर्मुज स्‍ट्रेट को खोले जाने का फैसला कई शर्तों पर निर्भर करेगा।"

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा था कि तेहरान एमओयू के तहत शांति के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा, बशर्ते वॉशिंगटन भरोसे का माहौल बनाने में मदद करे।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेशकियन ने कहा कि ईरान एमओयू में शामिल प्रावधानों के आधार पर 'शांति के रास्ते' पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, "समझौते तक पहुंचने के लिए यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि देश में एकता, ताकत और आपसी सहयोग मौजूद है।"

उन्होंने कहा, "हम एमओयू को आधार बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अमेरिका उस अविश्वास के माहौल को खत्म करे जिसे उसने पैदा किया है, और उसकी जगह भरोसे का माहौल बने।"


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