Top
Begin typing your search above and press return to search.

जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, साझेदारी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के समय में आपसी भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है

जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, साझेदारी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं
X

एवियन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आज के समय में आपसी भरोसा ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। उन्होंने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में अपने विचार साझा करते हुए यह बात कही।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए देशों के बीच मजबूत साझेदारी बनाना बहुत जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्‍स' पर लिखा, "दुनिया पहले से कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे समय में यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, लेकिन कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।"

उन्होंने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में व्यापार और तकनीक का इस्तेमाल कई बार संकीर्ण स्वार्थों के लिए किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे की कमी पैदा हो रही है।

उन्होंने कहा, "आज आपसी भरोसा सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है। दुख की बात यह है कि दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। हमारी साझेदारियों का भविष्य इसी बात पर निर्भर करेगा कि हम इस भरोसे को फिर से कैसे मजबूत करते हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है। हमारे अनुभव से यह साबित हुआ है कि विकास तभी सबसे प्रभावी होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों से जुड़ा हो।"

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा 'मानवता पहले' के सिद्धांत का पालन किया है और आज भी यही सोच उसकी सभी कोशिशों के केंद्र में है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, यही सोच भारत की कई अंतरराष्ट्रीय पहलों की भी नींव है, जैसे इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान।

उन्होंने कहा कि इसी समावेशी सोच के कारण भारत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में रहा है। चाहे श्रीलंका में चक्रवात आया हो, अफगानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ या जमैका में तूफान, भारत ने हमेशा मदद का हाथ बढ़ाया है।

भारत की समावेशी और टिकाऊ विकास यात्रा के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय' का मंत्र देश को आगे बढ़ाने में अहम रहा है। इसी सोच के कारण वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, तकनीक के जरिए लोगों को सशक्त बनाने और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास में अच्छे परिणाम मिले हैं।

उन्होंने कहा, "भारत का मानना है कि किसी साझेदारी की असली परीक्षा यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह है कि हम उन्हें खुद अपने लिए क्या बनाने में सक्षम बनाते हैं। हमारी विकास साझेदारियां भी इसी भावना को दर्शाती हैं। हमने अपने साझेदार देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं और उसे सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि बराबरी की साझेदारी चाहिए।

उन्होंने कहा, "हमें दान देने वाले और लेने वाले की सोच से आगे बढ़ना होगा और समान भागीदार के रूप में काम करना होगा। हमें साथ चलना होगा, सिर्फ एक-दूसरे के बगल में नहीं। साझेदारी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं।"

उन्होंने अफ्रीका में भारत की पहलों का भी जिक्र किया और बताया कि भारत वहां प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "ये प्रयास अफ्रीकी देशों की क्षमता बढ़ा रहे हैं और उन्हें दुनिया की बड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद कर रहे हैं।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it